रीवा की वो मर्डर मिस्ट्री जिससे दहल उठी MP की सियासत : दरिंदों ने सांसद की महिला असिस्टेंट के जिस्म के उड़ा दिए चिथड़े, SIT के घेरे में 'सफेदपोश'

 
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ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। शहडोल सांसद हिमाद्री सिंह की निजी सहायक (PA) रहीं रोशनी शुक्ला की मौत ने मध्य प्रदेश की कानून व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। 23 वर्षीय रोशनी, जो दिल्ली से लेकर शहडोल तक सत्ता के गलियारों में सक्रिय थीं, उन्हें रीवा के बेलवा मोड़ पर इतनी बेरहमी से कुचला गया कि देखने वालों की रूह कांप गई। यह मामला अब साधारण 'हिट एंड रन' से निकलकर एक हाई-प्रोफाइल मर्डर मिस्ट्री बन चुका है।

14 जनवरी: मकर संक्रांति की वो आखिरी कॉल
घटना की शुरुआत 14 जनवरी, मकर संक्रांति के दिन हुई। रोशनी दिल्ली में सांसद के आवास से लौटकर घर आई थी। उसे एक दलिया प्लांट के संचालक का फोन आया, जिसने उसे प्लांट बुलाया। काम खत्म कर रोशनी रात करीब 8:45 बजे बस से बेलवा मोड़ पर उतरी। उसने अपने भाई को फोन कर लेने आने को कहा, लेकिन नियति उसे घर पहुँचने का मौका नहीं देना चाहती थी।

भाजपा नेत्री रोशनी शुक्ला को बोलेरो से कुचल दिया गया, जिससे उसकी मौत हो गई।

भाजपा नेत्री रोशनी शुक्ला को बोलेरो से कुचल दिया गया, जिससे उसकी मौत हो गई।

वारदात की रात: 'चप्पल से मारूंगी' और शुरू हुआ मौत का खेल
बस से उतरकर रोशनी पैदल आगे बढ़ी। चश्मदीदों के अनुसार, वहां दो बोलेरो गाड़ियां पहले से खड़ी थीं। जब रोशनी उनके पास से गुजरी, तो कार सवार युवकों ने उस पर फब्तियां कसीं और बदतमीजी की। रोशनी ने हिम्मत दिखाते हुए पलटकर जवाब दिया— "अगर दोबारा हरकत की तो चप्पल से मारूंगी।" यही शब्द शायद उन दरिंदों के अहंकार पर चोट कर गए और उन्होंने रोशनी का पीछा शुरू कर दिया।

साजिश का क्लाइमेक्स: दो बोलेरो और 45 मिनट का संघर्ष
रोशनी जान बचाने के लिए भागी, लेकिन हमलावर पूरी तैयारी में थे। पहली बोलेरो ने उसे जोरदार टक्कर मारी। वह जमीन पर गिरी ही थी कि दूसरी बिना नंबर की बोलेरो ने उसे सरेराह रौंदना शुरू कर दिया। चश्मदीद सुनीता सिंह के अनुसार, गाड़ी को बार-बार आगे-पीछे कर रोशनी को कुचला गया। अंततः गाड़ी पलट गई और रोशनी उसके नीचे दब गई। करीब 15 लोगों ने 45 मिनट की मशक्कत के बाद बल्लियों के सहारे गाड़ी उठाकर रोशनी को बाहर निकाला, लेकिन तब तक उसका शरीर खंड-खंड हो चुका था।

भाजपा सांसद हिमाद्री के साथ रोशनी काम कर रही थी। वह चुनाव प्रचार में भी सक्रिय रहती थी।

भाजपा सांसद हिमाद्री के साथ रोशनी काम कर रही थी। वह चुनाव प्रचार में भी सक्रिय रहती थी।

चश्मदीदों की जुबानी: गर्भाशय से पैर तक क्षत-विक्षत शरीर
प्रत्यक्षदर्शी रामलखन आदिवासी और रामबुटान रावत ने बताया कि नजारा इतना भयावह था कि शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। रोशनी की रीढ़ की हड्डी टूट चुकी थी, पैर तीन जगह से फ्रैक्चर थे और उसका गर्भाशय पूरी तरह नष्ट हो चुका था। वह 48 घंटों तक मौत से लड़ती रही, लेकिन शरीर के अंदरूनी अंगों की चोटों ने उसकी जान ले ली। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे गाड़ियां शाम 5 बजे से ही इलाके में रेकी कर रही थीं।

इसी बोलेरो ने रोशनी को रौंदा था, इस कारण उसकी मौत हो गई थी।

इसी बोलेरो ने रोशनी को रौंदा था, इस कारण उसकी मौत हो गई थी।

परिवार का दर्द: 'डोली की जगह अर्थी उठानी पड़ी'
रोशनी के पिता शिवाकांत शुक्ला और मां तारा शुक्ला का रो-रोकर बुरा हाल है। पिता ने कहा, "बेटी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते के यहाँ से करियर शुरू किया था, उसे बहुत आगे जाना था।" वहीं रोशनी के भाई प्रकाश ने एक बड़ा खुलासा किया कि रोशनी ने पहले ही संकेत दिया था कि उसे कुछ लोगों से खतरा है, लेकिन परिवार की चिंता के कारण उसने नाम नहीं बताए थे।

भाजपा सांसद, रोशनी की मौत की बाद उसके घर पहुंची और परिवार को दिलासा दिया।

भाजपा सांसद, रोशनी की मौत की बाद उसके घर पहुंची और परिवार को दिलासा दिया।

पुलिसिया कार्रवाई: 7 दिन बाद SIT का गठन
रोशनी की मौत के 7 दिन बीत जाने के बाद भी जब पुलिस के हाथ खाली रहे और जन-आक्रोश बढ़ा, तब रीवा एसपी शैलेंद्र सिंह ने 23 जनवरी 2026 को एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। फिलहाल पुलिस 'हिट एंड रन' और 'मर्डर' दोनों एंगल पर जांच कर रही है। हैरानी की बात यह है कि वारदात में शामिल मुख्य कार का मालिक कौन है, यह जानकारी अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है।

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