रीवा: रिश्वत में नोट नहीं 'प्लाट' ले रहे तहसीलदार! 2 प्लाट की रजिस्ट्री का खुला राज, लोकायुक्त ने दर्ज किए बयान, कई पटवारी भी नपे

 
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ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। मध्य प्रदेश के रीवा जिले से भ्रष्टाचार का एक ऐसा अनोखा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। आमतौर पर सरकारी अधिकारी काम के बदले रुपयों की मांग करते हैं, लेकिन रीवा हुजूर तहसील में पदस्थ एक राजस्व अधिकारी पर सीधे जमीन के प्लाट अपने परिजनों के नाम कराने का गंभीर आरोप लगा है। लोकायुक्त पुलिस रीवा अब इस पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुट गई है।

नामांतरण के बदले दो प्लाट की रजिस्ट्री: क्या है पूरा सच?
यह पूरा विवाद शहर के पॉश इलाके लाड़ली लक्ष्मी पथ के पास स्थित एक बेशकीमती जमीन से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, विधायक नागेंद्र सिंह के बंगले की ओर जाने वाली सड़क के दूसरी तरफ एक जमीन पर प्लाटिंग की गई थी। इस जमीन के नामांतरण (Mutation) का प्रकरण तहसीलदार हुजूर के न्यायालय में लंबित था।

आरोप है कि इस नामांतरण को क्लियर करने के एवज में अधिकारी ने मोटी रकम के बजाय सीधे दो प्लाट की मांग की। इतना ही नहीं, यह प्लाट अधिकारी ने अपने परिजनों के नाम पर बाकायदा रजिस्ट्री भी करवा लिए। शिकायतकर्ता ने लोकायुक्त को रजिस्ट्री नंबर और संबंधित दस्तावेज सौंप दिए हैं, जो इस भ्रष्टाचार की ओर पुख्ता इशारा कर रहे हैं।

लोकायुक्त की रडार पर तहसीलदार और पटवारी 
मामले की गंभीरता को देखते हुए लोकायुक्त एसपी सुनील पाटीदार ने जांच के आदेश दिए हैं। लोकायुक्त पुलिस ने न केवल तहसीलदार को बल्कि इस पूरी प्रक्रिया में गवाह बने पटवारियों को भी नोटिस जारी किया है।

  • दस्तावेजी सबूत: शिकायतकर्ता ने रजिस्ट्री के पुख्ता प्रमाण पेश किए हैं।
  • बयान दर्ज: तहसीलदार हुजूर और संबंधित पटवारियों को तलब कर उनके बयान दर्ज किए जा चुके हैं।
  • साजिश: आरोप है कि इस पूरे खेल में पटवारियों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

करही हल्का और महिला पटवारी की संदिग्ध कार्यप्रणाली 
इस भ्रष्टाचार के खेल में करही हल्का की भूमिका सबसे अहम मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि पूर्व में पदस्थ एक पुरुष और एक महिला पटवारी ने मिलकर नामांतरण के केस में तकनीकी पेंच फंसाया था। जब जमीन मालिक परेशान हो गया, तब मामला तहसीलदार तक पहुँचाया गया।

सूत्रों के अनुसार, जब तहसीलदार को दो प्लाट मिल गए, तो महिला पटवारी का लालच भी बढ़ गया और वह जमीन मालिक पर दबाव बनाने लगी। शिकायतों के बाद उक्त महिला पटवारी का तबादला भी किया गया, लेकिन प्रशासनिक सांठगांठ के चलते उन्हें पुनः मैदानी पदस्थापना मिल गई।

रीवा राजस्व विभाग का दागदार इतिहास 
रीवा का राजस्व विभाग पहले भी विवादों में रहा है। इससे पहले किसानों के भू-अर्जन (Land Acquisition) के मुआवजे की करोड़ों की राशि निजी बैंक खातों में जमा करने का घोटाला सामने आया था।

  • अधिकारियों ने किसानों के नाम पर डमी खाते खोलकर ब्याज डकारा।
  • सरकारी पैसे का निजी इस्तेमाल किया गया।
  • पूर्व में भी कई अधिकारियों पर जांच चली लेकिन राजनीतिक रसूख के चलते मामले ठंडे बस्ते में चले गए।

क्या दोषियों पर होगी कार्रवाई? 
वर्तमान में लोकायुक्त रीवा इस मामले की सूक्ष्मता से जांच कर रही है। एसपी सुनील पाटीदार के अनुसार, शिकायत प्राप्त हुई है और साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जा रही है। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह रीवा प्रशासन के लिए एक बड़ा शर्मनाक प्रकरण साबित होगा। जनता अब यह देख रही है कि क्या 'जमीन के बदले काम' करने वाले इन रसूखदार अधिकारियों पर सलाखें नसीब होंगी या यह मामला भी फाइलों में दब जाएगा।

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