BHOPAL : सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस, भाजपा ने 16 विधायक बनाए बंधक, कैसे कराएं फ्लोर टेस्ट


मध्य प्रदेश विधानसभा में फ्लोर टेस्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष और सीएम कमलनाथ को नोटिस जारी कर बुधवार सुबह 10:30 बजे सुनवाई का समय दिया है। शिवराज के वकील मुकुल रोहतगी ने कमलनाथ सरकार को अल्पमत में बताकर तुरंत सुनवाई का अनुरोध किया था। राज्य सरकार और कांग्रेस की ओर से इस दौरान कोई भी मौजूद नहीं था। सुप्रीम कोर्ट में राजभवन को भी अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया है। इसके पहले बेंगलुरु में मौजूद ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक विधायक सामने आए और कहा कि हम बंधक नहीं हैं। हमने इस्‍तीफा सौंपा था लेकिन 22 में से सिर्फ 6 का ही मंजूर किया गया। सीएम कमलनाथ का पूरा ध्यान सिर्फ छिंदवाड़ा में विकास करने पर ही था, हमारे क्षेत्र की समस्या सुनने के लिए उनके पास 15 मिनट का भी समय भी नहीं। कोरोना वायरस के चलते सोमवार को विधानसभा का बजट सत्र बिना फ्लोर टेस्ट कराए 26 मार्च तक स्थगित कर दिया गया था। मध्य प्रदेश के सियासी घटनाक्रम से जुड़ी हर जानकारी पढ़िए यहां...

भाजपा ने राज्यपाल से मुलाकात कर पिछले 2 दिनों से कमलनाथ सरकार द्वारा की गई राजनीतिक नियुक्तियों को रद्द करने की मांग की। भाजपा का कहना है कि यह सरकार अल्पमत में है, उसे अब कोई नियुक्ति करने का अधिकार नहीं है। राज्यपाल को ज्ञापन सौंपने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, नरोत्तम मिश्रा, भूपेंद्र सिंह, प्रदेश अध्यक्ष बीडी शर्मा राजभवन पहुंचे हैं।

मध्यप्रदेश कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करते हुए भाजपा पर 16 कांग्रेस विधायकों को बंधक बनाकर रखने का आरोप लगाया है। याचिका में यह भी कहा गया है कि विधायकों की अनुपस्थिति में फ्लोर टेस्ट संभव नहीं है।

पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा सहित पार्टी नेता दोपहर 3:45 बजे महामहिम राज्यपाल से मिलने राजभवन पहुंचे। 

मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि जो लोग आज बेंगलुरु में सरकार द्वारा काम नहीं किए जाने के आरोप लगा रहे हैं, वही मंत्री रहते हुए सरकार द्वारा किए जाने वाले कामों को गिनाते थे। पीसी शर्मा ने कहा कि तुलसी सिलावट, गोविंद सिंह राजपूत, इमरती देवी ने मंत्री रहते हुए कमलनाथ और कांग्रेस सरकार की कामों की तारीफ की थी और भाजपा सरकार और शिवराज सिंह चौहन की निंदा की थी।

एम गोपाल रेड्डी ने संभाला मुख्य सचिव का पद
सुधीरंजन मोहंती की जगह एम गोपाल रेड्डी ने मंगलवार को मुख्य सचिव का पद संभाल लिया है। इस बदलाव के बाद बुधवार 11 बजे कैबिनेट की बैठक बुलाई गई है।

विजयलक्ष्मी साधौ बोली, मेरे भी बहुत सारे काम नहीं हुए है, तो क्या पार्टी छोड़ दूं
मध्य प्रदेश की मंत्री विजयलक्ष्मी साधौ ने बेंगलुरु में बैठे विधायकों पर निशाना साधते हुए कहा कि मैं मंत्री हूं और मेरे भी बहुत सारे काम नहीं हुए, तो क्या पार्टी छोड़ दूं। कांग्रेस हमारी मां है, हम इसे नहीं छोड़ सकते। शोभा ओझा ने आज महिला राज्य आयोग की अध्यक्ष का पदभार ग्रहण कर लिया। सियासी उठापटक के बीच उच्च शिक्षा विभाग में तबादलों का दौर जारी है, विश्वविद्यालयों में कई रजिस्ट्रार और डिप्टी रजिस्ट्रार की नियुक्ति और तबादले किए गए।

बिसाहूलाल सिंह की ईओडब्ल्यू से शिकायत, परिवार गरीबी रेखा से नीचे
विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे चुके ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक कांग्रेस विधायक बिसाहू लाल सिंह की ईओडब्ल्यू में शिकायत की गई है। शिकायती पत्र में सिंह के 11 सदस्यीय परिवार का नाम गरीबी रेखा के नीचे आने वाले लोगों की सूची में होने की बात बताई गई है। यह भी जानकारी दी गई है कि हर महीने सिंह का परिवार ले रहा है सरकारी राशन दुकान से 55 किलोग्राम अनाज। ईओडब्ल्यू इस शिकायत को दर्ज कर जांच की कार्रवाई शुरू करने जा रहा है।

सीएम ने फिर राज्यपाल को लिखा पत्र, आपके पत्र से दुखी हूं
सीएम कमलनाथ ने राज्यपाल लालजी टंडन को पत्र लिखकर कहा कि, 40 वर्ष के राजनीतिक जीवन में कभी मुझ पर पहली बार संसदीय मर्यादाओं का पालन ने करने का आरोप लगा है। इसस मैं दुखी हूं। मेरी ऐसी कोई मंशा नहीं थी, यदि आपको ऐसा लगा तो मैं खेद व्यक्त करता हूं। पत्र में सीएम ने साफ किया कि कोरोना वायरस अलर्ट के चलते विधानसभा का सत्र तुरंत स्थगित करना पड़ा। 15 महीनों में कई बार मैं अपना बहुमत साबित कर चुका हूं। विपक्ष अगर चाहता है तो अविश्वास प्रस्ताव ला सकता है। कांग्रेस के 16 विधायकों को बेंगलुरु में बंधक बनाकर रखा गया है, उनके आए बिना बहुमत साबित कराना असंवैधानिक होगा।

फ्लोर टेस्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने दिया स्पीकर और सीएम को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को शिवराज सिंह चौहान द्वारा लगाई गई याचिका पर सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश विधानसभा के स्पीकर नर्मदा प्रसाद प्रजापति और सीएम कमलनाथ को नोटिस भेजकर जवाब मांगा। इसके साथ ही सुनवाई के लिए बुधवार सुबह 10:30 बजे का वक्त दिया गया है। आज सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में कोई भी मौजूद नहीं था। कांग्रेस के बागी 16 विधायकों ने भी इस याचिका का समर्थन किया। शिवराज की ओर से वकील मुकुल रोहतगी ने कोर्ट से अनुरोध किया कि मध्य प्रदेश में सरकार अल्पमत में है, वहां जल्द ही फ्लोर टेस्ट करवाना चाहिए। इस मामले में तुरंत ही पक्षकारों को बुलाकर सुनवाई की जाए। इस पर कोर्ट ने बुधवार का समय दिया। इस मामले में राजभवन को भी नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया है, क्योंकि राज्यपाल ने सीएम को पत्र लिखकर फ्लोर टेस्ट कराने का निर्देश दिया था।

इमतरी देवी ने कहा- ज्योतिरादित्य सिंधिया हमारे नेता, हमेशा उनके साथ रहूंगी
इमरती देवी ने कहा कि ज्योतिरादित्य सिंधिया हमारे नेता है, उन्होंने हमें राजनीति करना सिखाया है। मैं एक गरीब की बेटी हूं। मैं हमेशा उनके साथ ही रहूंगी अगर वे कुएं में कूदते हैं तो भी। गोविंद सिंह राजपूत का कहना था कि सीएम कमलनाथ के पास हमारी बात सुनने के लिए 15 मिनट का भी समय नहीं होता था। तो हम अपने क्षेत्र में विकास कराने के लिए किससे बात करते।

हरदीपसिंह डंग बोले, दलालों की सरकार है, हमारे आवेदन पर कार्रवाई नहीं होती
हरदीपसिंह डंग ने कहा कि मंदसौर क्षेत्र से मैं विधायक हूं, किसानों के गोलीकांड के दौरान मैं वहीं था, राहुल गांधी आए लेकिन मुझे मिलने नहीं दिया। सीएम के पास हमारे लिए दो मिनट का भी समय नहीं है। कांग्रेस कार्यकर्ता की कोई सुनवाई नहीं होती और सीएम भी हमारी नहीं सुनते। डंग ने कहा कि यह दलालों की सरकार है, हमारे आवेदन पर कोई कार्रवाई नहीं होती थी, लेकिन अगर दलाल वहीं बात लेकर जाते तो उस पर कार्रवाई होती। उन्होंने कहा कि हमें यहां बंधक नहीं बनाया गया है।

राजवर्धन सिंह दत्तीगांव बोले, मैं सीएम के लिए लड़ा, लेकिन धोखा मिला
राजवर्धन सिंह दत्तीगांव ने कहा कि मेरे साथ धोखा हुआ, सीएम कमलनाथ मेरे क्षेत्र में कहकर आए थे कि आप विधायक को नहीं मंत्री को वोट दे रहे हैं। मुझे कुछ नहीं बनाया गया। राहुल गांधी ने भी हमारी बात नहीं सुनी। मैं लगातार सीएम कमलनाथ के लिए लड़ता रहा, लेकिन उन्होंने मेरे क्षेत्र पर कोई ध्यान नहीं दिया, मेरे साथ धोखा हुआ। इस सरकार में सबसे सीनियर नेता बिसाहूलाल सिंह को छोड़रक सुभाष यादव के बेटे को मंत्री बनाया गया, जमुनादेवी के रिश्तेदार को मंत्री बनाया गया और भी नेताओं के रिश्तेदारों को मंत्री बनाया गया, यह सही नहीं था।

बिसाहूलाल सिंह बोले, मैं सबसे सीनियर विधायक, लेकिन मंत्री नहीं बनाया
बिसाहूलाल सिंह ने कहा कि मैं 1987 से कांग्रेस विधायक हूं, मुझसे सीनियर विधानसभा में कोई विधायक नहीं है। जब मैं सीएम से बात करने जाता हूं तो बोलते हैं, चलो-चलो कल बात करेंगे। कमलनाथ ने एक भी आदिवासी को पट्टा नहीं दिया गया, आदिवासी को शादी पर कोई पैसा नहीं मिला। यह सिर्फ बोलते हैं, मैंने भाजपा ज्वाइन कर ली है। बिसाहूलाल ने कहा कि कोरोना का इतना ही डर है तो वल्लभ भवन में भी छुट्टी करवा दीजिए। सबसे सीनियर नेता को मंत्री बनाया गया न ही विधानसभा अध्यक्ष।

राहुल गांधी ने हमारी बात नहीं सुनी, सभी उपचुनाव के लिए तैयार
गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि ज्योतिरादित्य सिंधिया पर अगर भोपाल में हमला हो सकता है तो हम पर भी हो सकता है। केंद्रीय सुरक्षा बल की उपस्थिति में हम शाम को ही भोपाल जा सकते हैं। 6 विधायकों के इस्तीफे मंजूर किए गए तो 16 के क्यों नहीं। हम सभी उपचुनाव के लिए तैयार हैं। विधायकों ने बताया कि विधानसभा चुनाव के बाद हम राहुल गांधी के पास गए थे, हमने कहा हमारे साथ अन्याय हुआ है, लेकिन उन्होंने हमारी कोई बात नहीं सुनी। दिग्जिवय‍ सिंह पर निशाना साधते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में सबसे बड़ा माफिया आज भी सरकार चला रहा है।

विधायक बोले, सीएम सारा पैसा छिंदवाड़ा में कामों पर लगाते रहे
बेंगलुरू में मौजूद विधायकों ने मीडिया के सामने आकर कहा कि हमें यह सूचना मिली कि हमें बंधक बनाया गया है, लेकिन आप लोग देख सकते हैं कि यह बात गलत है, हम स्वतंत्र है और अपनी मर्जी से यहां है। गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि जब चुनाव लड़ा गया तो दो चेहरे सामने लाए गए जिसमें कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया थे। इसके बाद सिंधिया जी की जगह कमलनाथ को सीएम बनाया गया। सीएम बनने के बाद उनका व्यवहार बदल गया, हमारे विधानसभा क्षेत्र के लिए उन्होंने कोई पैसा नहीं दिया। हर बार मंत्रियों की बैठक में छिंदवाड़ा में कामों के लिए पैसा लगाया जा रहा था। गोविंद सिंह ने कहा कि मैंने एक बार सीएम से कह दिया अब छिंदवाड़ा में काम करने के लिए कोई जगह नहीं बची होगी तो दूसरे क्षेत्रों में काम किया जाए। हम छिंवाड़ा के दम पर चुनाव नहीं जीते थे, बाकी क्षेत्रों में भी काम करके ही अगली बार सरकार बनाई जा सकती थी। उन्होंने कहा कि ज्योतिरादित्य सिंधिया की सरकार बनाने में बड़ी भूमिका थी। हमारे साथी विधायक जो जयपुर में थे उनसे पूछ लिजिए, वह भी इनसे प्रताड़ित हैं।

मध्य प्रदेश में सियासी संकट पर लगी एक और याचिका
मध्य प्रदेश के सामाजिक कार्यकर्ता चिन्मय मिश्र और सचिन जैन ने सुप्रीम कोर्ट में खुली याचिका पेश की है और कहा कि 2018 के विधानसभा चुनाव में हमने अपने मताधिकार का प्रयोग लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए किया था। लेकिन मध्य प्रदेश में छाए राजनीतिक संकट के कारण ना सिर्फ लोकतंत्र कमजोर हो रहा है, बल्कि संविधान की अपेक्षा की जा रही है, इसलिए मतदाता होने के आधार पर हमारी इस नागरिक याचिका को स्वीकार किया जाए।

पीसी शर्मा बोले- आज नहीं होगा फ्लोर टेस्ट, सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार
मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि आज विधानसभा में फ्लोर टेस्ट नहीं होगा, मामला सुप्रीम कोर्ट में हैं। ऐसे में फ्लोर टेस्ट करना सुप्रीम कोर्ट की अवमानना होगी। अदालत में मध्य प्रदेश सरकार अपना पक्ष रखेगी। इसके पहले कल राज्यपाल लालजी टंडन ने सीएम कमलनाथ को पत्र लिखकर 17 मार्च को फ्लोर टेस्ट कराने को कहा था, अगर ऐसा नहीं हुआ तो माना जाएगा कि सदन में आपको बहुमत नहीं है।

भाजपा विधायकों को रोका, सीहोर में ठहरे
मध्य प्रदेश के भाजपा विधायकों को देर शाम मानेसर (गुरुग्राम) जाने से रोक लिया गया। राजभवन में परेड कराने के बाद विधायकों का मानेसर जाने का कार्यक्रम था, लेकिन राज्यपाल की नाराजगी की भनक मिलते ही विधायकों को भोपाल में ही रोक लिया गया। उन्हें सीहोर के पास स्थित एक होटल में ठहराया गया है। विधानसभा की कार्यवाही स्थगित होने के तुरंत बाद ही भाजपा के 106 विधायक पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव के साथ बसों में बैठकर राजभवन पहुंचे। राजभवन पहुंचकर उन्होंने राज्यपाल के सामने भाजपा के अपने 106 विधायकों की परेड करवाकर शपथ-पत्र भी सौंपा।

मध्य प्रदेश में कर्नाटक जैसे हालात बनने लगे
कर्नाटक की तरह ही मध्य प्रदेश में भी फ्लोर टेस्ट का मामला लंबा खिंच रहा है। राज्यपाल के बार-बार निर्देशों के बाद भी सरकार फ्लोर टेस्ट के लिए तैयार नहीं है। कर्नाटक में फ्लोर टेस्ट से पहले चार दिन तक विधानसभा में चर्चा हुई थी। कर्नाटक में भी विधायकों के इस्तीफे का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और अदालत ने स्पीकर को फैसला लेने के निर्देश दिए थे।

सीएम कमलनाथ का बयान, जिन्हें शक है वे अविश्वास प्रस्ताव लाएं
राज्यपाल लालजी टंडन का नाराजगी भरा पत्र व अल्टीमेटम मिलने के बाद हड़बड़ाहट में मुख्यमंत्री कमलनाथ रात को राज्यपाल से रूबरू मिलने राजभवन जा पहुंचे। आधे घंटे की मुलाकात के बाद मीडिया के सामने मुख्यमंत्री ने दावा किया कि कोई कुछ भी कहे सच्चाई यही है कि आज उनकी सरकार के पास बहुमत है। बहुमत को लेकर जिन्हें संदेह है वे अविश्वास प्रस्ताव ले आएं और विधानसभा के फ्लोर पर साबित करें। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि, मुझे क्यों फ्लोर टेस्ट कराना? फ्लोर टेस्ट तो वह (भाजपा) करें, हम प्रस्ताव का सामना करने को तैयार हैं। उन्होंने सवाल किया कि इसमें क्या परेशानी है। कृपा कर अविश्वास प्रस्ताव ले लाएं और अपनी बात रखें। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा बेंगलुरु में बंधक हमारे 16 विधायकों को लेकर आए। इस पर पूर्व मंत्री एवं भाजपा नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने मुख्यमंत्री के दावे को असत्य बताया। उन्होंने कहा कि कमलनाथ सरकार अल्पमत में है। उसे बहुमत साबित करना चाहिए। साथ ही यह भी कहा कि हमने अविश्वास प्रस्ताव की सूचना नहीं दी है।

सीएम कमलनाथ को राज्यपाल का अल्टीमेटम, 17 मार्च को कराएं फ्लोर टेस्ट
अभिभाषण के तुरंत बाद फ्लोर टेस्ट कराने के निर्देशों की सरकार द्वारा अवहेलना से नाराज राज्यपाल लालजी टंडन ने मुख्यमंत्री के सभी तर्कों को खारिज कर तीसरा पत्र लिखा। उन्होंने अल्टीमेटम देते हुए पत्र में कहा कि 17 मार्च, मंगलवार तक फ्लोर टेस्ट कराकर अपना बहुमत सिद्ध करें, अन्यथा यह माना जाएगा कि वास्तव में आपको विधानसभा में बहुमत प्राप्त नहीं है। राज्यपाल ने फ्लोर टेस्ट कराने के लिए मुख्यमंत्री को पहला पत्र शनिवार देर रात लिखा था। उसके बाद दूसरा पत्र रविवार देर रात लिखा और अब तीसरा पत्र सोमवार शाम को लिखा। इसके पूर्व सोमवार सुबह मुख्यमंत्री ने फ्लोर टेस्ट नहीं कराने की जानकारी देते हुए राज्यपाल को लंबी चिट्ठी लिखी थी। इससे टंडन काफी नाराज थे।

शिवराज सिंह चौहान ने कहा, यह फ्लोर टेस्ट से बचने की आड़
कोरोना वायरस की वजह से सदन की कार्यवाही स्थगित करने की घोषणा के बाद पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव और डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने आरोप लगाया कि सरकार फ्लोर टेस्ट से बचना चाहती है, इसलिए कोरोना की आड़ ली जा रही है। वित्तमंत्री तरुण भनोत ने कहा कि कोरोना वायरस फैल रहा है। इसके बावजूद विपक्ष को राजनीति याद आ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक इसको लेकर चिंतित हैं।

स्पीकर बोले, कोरोना की वजह से कई राज्यों के सत्र स्थगित
स्पीकर नर्मदा प्रसाद प्रजापति ने व्यवस्था देते हुए सदन से कहा कि कोरोना वायरस की महामारी से हम सभी परिचित हैं। इस महामारी के फैलाव को दृष्ट्रिगत रखकर राजस्थान, केरल, ओडिशा, छत्तीसगढ़ एवं महाराष्ट्र की विधानसभाओं के चालू सत्र स्थगित कर दिए गए हैं। सदस्यों के स्वास्थ्य, अन्य विधानसभाओं द्वारा उठाए गए एहतियाती कदम, भारत सरकार की जारी एडवायजरी एवं व्यापक जनहित को देखते हुए विधानसभा की कार्यवाही 26 मार्च 2020 तक के लिए स्थगित की जाती है।

सदन स्थगित होते ही दायर की याचिका
कमलनाथ सरकार के अल्पमत में होने पर विश्वास मत हासिल न करने के कारण संवैधानिक संकट के मद्देनजर पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। सदन स्थगित होते ही दायर की इस याचिका में सरकार को निर्देशित करने की अपील की गई है। याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई होगी।

राज्यपाल के निर्देश के बाद भी सोमवार को नहीं हुआ फ्लोर टेस्ट
मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के पहले दिन आखिरकार सरकार ने राज्यपाल लालजी टंडन के निर्देश के बावजूद फ्लोर टेस्ट नहीं कराया। राज्यपाल का अभिभाषण खत्म होने के बाद उम्मीद के मुताबिक कोरोना वायरस के मद्देनजर सदन की कार्यवाही विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति ने 26 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी। इस दौरान सदन में कांग्रेस आक्रामक और भाजपा शांत मुद्रा में रही। राज्यपाल ने अभिभाषण की शुरुआती लाइन और अंतिम पैराग्राफ ही पढ़ा। अभिभाषण की शुरुआत में भाजपा की ओर से कमलनाथ सरकार के अल्पमत में होने की बात डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने राज्यपाल लालजी टंडन के सामने उठाई। उन्होंने कहा कि आपने ही सरकार के अल्पमत में होने का पत्र मुख्यमंत्री को लिखा है। क्या उसी सरकार के कसीदे पढ़ने का काम करेंगे। राज्यपाल ने इसकी अनदेखी करते हुए अभिभाषण पढ़ना शुरू किया और साथ-साथ सदस्यों को सलाह भी दे डाली। उनकी सलाह थी कि प्रदेश की जो स्थिति है, उसमें सब अपने- अपने दायित्व का निर्वहन शांतिपूर्ण तरीके से करें।
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