9000 करोड़ का बजट और 2028 की डेडलाइन: अब पटरी पर दौड़ेगा विंध्य का सपना, ललितपुर-सिंगरौली प्रोजेक्ट पर आई बड़ी अपडेट, डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने दिए भू-अर्जन निपटाने के सख्त निर्देश
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। मध्य प्रदेश के विंध्य और बुंदेलखंड अंचल को जोड़ने वाली सबसे महत्वपूर्ण ललितपुर-सतना-रीवा-सीधी-सिंगरौली नई रेल लाइन अब अपने निर्णायक दौर में पहुंच गई है। रीवा संभाग मुख्यालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में सरकार ने यह साफ कर दिया है कि साल 2028 तक इस ट्रैक पर रेलगाड़ियों का संचालन शुरू कर दिया जाएगा। इस बैठक में उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल और सांसद जनार्दन मिश्रा ने परियोजना की प्रगति का जायजा लिया और अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए।
9000 करोड़ का मेगा प्रोजेक्ट: विकास की नई इबारत
यह महत्वाकांक्षी रेल परियोजना लगभग 541 किलोमीटर लंबी है, जिसकी अनुमानित लागत 9000 करोड़ रुपए के करीब है। इस लाइन के बिछ जाने से विंध्य क्षेत्र का सीधा संपर्क देश के बड़े महानगरों और दिल्ली से हो जाएगा। फिलहाल सीधी और सिंगरौली जैसे जिलों में रेल कनेक्टिविटी की भारी कमी है, जिसे यह प्रोजेक्ट दूर करेगा।
समीक्षा बैठक के मुख्य निर्णय: समय पर काम पूरा करने का संकल्प
रीवा में हुई इस बैठक में संभाग के सभी जिलों के कलेक्टर, कमिश्नर और रेलवे के वरिष्ठ इंजीनियर मौजूद रहे। बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु भू-अर्जन (Land Acquisition) से जुड़ी समस्याएं रहीं। कई जगहों पर जमीन अधिग्रहण न होने के कारण काम रुका हुआ था, जिसे अब युद्ध स्तर पर सुलझाने का निर्णय लिया गया है।
डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल का रुख: समन्वय से हटेगी हर बाधा
उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने मीडिया से चर्चा के दौरान कहा कि इस परियोजना में अब देरी की कोई गुंजाइश नहीं है। उन्होंने कहा, "समीक्षा बैठक का मुख्य उद्देश्य उन अड़चनों को दूर करना था जो काम की गति धीमी कर रही थीं। हमने तय किया है कि सभी संबंधित विभाग आपसी तालमेल के साथ काम करेंगे ताकि 2028 तक यह रेल लाइन जनता के लिए शुरू हो सके।"
सांसद जनार्दन मिश्रा: विंध्य के लिए आर्थिक क्रांति का आधार
रीवा सांसद जनार्दन मिश्रा ने इस परियोजना को विंध्य क्षेत्र की "विकास की रीढ़" बताया। उनके अनुसार, रेल लाइन के आने से इस क्षेत्र के खनिज संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और स्थानीय उद्योगों को नई ऊर्जा मिलेगी। केंद्र और राज्य सरकार की साझा प्रतिबद्धता ही इस बड़े प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करने में मदद करेगी।
इस रेल लाइन से क्या बदल जाएगा?
- सीधी कनेक्टिविटी: रीवा, सतना और सिंगरौली सीधे दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों से जुड़ सकेंगे।
- व्यापारिक लाभ: सिंगरौली की कोयला खदानों और उद्योगों के लिए माल ढुलाई आसान और सस्ती होगी।
- आम आदमी को राहत: सड़क मार्ग के लंबे और थकाऊ सफर से मुक्ति मिलेगी और सुरक्षित रेल यात्रा का विकल्प मिलेगा।
- क्षेत्रीय विकास: रेलवे स्टेशनों के आसपास नए बाजार और व्यापारिक केंद्र विकसित होंगे।
प्रशासनिक सक्रियता और आगामी लक्ष्य
बैठक में उपस्थित कलेक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रभावित किसानों और भूमि स्वामियों के मुआवज़े की प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करें। रेलवे विभाग को भी फंड और लेबर मैनेजमेंट बेहतर करने को कहा गया है ताकि निर्माण कार्य की गति में कोई कमी न आए।
विंध्य के सुनहरे भविष्य की शुरुआत
ललितपुर-सिंगरौली रेल लाइन केवल एक बुनियादी ढांचा नहीं है, बल्कि यह लाखों लोगों की उम्मीदों का मार्ग है। 2028 की समयसीमा तय होने से जनता के बीच विश्वास जगा है। अगर तय योजना के अनुसार काम हुआ, तो अगले दो वर्षों में विंध्य क्षेत्र परिवहन और व्यापार के मामले में मध्य प्रदेश का प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा।