FIR के बाद फरार हुआ यूट्यूबर मनीष पटेल: समाज का फूटा गुस्सा, गिरफ्तारी की उठी मांग

 
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राहुल द्विवेदी,रीवा। रीवा जिले में पिछले 48 घंटों से तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। वजह है सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर मनीष पटेल द्वारा साझा की गई एक विवादित पोस्ट। इस पोस्ट को लेकर ब्राह्मण समाज ने कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे नारी शक्ति और समाज की अस्मिता का अपमान करार दिया है। भारी विरोध के बीच सिविल लाइन पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश तेज कर दी है।

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विवाद की जड़: एक पोस्ट और बढ़ता आक्रोश
मनीष पटेल ने अपने विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (यूट्यूब, फेसबुक और इंस्टाग्राम) पर कुछ ऐसी बातें साझा कीं, जिन्हें लेकर बवाल मच गया। समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि:

  • पोस्ट में इस्तेमाल की गई शब्दावली सीधे तौर पर ब्राह्मण समाज की बेटियों को निशाना बनाने वाली थी।
  • शिकायतकर्ताओं के अनुसार, यह कृत्य न केवल मानहानि है बल्कि सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की एक साजिश भी है।
  • विवाद बढ़ते देख आरोपी ने पोस्ट में कुछ शब्दों का फेरबदल तो किया, लेकिन बिना किसी सार्वजनिक माफी के यह कदम प्रदर्शनकारियों को शांत करने में नाकाम रहा।

कानूनी कार्रवाई और पुलिस का पक्ष
आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की निम्नलिखित धाराओं के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया है:

रीवा न्यूज़ मीडिया की सक्रियता से कानून के शिकंजे में आरोपी
इस पूरे विवाद को प्रमुखता से उजागर करने और न्याय की लड़ाई लड़ने में 'रीवा न्यूज़ मीडिया' की भूमिका सबसे अहम रही है। जब सोशल मीडिया पर अपमानजनक पोस्ट वायरल हुई, तब रीवा न्यूज़ मीडिया ने न केवल इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया, बल्कि इसे तार्किक अंजाम तक पहुँचाने की जिम्मेदारी भी ली।

वरिष्ठ अधिवक्ताओं की बड़ी जीत
खबर के प्रकाशन के बाद, रीवा न्यूज़ मीडिया के संपादक ऋतुराज द्विवेदी खुद इस मुहिम में शामिल हुए। उनके साथ वरिष्ठ अधिवक्ता और आरटीआई एक्टिविस्ट बी.के. माला ने कंधे से कंधा मिलाकर कानूनी पैरवी की। इन्ही के साझा प्रयासों और पुलिस प्रशासन के साथ निरंतर समन्वय का परिणाम है कि आज आरोपी मनीष पटेल के खिलाफ सिविल लाइन थाने में FIR दर्ज हो पाई है।

इस मुहिम में केवल पत्रकारिता ही नहीं, बल्कि कानूनी विशेषज्ञता का भी संगम देखने को मिला। शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया में निम्नलिखित विशेषज्ञों का विशेष सहयोग रहा:

  • ऋतुराज द्विवेदी (संपादक, रीवा न्यूज़ मीडिया)
  • बी.के. माला (वरिष्ठ अधिवक्ता एवं आरटीआई एक्टिविस्ट)
  • शिवेश गौतम (लॉ एजेंसी संचालक)
  • वरिष्ठ अधिवक्ता समूह: प्रदीप पांडेय, हरीश पांडेय, विवेक मिश्रा, तरुणेंद्र शेखर पांडेय, अमित सिंह और अन्य।

न्याय के लिए एकजुट हुआ 'फोर्थ पिलर' और 'बार'
यह मामला इस बात का मिसाल बना है कि जब मीडिया और कानून के जानकार (अधिवक्ता) एक साथ आते हैं, तो समाज में अराजकता फैलाने वालों को बच निकलना मुश्किल हो जाता है। वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक मिश्रा, ऋतुराज द्विवेदी और आरटीआई एक्टिविस्ट बी.के. माला, अधिवक्ता शिवेश गौतम के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई ने जिले में एक स्पष्ट संदेश दिया है कि बेटियों के सम्मान के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी।

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लगी हुई धाराएं और कानून का प्रावधान:

1. भारतीय न्याय संहिता की धारा 196(1)(A)

  • विवरण: यह धारा धर्म, जाति, जन्म स्थान या समुदाय के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता, नफरत और वैमनस्य फैलाने के आरोप में लगाई जाती है।
  • संभावित सजा: इसके तहत दोषी पाए जाने पर कारावास (जेल) और आर्थिक दंड (जुर्माना) दोनों का प्रावधान है।

2. भारतीय न्याय संहिता की धारा 353(2)

  • विवरण: यह धारा विशेष रूप से महिला की गरिमा और सम्मान को ठेस पहुँचाने या अपमानित करने के इरादे से किए गए कृत्यों पर लागू होती है।
  • संभावित सजा: इसमें दोष सिद्ध होने पर 1 वर्ष से लेकर 5 वर्ष तक की जेल और साथ ही भारी जुर्माने की सजा दी जा सकती है।
  • पुलिस का बयान: "मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। आरोपी फिलहाल फरार है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है।"

पुराना रहा है विवादों से नाता
यह पहली बार नहीं है जब मनीष पटेल सुर्खियों में आया है। इससे पहले भी वह अपने कंटेंट को लेकर कानूनी पचड़ों में फंस चुका है। विशेष रूप से भारतीय सेना के जवानों के खिलाफ की गई अभद्र टिप्पणियों के कारण भी उसे कड़े विरोध का सामना करना पड़ा था।

एकजुट हुआ समाज, आंदोलन की चेतावनी
इस मामले ने जिले के प्रबुद्ध वर्ग और विभिन्न संगठनों को एक मंच पर ला दिया है। आरटीआई कार्यकर्ता बी.के. माला, संपादक ऋतुराज द्विवेदी लॉ एजेंसी के संचालक शिवेश गौतम और अधिवक्ता विवेक मिश्रा,प्रदीप पांडेय सहित कई वरिष्ठ वकीलों ने पुलिस प्रशासन पर जल्द गिरफ्तारी का दबाव बनाया है। समाज के संगठनों का स्पष्ट कहना है कि यदि त्वरित कार्रवाई नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

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