रीवा में मर्यादा शर्मसार: प्रदर्शनकारियों का ओछापन, महिला कलेक्टर के अपमान में कुत्ते के गले में बांधा ज्ञापन

 
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ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। विंध्य की ऐतिहासिक धरती रीवा के लिए सोमवार का दिन काले अक्षरों में दर्ज हो गया। यूजीसी के नए नियमों के समर्थन में ज्ञापन सौंपने आए कुछ संगठनों ने विरोध के नाम पर ऐसी नीचता प्रदर्शित की जिसकी कल्पना एक सभ्य समाज में नहीं की जा सकती। प्रदर्शनकारियों ने न केवल कानून-व्यवस्था को चुनौती दी, बल्कि जिले की सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी, एक महिला कलेक्टर के प्रति अत्यंत अपमानजनक और अमर्यादित व्यवहार किया।

प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठे हुए थे, इस वजह से आवागमन प्रभावित हुआ।

प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठे हुए थे, इस वजह से आवागमन प्रभावित हुआ।

अमानवीय कृत्य: बेजुबान जानवर का अपमानजनक इस्तेमाल 
जब कलेक्टर प्रदर्शनकारियों से सीधे मिलने मौके पर नहीं पहुंचीं, तो भीड़ का आक्रोश अराजकता में बदल गया। प्रदर्शनकारियों ने सारी हदें पार करते हुए एक आवारा कुत्ते को पकड़ा और उसके गले में ज्ञापन बांध दिया।

  • नारेबाजी: भीड़ ने "नया कलेक्टर जिंदाबाद" और प्रशासन को "कुत्ता" कहते हुए शर्मनाक नारे लगाए।
  • अमानवीयता: उस बेजुबान जानवर को कलेक्ट्रेट परिसर और सड़क पर दौड़ाया गया, जो सीधे तौर पर जिला प्रमुख की तुलना जानवर से करने का एक घृणित प्रयास था।
  • मर्यादा का हनन: सार्वजनिक रूप से एक महिला अधिकारी के लिए ऐसे प्रतीकों का उपयोग करना रीवा के लोकतांत्रिक इतिहास पर एक गहरा धब्बा है।

प्रशासनिक लाचारी: तमाशबीन बनी रही खाकी और खादी 
इस पूरे तमाशे के दौरान सबसे हैरान करने वाली बात पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की चुप्पी रही। घंटों तक कलेक्ट्रेट के सामने यह हुड़दंग चलता रहा, अमर्यादित भाषा का प्रयोग होता रहा, लेकिन मौके पर मौजूद भारी पुलिस बल और अधिकारी मूकदर्शक बने रहे। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन की गरिमा को धूल में मिला दिया, और तंत्र केवल अपनी बदनामी का तमाशा देखता रहा। शाम होने तक जब अधिकारियों की नींद टूटी, तब तक शहर की साख को भारी नुकसान पहुँच चुका था।

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शहर में यातायात का संकट और आम जनता की पीड़ा 
प्रदर्शनकारियों की इस हठधर्मिता ने पूरे रीवा शहर की रफ्तार रोक दी। कलेक्ट्रेट के सामने करीब 3 से 4 घंटे तक चक्काजाम रहा, जिसका असर शहर के कोने-कोने में दिखा।

  • डायवर्जन का दबाव: मुख्य मार्ग बंद होने से व्यंकट मार्ग, घोड़ा चौराहा, और प्रकाश चौराहा जैसे इलाकों में वाहनों का भारी दबाव बढ़ गया।
  • मासूमों की परेशानी: चिलचिलाती धूप में स्कूल से घर लौट रहे बच्चे बसों में फंसे रहे।
  • खदेड़ी गई जनता: जब कुछ स्थानीय नागरिकों ने जाम खोलने का अनुरोध किया, तो उग्र भीड़ ने उन्हें डरा-धमका कर खदेड़ दिया।

कानूनी कार्रवाई और सामाजिक प्रतिक्रिया 
इस घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बुद्धिजीवी वर्ग और आम जनता में भारी आक्रोश है। प्रशासन अब बैकफुट पर है और आरोपियों की पहचान कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की बात कह रहा है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, सरकारी कार्य में बाधा डालने, लोक सेवक का अपमान करने और पशु क्रूरता अधिनियम के तहत मामले दर्ज किए जा सकते हैं।

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लोकतंत्र में विरोध या अराजकता?
किसी भी मुद्दे पर समर्थन या विरोध जताना हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन रीवा में जो हुआ वह 'विरोध' नहीं बल्कि 'अराजकता' है। एक महिला अधिकारी और प्रशासनिक पद की गरिमा को सरेआम ठेस पहुँचाना यह दर्शाता है कि भीड़ का कोई चरित्र नहीं होता। अब यह देखना होगा कि प्रशासन इस अपमान का जवाब कानून के जरिए कितनी सख्ती से देता है।

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