INDORE में 24 घंटे में 10 नए केस सामने आए; उज्जैन की जिस पॉजिटिव महिला की मौत हुई, उसके परिवार के 5 लोग भी संक्रमित पाए गए



इंदौर.जिस इंदौर में मंगलवार रात कोरोनावायरस का एक भी पॉजिटिव मरीज नहीं था, वहां सिर्फ 24 घंटे के भीतर बुधवार को 10 मरीज सामने आने से हड़कंप मच गया। इनमें से उज्जैन निवासी एक महिला की उपचार के दौरान एमवाय अस्पताल में मौत हो गई। ये न सिर्फ इंदौर, बल्कि मप्र में भी कोरोना से पहली मौत है। दिन में महिला समेत 5 मरीज उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती हुए थे, जो देर रात बढ़कर 10 हो गए। चौंकाने वाली बात ये है कि नए 5 नए मरीज उसी महिला के परिवार के हैं और रिश्तेदार हैं, जिनकी मौत हो गई है। बुधवार शाम को ही कोरोना संदिग्ध 47 वर्षीय एक शख्स ने भी दम तोड़ दिया। उन्हें शाम को ही इलाज के लिए उज्जैन से इंदौर लाया गया था। हालांकि अब तक उनका सैंपल जांच के लिए नहीं भेजा गया था।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रवीण जड़िया ने बताया कि कोरोनावायरस संक्रमण की चपेट में आए मरीजों में शामिल 65 वर्षीय महिला उज्जैन की निवासी थी। दोपहर करीब 3 बजे उन्हाेंने दम तोड़ा। कोरोनावायरस पॉजिटिव पाए गए 4 अन्य मरीज इंदौर के ही अलग-अलग इलाकों में रहते हैं। इनमें 50 वर्षीय महिला, 48 वर्षीय पुरुष, 68 वर्षीय पुरुष और 65 वर्षीय पुरुष शामिल हैं। ये मरीज शहर के 2 निजी अस्पतालों में भर्ती हैं। खास बात यह है कि इन पांचों मरीजों में से किसी की भी विदेश यात्रा की हिस्ट्री नहीं है। यहां तक कि 2 मरीज ऐसे थे ज्यादा बाहर निकलते भी नहीं थे और ना ही बीते 14 दिनों में किसी आयोजन में शामिल हुए। मरीजों में 2 पुरुष मित्र हैं। वे वैष्णोदेवी की तीर्थ यात्रा पर गए थे। हाल ही में लौटे हैं। उधर, उज्जैन की मृत महिला के बारे में पता चला है कि वे कुछ दिनों पहले बेगमबाग में सीएए के विरोध में चल रहे धरने में शामिल हुईं थीं। उनके बेटे ने इस बात की पुष्टि की है।

उज्जैन की महिला के जनाजे में शामिल होने वाले रिश्तेदारों की तबीयत बिगड़ी
उज्जैन की जिस महिला की मौत इस बीमारी से हुई थी, उसके जनाजे में दो सगे भाई भी शरीक हुए थे। बुधवार सुबह इन दोनों की हालत खराब हुई तो कोई इन्हें मल्हारगंज स्थित लाल अस्पताल छोड़ गया। यहां से इन्हें गोकुलदास अस्पताल के सामने बने आईसोलेशन सेंटर एमआरटीबी भेजा तो दोनों वहां से भाग निकले और फिर लाल अस्पताल पहुंच गए। यहां बहुत देर तक कोने में बैठे रहे। 

हेल्पलाइन पर फोन लगाते रहे, नहीं उठाया, रात तक अस्पताल में ही बैठे रहे 
अस्पताल प्रबंधन ने दोनों को फिर से एमआरटीबी भेजने के लिए स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की हेल्पलाइन पर फोन लगाए, लेकिन किसी ने कॉल रिसीव नहीं किया। 108 के कॉल  सेंटर पर फोन लगाया तो उन्होंने इन्हें ले जाने से यह कहकर इनकार कर दिया कि एम्बुलेंस में कोरोना से बचाव के साधन नहीं हैं। अस्पताल के प्रभारी डॉ. इलियास के मुताबिक, दोनों संदिग्ध की हालत गंभीर है। उज्जैन की जिस महिला की मौत हुई, ये उनके रिश्तेदार हैं। एक की उम्र 45 तो दूसरा 40 के लगभग है। दोनों ज्यादा जानकारी भी नहीं दे पा रहे। हालांकि अभी जांच नहीं हुई है, इसलिए कहना मुश्किल है कि ये कोरोना से ग्रसित हैं या नहीं।

कोरोना... इंदौर में स्थिति

अब तक कुल सैंपल 99
अब तक निगेटिव मिले 60
बुधवार को नए मामले 29
कितने पॉजिटिव मिले 10
कितने मरीजों की मौत 01
रिपोर्ट आना बाकी 29

एमवायएच में 35-35 साल के 2 युवकों का भी चल रहा है इलाज
अरिहंत हास्पिटल में 50 वर्षीय महिला।
बाम्बे हास्पिटल में 49, 66 और 68 साल के 3 व्यक्ति।
सुयश अस्पताल में खजराना की महिला।
शेल्बी अस्पताल में निपानिया निवासी पुरुष।
गोकुलदास में खातीवाला टैंक निवासी महिला
एमवायएच में रानीपुरा के रहने वाले दो युवक। दोनों की उम्र 35-35 साल। 
पहला मरीज, 49 साल : पूरे समय साथ रहा दोस्त अब हैरान-परेशान
इस मरीज का स्टील व फर्नीचर का काम है। इसकी तबीयत पांच दिन पहले खराब हुई थी। तब एक दाेस्त यूरेका हॉस्पिटल ले गया था। तीन दिन पहले उसे बॉम्बे हॉस्पिटल में भर्ती किया था। यह मरीज न दूसरे राज्य में गया न विदेश। काेराेना का पता चलते ही स्वास्थ्य विभाग की टीम ने इसकी मां और तीनों बच्चों को घर में ही क्वारेंटाइन कर दिया। वहीं, स्वास्थ्य विभाग ऐसे लोगों की तलाश कर रहा है जो इसके संपर्क में आए थे। दोस्त भी पूरे समय इसके साथ रहा। काेराेना का पता चलने पर वह भी हैरान-परेशान है।

66 व 68 साल के दो मरीज : होली के कार्यक्रम में शामिल हुए
ये दो मरीज भी बॉम्बे हॉस्पिटल में भर्ती हैं। दोनों दोस्त 8 मार्च को वैष्णो देवी की यात्रा पर गए थे। वहां से 14 मार्च को लौटे। इस बीच ये किस विदेशी यात्री के संपर्क में आए, इस बात की किसी काे जानकारी नहीं है। बताया जा रहा है कि दोनों होलिकोत्सव के एक कार्यक्रम में भी शामिल हुए थे। दो-तीन दिन पहले ही दोनों की तबीयत बिगड़ी। सांस लेने में परेशानी हुई तो अस्पताल में भर्ती करवाया गया। जैसे ही बीमारी का पता चला, परिवार के सभी सदस्यों की जांच करवाई।

चौथी मरीज, 65 साल:  बेटा बोला- मां कभी बाहर नहीं गई, फिर कैसे
एमवाय अस्पताल में भर्ती उज्जैन निवासी इस महिला की मौत हो चुकी है। सर्दी-जुकाम, खांसी और तेज बुखार के बाद सांस लेने में परेशानी हुई तो बेटे ने 22 मार्च को उज्जैन के चैरिटेबल हॉस्पिटल में भर्ती करवाया था। वहां से माधव नगर अस्पताल शिफ्ट किया। हालत नहीं सुधरी ताो एमवाय में भर्ती किया। उनका बेटा फल विक्रेता है। उसने कहा कि मां चल-फिर नहीं सकती थी। इसलिए बाहर ज्यादा आवाजाही नहीं रही। फिर भी कैसे बीमार हो गई? परिवार में पत्नी और दो बच्चे भी हैं। इनमें से किसी में भी कोरोना के लक्षण नहीं हैं।

पांचवीं मरीज, 50 साल:  शुगर पीड़ित, पांच दिन पहले बिगड़ी थी तबीयत 
यह महिला अरिहंत हॉस्पिटल में भर्ती है। बेटे ने बताया कि परिवार में छह लोग हैं। मां कहीं नहीं आती-जाती हैं। उन्हें मधुमेह है। कुछ दिन पहले एक शादी में गए थे। 20 मार्च को उन्हें बुखार और सर्दी-जुकाम हुआ। पास वाले क्लिनिक से दवा लेकर आए। फिर तबीयत बिगड़ी तो 22 मार्च को सेवालय अस्पताल ले गए। सांस तेज चल रही थी। वहां से एमवाय ले जाकर एक्स-रे करवाया। डॉक्टर ने कहा कि घबराने की बात नहीं है। बीपी लो है, शुगर बढ़ गई है। आप भर्ती कर सकते हैं। हम अरिहंत हॉस्पिटल पहुंचे। यहां कोरोना का पता चला।
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