REWA : मीजल्स डे : बच्चों को 11 जानलेवा बीमारियों से बचाने लगवाएं यह टीका


रीवा. बच्चों को जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए मीजल्स का टीका जरुर लगावाएं। चिकित्सकों का दावा है कि बचपन की एक अति संक्रामक बीमारी है जो एक विशेष वायरस से होता है। विभिन्न स्थानों में मीजल्स को अलग-अलग नामों से जाना जाता है जैसे खसरा, रूबेला, छोटी माता या को दवा माता आदि। इस बीमारी का मुख्य लक्षण हैं विशेष दानों चकत्तों के साथ बुखार, सर्दी, जुकाम व खांसी जो बाद में विभिन्न जटिलताओं जैसे उल्टी, दस्त, निमोनिया, वजन कम होना, भूख न लगना, कुपोषण, मस्तिष्क ज्वर व टीबी जैसे जानलेवा समस्याओं से ग्रसित हो जाता है।

मीजल्स की चपेट में आए गए थे 500 बच्चे
जिला क्षय अधिकारी ने डॉ बीएल मिश्रा ने बताया कि वर्ष 1980 में जब मीजल्स का टीका टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल नहीं था, तब विश्व में कुल 26 लाख बच्चों की मीजल्स से मौत हुयी थी। उन्होंने बताया कि रीवा जैसे छोटे शहर में वर्ष फरवरी 1999 में रानी तालाब व नयातालाब मोहल्ले में अनुमानित 500 से अधिक बच्चों की मीजल्स हुआ जिसमें जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त प्रयासों से कुछ ही बच्चों की मौत हुयी थी।
मिजल्स के कारण दो फीसदी बच्चों की हो रही मौत 

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत में 5 वर्ष से कम आयु के लगभग 2 प्रतिशत बच्चों में मौत का कारण मीजल्स हैं, निष्कर्ष यह है कि खसरे का उन्मूलन मात्र टीकाकरण से ही संभव है। मीजल्स के उन्मूलन में प्रमुख चुनौती है कम टीकाकरण, बीमारी की उच्च संक्रामक प्रकृति, समाज के कुछ वर्ग में टीकाकरण न स्वीकारना, सीमित संसाधन व विशेष अभियान के तहत 13 करोड़ बच्चों में पुन:टीकाकरण करना। 


बच्चों मे लक्षण मिले तो तत्काल दे सूचना

मीजल्स टीकाकरण 9 माह से 12 माह की उम्र तक कराया जाता है। बूस्टर डोज 18 से 24 माह में लगाया जाता है। इस टीका में दो बीमारियों मीजल्स व रूबेला से बचाव के लिए दवा मिली होती है। यदि किसी मोहल्ले में मीजल्स का रोगी मिलता है तो वहां के निवासी चिकित्सक, स्वास्थ्य कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता को शीघ्र सूचना दें ताकि सघन टीकाकरण के माध्यम से बीमारी के फैलनें व मृत्यु को बचाया जा सके। 


11 जानलेवा बीमारियों से मिलेगी निजात

विगत वर्ष 2019 में रीवा जिले में मीजल्स रूबेला के उन्मूलन के लिए बच्चों को टीका लगाया गया। प्रमुख रूप से बच्चों में 11 जानलेवा बीमारियां होती हैं जिन्हें टीका लगाकर बचाया जा सकता है। जैसे टीबी, पोलियों, डिफथीरिया, गलघोंटू, दस्त, कालीखासी, हिपेटाइटिस बी, एनफल्नजा, निमोनियॉ, खसरा, रूबेलाए विटामिन ए की कमी।



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