CORONA LOCKDOWN : भारतीय मस्जिदों में छिपे मिल रहे हैं विदेशी मौलाना


पटना से लेकर तमिलनाडु तक मस्जिदों के अंदर से विदेशी मुस्लिम नागरिक निकल रहे हैं. ये सभी टूरिस्ट वीजा पर भारत आए थे और बिना स्थानीय पुलिस की जानकारी, मस्जिदों में पहुंच गए. क्यों. मस्जिदों में इनके ठहरने का क्या सबब है. कैसे देश के विभिन्न हिस्सों की मस्जिदों में देश के अलग-अलग कोनों से मुसलमान कट्टरपंथी आकर क्यों जम गए हैं.

मस्जिदें इस देश में चिंता का सबब बनती जा रही हैं. पहले नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ इन मस्जिदों से जिहादी निकल रहे थे. फिलहाल कोरोना के आतंक में मस्जिदें विदेशी नागरिक उगल रही हैं. चीन, किर्गिस्तान, कजाकिस्तान जैसे देशों से टूरिस्ट वीजा की आड़ में वहाबी ट्रेनिंग, मायने जमात, के लिए भारतीय मस्जिदों में जमा हैं. आखिर मस्जिदों में कौन सी ट्रेनिंग चल रही है, जिसके लिए ये विदेशी मुसलमान पहुंच रहे हैं. क्या ऐसा है कि मौलाना कोरोना के लॉक डाउन में भी मस्जिदें खोलने पर उतारू हैं. इन विदेशियों में से कई कोरोना वायरस लिए हुए हो सकते हैं. तो क्या ये कोरोना जिहाद है. क्या ये आत्मघाती ढंग से भारत को बीमार करने की साजिश तो नहीं.


कोरोना वायरस के आतंक, लॉक डाउन के बीच कुछ बहुत सनसनीखेज जानकारियां दबी रह गई हैं. पटना से लेकर तमिलनाडु तक मस्जिदों के अंदर से विदेशी मुस्लिम नागरिक निकल रहे हैं. ये सभी टूरिस्ट वीजा पर भारत आए थे और बिना स्थानीय पुलिस की जानकारी, मस्जिदों में पहुंच गए. क्यों. मस्जिदों में इनके ठहरने का क्या सबब है. कैसे देश के विभिन्न हिस्सों की मस्जिदों में देश के अलग-अलग कोनों से मुसलमान कट्टरपंथी आकर क्यों जम गए हैं. ज्यादा चौंकाने वाली बात ये है कि इन मस्जिदों में मिले इन विदेशियों में अधिकतर न तो हिंदी जानते हैं, न ही अंग्रेजी. हां, एक बात कॉमन है. ये अपने देश की भाषा के अलावा अरबी बोलते हैं. यानी अरबी को मुसलमान कट्टरपंथी अपनी ग्लोबल भाषा बनाने की तैयारी कर रहे हैं.

झारखंड की राजधानी रांची का नक्सल प्रभावित इलाका है तमाड़. मंगलवार को रारगांव की मस्जिद से 11 विदेशी मौलवियों को दबोचा गया. इनमें तीन मौलवी चीन से, तीन कजाकिस्तान से और चार किर्गिस्तान से थे. पुलिस को इस मस्जिद में विदेशियों के छिपे होने की खुफिया सूचना मिली थी. इनकी शिनाख्त मा मनि, येह देहाई, मा माइरेली (तीनों चीनी), किर्गिस्तान व कजाकिस्तान के के नूरकरीम ओलो, जुरबेक, नुरगेयेव इस्लानबेक, अबदुल्लेव गुलोमुद्दीन, इस्माइल मिशालो, शाकिर शाह अखुनोव, इलियास मायानोव के तौर पर की गई है. फिलहाल झारखंड पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि किस वीजा पर किस देश से होते हुए ये लोग भारत पहुंचे हैं. साथ ही ये झारखंड के तमाड़ की मस्जिद तक कैसे पहुंचे और यहां क्यों छिपे हुए थे. बहरहाल इनकी डाक्टरी जांच कराई गई है, तो राहत की बात ये नजर आई कि इनमें से कोई भी कोरोना का मरीज नहीं था. 

तमिलनाडु की एक मस्जिद से मिले मौलनाओं की जांच करते स्वास्थकर्मी।

ये इकलौता मामला नहीं है. चंद दिन पहले ही पटना के कुर्सी इलाके की मस्जिद से 12 विदेशी मौलवी मिले थे. ये सभी स्थानीय मौलाना की मदद से मस्जिद में छिपे थे. ये सभी जनवरी में पटना पहुंचे थे. तब से ये लोग पटना में ही थे. स्थानीय मौलाना लगातार इनकी मदद कर रहे थे. करीमनगर के इज्तेमा में भाग लेने के लिए भी इंडोनेशिया के सात मौलवी पहुंचे थे. इज्तेमा के आयोजकों ने इन्हें स्थानीय मदरसा में ठहराया था. जब इनकी कोरोना जांच की कोशिश की गई, तो इन्होंने फरार होने की कोशिश की. ये सभी इंडोनेशिया दिल्ली पहुंचे. इनका मकसद इज्तेमा में जाना था. यहां से तीन भारतीय मौलाना इन्हें लेकर करीमनगर पहुंचे थे.
ताजा मामला तमिलनाडु का है. थाईलैंड के सात मौलवी 12 मार्च को इरोड पहुंचे. यहां 15 मार्च तक ये पेरुनदुरई की तीन अलग-अलग मस्जिदों में ठहरे. हालांकि इनमें से एक की कोयमबटूर के अस्पताल में कोरोना के उपचार के दौरान मौत हो गई. दो मौलवी और कोरोना से संक्रमित थे. इनकी वजह से 136 लोगों को स्थानीय प्रशासन ने क्वारंटाइन में रखा हुआ है. नौ गलियां पूरी तरह सील कर दी गई हैं. पड़ोस के ही सेलम जिले में 11 इंडोनेशियाई मौलवियों को क्वारंटाइन किया गया है. ये 11 इंडोनेशियाई नागरिक कथित तौर पर जमात में यहां आए थे. पूरे सेलम में घूमे और अलग-अलग मस्जिदों में धार्मिक कार्यक्रमों में शिरकत की. वेल्लूर जिले के अंबूर में स्थानीय प्रशासन ने 20 विदेशी मौलवियों को हिरासत में लिया है. इनमें से 12 इंडोनेशिया और 8 म्यांमार के रोहिंग्या मुसलमान हैं.

इरोड के शहरकाजी के मुताबिक इन मौलवियों का आना उनकी जानकारी मे नहीं है. हालांकि शहर काजी ने इनके दौरे को जायज ठहराते हुए कहा कि दूसरे देशों के मौलवियों का आना सामान्य बात है. इनके आने की भनक न तो स्थानीय पुलिस को मिली, न ही खुफिया एजेंसियों को. इनमें से एक ग्रुप तो 11 मार्च से मस्जिद में रह रहा था. कोरोना वायरस के पहले देश में सीएए को लेकर तनाव माहौल था. ऐसे में बड़ी तादाद में विदेशी मौलवियों के भारत पहुंचने और मस्जिदों में छिपे होने की बात काफी रहस्यमयी लगती है. साथ ही ये सवाल उठता है कि जिस तरीके से देशभर में सुनियोजित तरीके से सीएए के खिलाफ हिंसा हुई, उसमें क्या विदेशी हाथ है. क्या मामला सिर्फ इज्तेमा और जमात का है. यदि जमात का भी है, तो विदेशी जमाती कैसे टूरिस्ट वीजा पर भारत की मस्जिदों में छिपे हुए हैं. इसी के साथ एक दूसरी आशंका और है. अभी तक जितने विदेशी मौलाना मस्जिदों में मिले हैं, चाहे वह चीन से हों या इंडोनेशिया से, सभी कोरोना वायरस से प्रभावित देशों से आए हैं. तो क्या यह देश में कोरोना के प्रसार की कोई साजिश तो नहीं. दोनों में से चाहे जो भी बात हो, नतीजा यही है कि देश की मस्जिदों में बहुत कुछ ऐसा हो रहा है, जो सामान्य नहीं है. मस्जिदों से हिंसा फैल रही है, मस्जिदों से देश विरोधी तकरीरें हो रही हैं, कोरोना के लॉक डाउन के बावजूद कितनी ही जगहों पर मस्जिदों में सामूहिक नमाज की खबरें आ रही हैं, मस्जिदें विदेशी मौलवियों के अड्डे बन गई हैं. क्या मस्जिदों पर पैनी नजर रखने का समय आ गया है.
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