रीवा SP-IG ध्यान दें! नशेड़ियों का 'एशगाह' बना ट्रांसपोर्ट नगर कब होगी कार्रवाई?    

 
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ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) जिला पुलिस द्वारा नशे के कारोबारियों पर नकेल कसने के लिए चलाए जा रहे 'ऑपरेशन प्रहार 2.0' की सफलता पर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जहां एक ओर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने नशे के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की मंशा जाहिर की है, वहीं दूसरी ओर नगर निगम की महत्वाकांक्षी योजना ट्रांसपोर्ट नगर (पड़रा मोहल्ला) अपराधियों और नशेड़ियों के खुले अड्डे में तब्दील हो चुका है। यह स्थिति संकेत देती है कि या तो कार्रवाई की दिशा गलत है, या फिर निचले पुलिस अमले की सरपरस्ती के कारण वरिष्ठ अधिकारियों की मनसा पर पानी फिर रहा है।

सुबह से सजती है शराब-कोरेक्स की महफिलें: अपराध का नया गढ़
ट्रांसपोर्ट नगर में हालात इतने खराब हो चुके हैं कि सुबह होते ही यहां जगह-जगह शराब की महफिलें सज जाती हैं। कोरेक्स (Corex) पीने वाले और गांजा/नशीले इंजेक्शन लेने वाले नशेड़ियों का यह एक एशगाह (आरामगाह) बन चुका है।

  • नशे की सामग्री: खुलेआम शराब, कोरेक्स सिरप और गांजा का सेवन हो रहा है।
  • अपराधियों का जमघट: स्थानीय लोगों के अनुसार, यहां दिन भर अपराधियों का जमघट लगा रहता है, जिससे किसी भी दिन बड़ी वारदात होने की आशंका बनी हुई है।

शहर के दूसरे इलाके भी बने नशे के नए हॉटस्पॉट 
पुलिस द्वारा बदनाम कबाड़ी  मोहल्ला में कुछ अंकुश लगाने के बावजूद, नशे का कारोबार शहर के अन्य संवेदनशील इलाकों में तेज़ी से फैल गया है, जो 'ऑपरेशन प्रहार 2.0' की अपूर्णता को दर्शाता है।

  • सिटी कोतवाली क्षेत्र: रानी तालाब और धोबिया टंकी का क्षेत्र अब नशे के दूसरे गढ़ के रूप में पूरी तरह विकसित हो चुका है, जो कबाड़ी  मोहल्ले से भी दो कदम आगे निकल गया है।
  • नए मंडी: नया बस स्टैंड, रतहरा, गूढ़ और रतहरा बायपास जैसे प्रमुख स्थान भी नशे की नई मंडियों के रूप में विकसित हो रहे हैं।

यातायात नगर की विफलता: व्यापारियों के सपनों पर फिरा पानी
करीब 15 वर्ष पहले नगर निगम ने पड़रा मोहल्ले में विशाल यातायात नगर की स्थापना इस उद्देश्य से की थी कि पुराना बस स्टैंड यहां शिफ्ट हो जाएगा। इस योजना पर भरोसा करके कई छोटे-बड़े व्यापारियों ने लाखों रुपए की लागत से प्लाट खरीदे और निवेश किया।

  • वर्तमान स्थिति: दशकों बीत जाने के बाद भी पुराना बस स्टैंड कलेक्ट्रेट कार्यालय के बगल से ही संचालित हो रहा है।
  • परिणाम: ट्रांसपोर्ट नगर की उपेक्षा हुई और यह अब व्यवसायिक केंद्र के बजाय अपराधियों और नशेड़ियों की पनाहगाह बन गया है, जिससे निवेशकों के सपनों पर पानी फिर गया है।

विंध्य विहार कॉलोनी पर मंडरा रहा खतरा: नागरिकों की मुश्किल 
ट्रांसपोर्ट नगर की यह अराजकता सीधे तौर पर मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी विंध्य विहार के रहवासियों के लिए बड़ा खतरा बन गई है।

  • कानून-व्यवस्था का संकट: कॉलोनी के आसपास अपराधियों का जमघट लगने की वजह से निवासियों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रहीं हैं।
  • बढ़ती घटनाएं: आए दिन मारपीट और लूट खसोट की घटनाएं आम हो चुकी हैं।
  • लॉन्ग टेल कीवर्ड: विंध्य विहार में सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करें

वरिष्ठ अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप और कठोर कार्रवाई की मांग
अगर पुलिस प्रशासन ने इस गंभीर और ज्वलंत समस्या पर समय रहते ध्यान नहीं दिया, तो ट्रांसपोर्ट नगर समेत आसपास की विंध्य विहार कॉलोनी में किसी भी दिन कोई बड़ी वारदात घट सकती है। यह मामला सीधे तौर पर कानून-व्यवस्था और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है।

अपील: तत्काल प्रभाव से पुलिस अधीक्षक एवं महानिरीक्षक महोदय से अनुरोध है कि वे निचले अमले की भूमिका की जांच करें और ट्रांसपोर्ट नगर, रानी तालाब, धोबिया टंकी में जीरो टॉलरेंस नीति के तहत तत्काल कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करें।

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