मीनाक्षी लेखी ने दिल्ली दंगो का असल सच बताकर लिबरलों और कांग्रेसियों का मुंह बंद करा दिया | LokSabha DelhiRiots2020


पूरे देश में कल जब मध्यप्रदेश का सियासी घमासान चल रहा था तब लोकसभा में अलग ही माहौल था। दिल्ली से भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी ने अपने भाषण से विपक्ष को ऐसा धोया कि वे वर्षों तक याद रखेंगे। लेखी ने अपने भाषण में दिल्ली में हुए दंगों को लेकर विपक्ष के प्रोपोगेंडे को पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया। कपिल मिश्रा से लेकर गृहमंत्री की बैठकों का ब्योरा देते हुए उन्होंने बताया कि कैसे विपक्षी कांग्रेस पार्टी रामलीला मैदान में एक रैली आयोजित कर आर पार की लड़ाई का ऐलान करती हैं और फिर दंगे शुरू हो जाते हैं।
मीनाक्षी लेखी ने शुरुआत में ही कहा कि मुझे दुख है कि मरने वाले किसी भी धर्म के हों लेकिन थे तो भारतीय ही न, ऐसा मैं मानती हूं लेकिन अगर वे बांग्लादेश से आए हुए घुपैठिए थे तो उसकी जानकारी मुझे नहीं है।
उन्होंने आगे कहा कि जैसे ही इन्वेस्टिगेशन सामने आता है वैसे ही यह पता चलता है कि अंकित शर्मा नाम के IB अफसर पर 400 बार चाकू से हमला किया गया है और उसकी इंटेस्टाइन को बाहर निकाला गया है।
आप ही बताइये कि आखिर किस तरह के दंगों में इस तरह की हरकत की जाती है? इस तरह कि घृणा और नफरत सिर्फ एक कट्टरपंथी ही कर सकता है। इस कट्टरवाद को बढ़ाने वाले कौन है, सदन को इस पर भी चर्चा करनी चाहिए।“ उन्होंने आगे कहा कि अगर दंगों की डिटेल में जाया जाए तो यह बात सामने आती है कि सीलमपुर वह इलाका है जहां 2018 में ISIS का एक Module पकड़ा गया था।
मीनाक्षी लेखी ने अधीर रंजन चौधरी द्वारा हेडगेवार की तुलना मुसोलिनी से किए जाने पर जवाब देते हुए कहा कि, ‘मैं मुसोलिनी का एक कांड और सुना देती हूं। आपके पीछे जो व्यक्ति बैठे हैं उनके नाना मुसोलिनी की आर्मी में काम करते थे।’ दरअसल, लेखी राहुल की तरफ इशारा कर रही थीं, जो अधीर के पीछे बैठे थे।
लेखी ने साथ ही दावा किया कि दिल्ली में दंगा नहीं, बल्कि सोची-समझी साजिश हुई थी। उन्होंने विपक्षी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि वे वोट बैंक की राजनीति के लिए ऐसा कर रहे हैं। मीनाक्षी लेखी ने दावा किया कि जिस हिंसा के लिए महीनों से तैयारियां चल रही थी, उसे गृह मंत्री अमित शाह की निगरानी में 36 घंटे के अंदर कैसे काबू में कर लिया गया। उन्होंने दावा किया, ‘दिल्ली में जो कुछ हुआ, वह दंगा नहीं बल्कि सोची-समझी साजिश का हिस्सा था।
नई दिल्ली से सांसद लेखी ने कहा कि कांग्रेस ने इतने सालों तक पाकिस्तान में बसे अल्पसंख्यकों को यहां शरण देने के लिए कोई काम नहीं किया लेकिन नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध के नाम पर लोगों को भड़काया। लेखी ने कहा कि सीएए के विरोध से ही पूरा घटनाक्रम शुरू हुआ। उन्होंने कहा, ‘सारे नेता सीएए कानून को अच्छी तरह से समझते हैं। लेकिन वोट बैंक की राजनीति के लिए जनता को भड़का रहे हैं।’
लेखी ने कहा कि दिसंबर में दिल्ली में कांग्रेस की रैली में पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने ‘आरपार की लड़ाई’ वाला बयान दिया जिसके बाद शाहीनबाग में लोग धरने पर बैठने लगे। बीजेपी सांसद ने आरोप लगाया कि उनके बाद कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी और राहुल गांधी ने भी उत्तेजना वाले बयान दिए। लेखी ने आगे कहा कि आम आदमी पार्टी के पार्षद ताहिर हुसैन, MLA अमानुतुल्ला खान ने जो किया उसे कोई नहीं देख रहा, AIMIM के एक नेता ने भड़काऊ बयान दिया, और जेएनयू के कथित छात्र नेताओं ने भड़काऊ बयान दिए लेकिन उनकी विपक्ष बात नहीं कर रहा।
उन्होंने कहा कि सभी ने कपिल मिश्रा की बात कि लेकिन कांग्रेस के नेताओं की बात कोई नहीं कर रहा। कांग्रेस के नेताओं ने भी अपने बयानों से लोगों को उकसाया है। मीनाक्षी लेखी ने कहा कि सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी भड़काऊ बयान दिए हैं। मीनाक्षी लेखी आगे कहती हैं- ‘कपिल मिश्रा पर आरोप लगाने वाले अमानतुल्ला और शरजिल को न भूले। सिर्फ कपिल मिश्रा पर ही आरोप क्यों लगा रहे हैं। सोनिया गांधी ने नागरिकता कानून को लेकर दिए अपने बयान में आर-पार की बात कही थी। वारिस पठान और उमर खालिद ने भी भड़काऊ बयान दिए थे। अमानतुल्ला के बयानों पर सवाल क्यों नहीं होते?
मीनाक्षी लेखी ने एक शेर पढ़ते हुए कहा, लोग टूट जाते हैं घर बनाने को और तुम तरस नहीं खाते बस्तियां जलाने को।”  कुछ लोगों के पास चीजों को स्थापित करने का इतिहास है। मेरे पास डेटा है जो दिखाता है कि देश में जब भी हिंसा की घटनाएं हुईं, उसका कौन जिम्मेदार था?
विपक्ष की बखिया उधेड़ते हुए उन्होंने सभी राज खोल कर रख दिया। मीनाक्षी लेखी ने अपनी बातों को समाप्त करते हुए कहा कि जब हमारे विचार ही सेक्युलर हैं तो किसी के कहने से या उसे जबरदस्ती संविधान में डालने की कोई जरूरत नहीं है।
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