खाकी का मजाक! रीवा में जिला बदर अपराधी ने हथकड़ी पहनकर बनाई रील, मुस्कुराते दिखे आरक्षक; पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

 
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ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। रीवा जिले के सेमरिया थाना क्षेत्र से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने कानून व्यवस्था और पुलिस के इकबाल पर बड़े सवालिया निशान लगा दिए हैं। आमतौर पर अपराधी पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद अपना चेहरा छुपाते हैं, लेकिन यहाँ एक जिला बदर (District Out) अपराधी ने अपनी गिरफ्तारी को सोशल मीडिया पर किसी बड़ी उपलब्धि की तरह पेश किया। हथकड़ी लगे हाथों के साथ आरोपी का 'स्वैग' अब पुलिस विभाग के लिए गले की हड्डी बन गया है।

जिला बदर के बावजूद बेखौफ था शिवम सिंह
मामला ग्राम बुसौल का है, जहाँ का निवासी शिवम सिंह एक आदतन अपराधी है। अपराधों की लंबी फेहरिस्त के कारण प्रशासन ने उस पर जिला बदर की कार्रवाई की थी, जिसका मतलब था कि उसे जिले की सीमा से बाहर रहना था। लेकिन नियमों को ठेंगे पर रखकर शिवम न केवल क्षेत्र में घूम रहा था, बल्कि गिरफ्तारी के बाद उसने जो किया वह हैरान करने वाला है।

रील में आरक्षक का साथ: कानून के डर पर भारी पड़ा सोशल मीडिया
वायरल हो रहे वीडियो में शिवम सिंह मुस्कुराते हुए कैमरे को पोज दे रहा है। हद तो तब हो गई जब सुरक्षा में तैनात आरक्षक जितेंद्र बागरी भी इस रील का हिस्सा बन गए। वीडियो में आरक्षक आरोपी के साथ खड़े होकर मुस्कुराते हुए नजर आ रहे हैं। अपराधियों के साथ पुलिस की यह 'दोस्ताना' तस्वीर सोशल मीडिया पर जमकर ट्रोल हो रही है। लोगों का कहना है कि जब रक्षक ही भक्षकों के साथ मुस्कुरायेंगे, तो जनता में सुरक्षा का भाव कैसे आएगा?

जनता में आक्रोश: 'अपराधियों के लिए डर नहीं, मनोरंजन है जेल'
वीडियो के वायरल होते ही स्थानीय लोगों और नेटिजन्स ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। लोगों का तर्क है कि इस तरह के कृत्य से समाज में गलत संदेश जाता है। अपराधी खुद को 'हीरो' की तरह पेश कर रहे हैं, जिससे युवाओं पर बुरा असर पड़ रहा है। कानून का जो खौफ एक अपराधी के चेहरे पर दिखना चाहिए, वह अब सोशल मीडिया लाइक्स की भूख में कहीं खो गया है।

एसपी ने लिया संज्ञान: आरक्षक की भूमिका की होगी जांच
जैसे ही यह मामला रीवा के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के संज्ञान में आया, महकमे में खलबली मच गई। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, आरक्षक जितेंद्र बागरी की अनुशासनहीनता की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। विभाग यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि क्या यह महज एक लापरवाही थी या फिर अपराधी और पुलिस के बीच कोई गहरी सांठगांठ है।

डिजिटल युग में पुलिसिंग के लिए बड़ी चुनौती
यह घटना साबित करती है कि सोशल मीडिया अब केवल संवाद का साधन नहीं रहा, बल्कि यह अपराधियों के लिए अपनी धाक जमाने का औजार बन गया है। रीवा पुलिस को अब न केवल शिवम सिंह जैसे अपराधियों पर शिकंजा कसना होगा, बल्कि अपने महकमे के भीतर मौजूद उन 'स्मार्टफोन प्रेमी' कर्मचारियों को भी कड़ा संदेश देना होगा जो वर्दी की मर्यादा भूल जाते हैं।

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