REWA : अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की संख्या घटी ,15 मार्च के बाद बढऩे लगती है भीड़


रीवा. विंध्य के सबसे बड़े हॉस्पिटल संजय गांधी अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की भीड़ हेल्दी सीजन में कम हो गई है। इस सीजन के दौरान एसजीएमएच में ज्यादातर विभागों की ओपीडी में सीनियर चिकित्सक नदारद रहते हैं। विशेष परिस्थितियों में काल पर ही ओपीडी में पहुंच रहे हैं।

15 मार्च बाद बढ़ जाएंगी मरीजों की संख्या
संजय गांधी अस्पताल के रेकार्ड बताते हैं कि 15 मार्च यानी चैत के बाद ओपीडी में भीड़ बढ़ जाएगी। पिछले कई साल के रेकॉर्ड में दर्ज आंकड़े बताते हैं कि अस्पताल की ओपीडी में मार्च से अप्रैल तक मरीजों का पंजीयन अधिक होता है। इसी तरह जुलाई, अगस्त और सितंबर तक डिलेवरी, वायरल फीवर सहित अन्य गंभीर बीमारियों से पीडि़त मरीजों की भीड़ अस्पताल में पहुंचती है। चिकित्सक बताते हैं कि जनवरी में हेल्दी सीजन चालू होता है कि फरवरी यानी होली के बाद तक ओपीडी में भीड़ कम रहती है। जुलाई की अपेक्षा फरवरी में डेढ़ हजार मरीजों का अंतर है। बीते जुलाई में ओपीडी में तीन हजार से ज्यादा मरीज पहुंचे। लेकिन, 29 फवरी की स्थित में 1900 मरीजों ने पंजीयन कराया है।

बारिश व गर्मियों के सीजन की अपेक्षा ठंडियों में कम हो जाते हैं मरीज
बारिश व गर्मियों के सीजन के औसत से ठंडियों में मरीजों की औसत डेढ़ से दो हजार संख्या कम हो जाती है। शनिवार को ओपीडी में भीड़ कम नहीं थी। बावजूद इसके ज्यादातर ओपीडी में सीनयिर चिकित्सक नदारद रहे। जूनियर डॉक्टरों के भरोसे ही मरीज रहे। अस्पताल के बाहर चिकित्सकों को दिखाकर वापस लौट रहे त्रिभुवन ने बताया कि मऊगंज से बेटे को दिखाने के लिए आए थे। सीनियर डॉक्टर नहीं मिले। इसी तरह सेमरिया से सुमन अपने मां को दिखाने के लिए ओपीडी में पहुंची थी। दो घंटे इंतजार के बाद डॉक्टर मिले। ये कहानी एक दिन की नहीं बल्कि आए दिन बनी रहती है। कई बार शिकायत के बाद भी अस्पताल प्रबंधन के सेहत पर फर्क नहीं पड़ता है। कई चिकित्सकों ने बताया कि मेडिकल कालेज के सहायक प्राध्यापकों सहित अन्य सीनियर चिकित्सकों को शैक्षणिक कार्य से लेकर इलाज की जिम्मेदारी रहती है। इसके कारण कई बार वार्ड में राउंड नहीं ले पाते हैं। 


पर्ची काउंटर से दवा काउंटर तक अव्यवस्था

विंध्य के सबसे बड़े हॉस्पिटल में पर्ची काउंटर से लेकर दवा काउंटर पर अव्यवस्था के चलते मरीज व तीमारदारों को दिक्कत होती है। यह व्यवस्था नहीं सुधर रही है। काउंटर पर बैठे कर्मचारियों की शिथिलता के चलते कतार में मरीज व तीमारदार परेशाान रहते हैं। शनिवार को दवा काउंटर पर भीड़ कम होने के बावजूद महिला काउंटर पर बैठे कर्मचारी आपस में गपशप में व्यस्त रहे। जबकि कतार में महिलाएं दवा के लिए खड़ी रहीं। इसी तरह पर्ची काउंटर पर महिला व पुरूषों के कतार में साइड से जबरिया घुसकर पर्ची कटवा रहे थे। गार्डों की अनदेखी के चलते मरीजों को परेशान होना पड़ता है।
Powered by Blogger.