LOCKDOWN : CORONAVIRUS से रीवा में दहशत: SGMH में गायनी-शिशुरोग को छोड़ अन्य विभागों में 80 फीसदी वार्ड खाली


रीवा. कोरोना के दहशत से संजय गांधी अस्पताल में 80 फीसदी वार्ड खाली हो गए हैं। ओपीडी में भी मरीजों की संख्या पंद्रह फीसदी से भी कम हो गई है। जीएमएच में ऑपरेशन की संख्या भी घट गई है। दस दिन के भीतर हड्डी रोग, सर्जरी वार्ड से लेकर अन्य विभागों को मिलाकर महज आधा दर्जन ही ऑपरेशन हुए। जबकि सामान्य दिनों में हर माह सैकड़ों की संख्या में ऑपरेशन होते थे।

सामान्य मरीजों पर रोक
विंध्य के सबसे बड़े हॉस्पिटल संजय गांधी अस्पताल परिसर में जीएमएच के गायनी वार्ड में हर रोज डिलेवरी हो रही है। ओपीडी में बुधवार की अपेक्षा बीते दिन अधिक भीड़ रही। सामान्य दिनों में दो हजार के पार ओपीडी हो गई थी। लेकिन, लॉक डाउन होने के बाद ओपीडी 300 से भी कम हो गई है। पीड्रियाटिक में 21 जबकि अर्थोपेडिक 12 व मेडिसिन में 101 मरीज आए। हालंाकि चिकित्सकों ने इमर्जेंसी और गंभीर मरीजों को भी देख रहे हैं। सामान्य सर्दी, खांसी के मरीजों को सीएचसी, पीएएचसी और मोहल्ले के डॉक्टरों को दिखाने की सलाह दे रहे हैं।

दस दिन के भीतरी हड्डी रोग
एसजीएमएच के अधीक्षक डॉ. पीके लखटकिया ने मरीजों से आग्रह किया है कि वे सामान्य बीमारी के लिए न आएं। बल्कि मोहल्ले में ही इलाज कराएं। अधीक्षक ने बताया कि गायनी और बच्चा वार्ड को छोड़ शेष सभी विभागों के 80 फीसदी वार्ड खाली हो गए हैं। पखवारेभर पहले 1200 बेड के विस्तर फुल थे। वर्तमान समय में 200 से 250 ही मरीज भर्ती हैं। मेडिसिन, हड्डी रोग विभाग के मरीज ठीक होकर चले गए। बच्चा वार्ड, गंभीर रोगी वार्ड को छोड़ दें तो ज्यादातर वार्ड में मरीजों को दवाएं देकर घर भेज दिया गया है। अधिकांश मरीज ठीक होकर चले गए। नए एडीमीशन में गंभीर व इमर्जेंसी को छोड़ शेष सभी पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

आकस्कमिक केन्द्र पर आ रहे गंभीर मरीज
संजय गांधी अस्पताल परिसर में आकस्मिक चिकित्सा केन्द्र, शिशु रोग एवं बाल्य विभाग व मेडिसिन में ही गंभीर व इमर्जेंसी केस आ रहे हैं। शेष को वापस कर दिया जा रहा है। दुर्घटना, घटनात्मक सहित जेल में बीमार होने वाले कैदियों को लाया जा रहा है। सामान्य मरीजों को आने से रोक दिया गया है।
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