MP LIVE : हाई वोल्टेज ड्रामा ,भाजपा से टूट कर चार कांग्रेस विधायक भोपाल पहुंचे : बवाल जारी


नई दिल्ली. मध्यप्रदेश में कमलनाथ सरकार को लेकर कश्मकश की हालत खत्म नहीं हो रही है। जिस तरह से सरकार समर्थक विधायक दिल्ली गए थे, उसी ड्रामे के साथ कुछ विधायकों की भोपाल वापसी हुई है। सपा बसपा और दो कांग्रेस के विधायकों को मंत्री जयवर्धन सिंह, तरुण भनोत और जीतू पटवारी वापस भोपाल ले आए हैं। हालांकि अब भी चार विधायकों के बारे में स्थिति स्पष्ट नहीं है। वहीं, बागी विधायकों को साथ दे रहे पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि वह सरकार गिराने का कोई प्रयास नहीं कर रहे हैं। यह इनका अंदरुनी विवाद है और मेरे संपर्क में कांग्रेस के दस से 15 विधायक हैं।

दरअसल, सोमवार सुबह से मध्यप्रदेश में शुरू हुआ सियासी ड्रामा थमने का नाम नहीं ले रहा है। दिग्विजय सिंह के आरोप के बाद शुरू खेल देर शाम अचानक से सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी करता हुआ नजर आया। भाजपा नेताओं ने 17 विधायकों का समर्थन होने का दावा किया और उनमें से कई विधायकों को दिल्ली बुला लिया। इससे पहले तक कांग्रेस के पास 11 कांग्रेस विधायक साथ थे। सपा के राजेश शुक्ला, बसपा के संजू कुशवाह, रामबाई के अलावा कांग्रेस के कई विधायक भी मनेसर के होटल में भाजपा नेताओं के साथ थे। आज सुबह कांग्रेस ने दावा किया है कि उसने चार विधायकों को भाजपा नेताओं से मुक्त करा लिया है। इनमें सपा के राजेश शुक्ला, बसपा के संजू कुशवाह, रामबाई शामिल हैं। जबकि कांग्रेस के एंदल सिंह कंसाना और रणवीर जाटव शामिल हैं। इन्हें लेकर तीनों मंत्री भोपाल पहुंच गए हैं, जहां सीधे मुख्यमंत्री से मुलाकात कराई गई है।

इससे पहले कांग्रेस सरकार के मंत्री प्रदीप जायसवाल ने भाजपा को समर्थन देने के बारे में विकल्प खुला रखने की बात कही है। उन्होंने कहा कि वह कमलनाथ के साथ हैं। लेकिन अगर सरकार गिरती है तो वह नई सरकार में शामिल होने का विकल्प खुला रखेंगे। यह बयान उस मौके पर आया है, जब कांग्रेस अपनी सरकार को बचाने के लिए मशक्कत कर रही है। अपने बागी विधायकों से संपर्क नहीं होने के बाद सरकार ने इंटेलीजेंस का सहारा लिया। फिलहाल कांग्रेस अपने नंबरगेम को पूरा करने की कोशिश में जुटी हुई है, वहीं भाजपा लगातार विधायकों की संख्या बढ़ाने को लेकर काम कर रही है। कांग्रेस के तराना से विधायक महेश परमार का आरोप है कि उन्हें खुद पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 35 करोड़ रुपए और मंत्री बनाने का प्रस्ताव दिया था। फोन पर दो बार संपर्क किया गया था।

दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आगे की रणनीति के लिए सुबह केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाकात की और उसके बाद वह पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात करने वाले हैं। उसके बाद आगे की रणनीति तय होगी। इस बीच में नरोत्तम मिश्रा भी भोपाल के लिए रवाना हो गए हैं। आगे की रणनीति पर अब भोपाल में ही काम होगा।

दिग्विजय सिंह का आरोप है कि कांग्रेस के चार विधायक इस समय भाजपा के कब्जे में हैं, बाकी विधायकों का समर्थन सरकार को है। सरकार को कोई खतरा नहीं है। वहीं, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय समेत कई नेताओं ने इसे कांग्रेस का अंदरुनी मसला बताया है।

सिंधिया की शांति
सबसे बड़ा सवाल ज्योतिरादित्य सिंधिया की शांति पर उठ रहे हैं। सरकार के संकट में होने के बाद भी अभी तक उन्होंने सामने आकर कोई सक्रियता दिखाने की कोशिश नहीं की है। उनके खेमे के तीन मंत्री भी पूरे घटनाक्रम से दूरी बनाए हुए हैं। हालांकि तीन मंत्रियों ने आपस में मुलाकात जरूर की है। लेकिन इसमें क्या बात हुई है इसको लेकर कुछ भी स्पष्ट नहीं हुआ है।

मध्यप्रदेश में भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी घमासान बढ़ गया है। भाजपा ने सरकार के भीतर सेंधमारी कर दी है। भाजपा नेताओं का दावा है कि उनके पास कांग्रेस के 11 विधायक मौजूद हैं। जबकि सपा बसपा और निर्दलीय विधायकों का भी समर्थन हासिल हो गया है। देर रात शुरू हुए ड्रामे में भाजपा और कांग्रेस आमनेसामने आ गई हैं। भाजपा ने देर रात विधायकों को मनेसर के आईटीसी भारत होटल में शिफ्ट किया था। जैसे ही कांग्रेस के नेताओं को इसकी जानकारी मिली तो मध्यप्रदेश से कांग्रेस के मंत्री जयवर्धन सिंह, जीतू पटवारी और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह दिल्ली पहुंच गए और सीधे होटल गए। जहां पर उनका विवाद भाजपा नेताओं से हुआ। उसके बाद वह बसपा विधायक रामबाई को अपने साथ लेकर रवाना हो गए। बाकी के विधायकों से वह मिलने में सफल नहीं हो सके।


इन पर है विधायकों का जिम्मा
कांग्रेस के भीतर तोड़फोड़ का जिम्मा पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा, विश्वास सारंग और विधायक अरविंद भदौरिया पर है। यही कांग्रेस के भीतर से विधायकों को तोड़कर दिल्ली लाए हैं। जबकि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान दिल्ली में आगे की रणनीति पर काम कर रहे हैं। इसी क्रम में सुबह बंद कमरे में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के साथ उनकी डेढ़ घंटे की मुलाकात हुई। उसके बाद वह भाजपा कार्यालय रवाना हो गए, जहां पर जेपी नड्डा से मुलाकात होगी। उसके बाद ही आगे की रणनीति पर काम होगा। कुल मिलाकर आज का दिन मध्यप्रदेश की सरकार के लिए महत्वपूर्ण होगा।

कांग्रेस के दावा, विधायक हमारे साथ
भाजपा जहां पूरी तरह से सरकार गिराने को लेकर आश्वस्त नजर आ रही है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस नेताओं ने दावा किया है कि उनके विधायक सरकार के साथ हैं। मुख्यमंत्री कमलनाथ से लेकर मंत्री जयवर्धन सिंह ने भी बयान दिया है कि भाजपा सरकार गिराने की साजिश रच रही है लेकिन कांग्रेस के विधायक बिकने वाले नहीं हैं और सरकार पांच साल का अपना कार्यकाल पूरा करेगी।

क्या आज हो जाएगा सरकार का फैसला
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आज सरकार के भाग्य का फैसला हो जाएगा। हालांकि अभी तक भाजपा के दो विधायक भी गायब बताए जा रहे थे, लेकिन उनमें से नारायण त्रिपाठी दिल्ली पहुंच गए हैं। जबकि शरद कौल अब भी गायब हैं। यह दोनों विधायक पिछले सत्र में कांग्रेस के पाले में चले गए थे, लेकिन बाद में भाजपा में लौट आए थे। ऐसे में भाजपा के अंदर इन विधायकों को लेकर कोई आश्वस्त नहीं है। हालांकि निर्दलीय विधायकों को लेकर भाजपा नेता आश्वस्त हैं।
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