CORONAVIRUS के डर से मलेरिया व एचआईवी की दवा न लें, अपनाये ये उपाय


कोरोना वायरस (कोविड-19) को लेकर लोगों में जितना डर है, उतनी ही भ्रांतियां भी हैं। लोग बचने के लिए तरह-तरह के तरीके अपना रहे हैं। अभी तक आयुर्वेदिक व कुछ होम्योपैथी दवाओं के नाम इसमें आ रहे थे। अब मलेरिया व एचआईवी मरीजों के इलाज में उपयोग होने वाली दवाओं से यह बीमारी ठीक होने की बात सोशल मीडिया पर चल रही है। इससे इन दवाओं की अचानक से मांग बढ़ गई है। शहर के जाने-माने डॉक्टरों की सलाह है कि खुद डॉक्टर न बनें। अपनी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएं, जिससे बीमारी से लड़ सके...

खुद बाजार से दवा लेकर न खाएं

इस बीमारी में किस दवा से क्या फायदा होगा। इलाज के लिए क्या दवा देनी चाहिए यह डॉक्टर के ऊपर छोड़ दें। खुद बाजार से दवा लेकर न खाएं। इससे नुकसान हो सकता है। सुनने में आ रहा है कुछ लोग मलेरिया की दवा खाकर बेफिक्र होकर घूम रहे हैं। यह सोच ठीक नहीं है। अखबार, कागज, पैसे देने वाला संक्रमित हुआ तो उससे भी यह बीमारी हो सकती है। -डॉ. लोकेन्द्र दवे, एचओडी, छाती व श्वास रोग विभाग हमीदिया

बच्चों को ज्यादा खतरा, फल-सब्जी खिलाएं

बच्चे जितने छोटे होते हैं, उन्हें संक्रमण का खतरा उतना ही ज्यादा रहता है। संक्रमण होने पर उन्हें ठीक होने में भी ज्यादा समय लगता है। जिन बच्चों में खून व विटामिन्स की कमी होती है, उन्हें बीमारियां ज्यादा घेरती हैं। इसके अलावा जिन्हें पहले से कोई पुरानी बीमारी है वह हाई रिस्क में रहते हैं। इन दिनों बच्चों को बाहर न निकलने दें। प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए उन्हें फल, सब्जी व प्रोटीन वाली चीजें दें। - डॉ. राकेश भार्गव, शिशु रोग, विशेषज्ञ्

सोंठ, काली मिर्ची का काढ़ा बनाकर पीएं

आयुर्वेद में हर बीमारी का इलाज त्रिदोष के अनुसार होता है। आयुर्वेद का मूल काम प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना है। इसके लिए रसायन ट्रीटमेंट किया जाता है। घर में सोंठ,काली मिर्ची व पीपल का काढ़ा बनाकर पी सकते हैं। आंवला और तुलसी भी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं। गिलोय का काढ़ा पी सकते हैं। अपनी दिनचर्या सही रखें। डायबिटीज के मरीज विशेष सावधानी रखें। -डॉ. उमेश शुक्ला, प्राचार्य, खुशीलाल शर्मा आयुर्वेद कॉलेज

डॉक्टर व स्वास्थ्य विभाग के निर्देश ही मानें सोशल मीडिया में चल रही अफवाहों से लोग डर रहे हैं। इस कारण कोरोना वायरस को लेकर पूछताछ बढ़ गई है। लोग इस बीमारी को लेकर जो भी सूचना लें वह तथ्यात्मक हो। डॉक्टर व स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों को ही मानें। शक हो तो डॉक्टर से मिलें। जिन्हें चिंता या घबराहट की बीमारी है वह सोशल मीडिया पर ऐसी बाते न देखें और पढ़ें। सबसे बड़ी सलाह है कि जिन्हें यह बीमारी हो चुकी है उनके व उस परिवार के प्रति उपेक्षा का भाव न रखें। -डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी, मनोचिकित्सक, बंसल अस्पताल



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