REWA : पांच साल बाद भी बस्तियों में रहने वाले गरीबों के मकान का आवंटन नहीं, पूर्व मंत्री सहित कई अफसर फंसे


रीवा। शहर की मलिन बस्तियों में रहने वाले गरीब परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराने की योजना के तहत बनाए गए मकानों का अब तक आवंटन नहीं हो सका है। करीब पांच वर्ष से अधिक समय से मकान बनकर तैयार हैं, हितग्राहियों से अंशदान लेकर मकानों का आवंटन किया जाना था। शुरुआती दौर में प्रक्रिया तो अपनाई गई लेकिन मकानों का आवंटन नहीं किया जा सका। धीरे-धीरे कर मकानों में लोग रहने भी लगे हैं, आवंटन अब तक नहीं हो सका है। मकान अब जर्जर भी होने लगे हैं।

बीते कुछ समय से इन मकानों को लेकर एक बार फिर से नगर निगम ने फाइलें खंगालना शुरू कर दिया है। जिसमें यह बात सामने आई है कि पूर्व में पदस्थ रहे अधिकारियों ने मकानों का आवंटन करने में लापरवाही बरती जिसकी वजह से अब तक इन मकानों का आवंटन नहीं हो सका है।

केन्द्र सरकार के सहयोग से शुरू की गई इंटेग्रेटेड हाउसिंग एण्ड स्लम डेवलपमेंट प्रोग्राम(आइएचएसडीपी) योजना के तहत रीवा शहर के रतहरा में कालोनी विकसित की गई है। इसके तहत रतहरा में 156 और अकोला बस्ती में 92 मकान बनाए गए थे। योजना के तहत कुल 248 मकान बनाए गए हैं।

रानीतालाब सौंदर्यीकरण के चलते वहां से लोगों को विस्थापित किया गया था
इसी तरह चूनाभट्टा परिसर में न्यू बसस्टैंड का निर्माण कराया गया है। इन दोनों जगह के लोगों को नए सिरे से विस्थापित करने के लिए आइएचएसडीपी योजना के तहत बनाए गए मकानों को आंवटित करने की योजना बनाई गई थी। उस दौरान मलिन बस्ती के लोगों को आश्वासन दिया गया था कि नि:शुल्क मकान दिए जाएंगे लेकिन जब मकानों के आवंटन की बारी आई तो उनसे 1.50 लाख रुपए की राशि जमा करने की शर्त रख दी गई।

अब लगातार बस्तियों के लोगों द्वारा शिकायतें की जा रही हैं कि उन्हें नि:शुल्क आवंटन का आश्वासन मिला था। तत्कालीन मंत्री राजेन्द्र शुक्ला एवं नगर निगम के अधिकारियों द्वारा नि:शुल्क आवंटन किए जाने का हवाला देते हुए लोगों ने कहा है कि सभी को नि:शुल्क रूप से ही मकानों का आवंटन किया जाए।

आश्वासन मिला है इसलिए रहने लगे हैं लोग
रतहरा एवं अकोला बस्ती में बने 248 मकानों के आवंटन में आइएचएसडीपी योजना के तहत हितग्राही से भी राशि जमा कराए जाने का प्रावधान बताया गया तो लोगों ने राशि देने से इंकार कर दिया था। साथ ही विरोध प्रदर्शन भी शुरू कर दिया था। बढ़ते विरोध के चलते निगम के अधिकारियों ने पांच साल पहले ही अधिकांश हितग्राहियों को चाबियां सौंप दी, जिसके चलते वह मकानों में रहने लगे हैं लेकिन अब तक उन्हें इन मकानों का मालिकाना हक नहीं मिला है। मकान में रह रहे रूपचंद बंसल, गुडिय़ा, सुनीता आदि ने कहा है कि उनके पास रुपए जमा करने के लिए नहीं है, आश्वासन के मुताबिक मकानों का आवंटन किया जाए।

8.75 करोड़ रुपए की लागत से बनाए गए हैं मकान
आइएचएसडीपी योजना के तहत बनाए गए मकानों की लागत 8.75 करोड़ रुपए है। 248 मकानों के निर्माण के लिए केन्द्र और राज्य सरकार ने भी नगर निगम को आर्थिक रूप से मदद की थी। साथ ही हितग्राही का भी अंशदान निर्धारित किया गया था। बताया गया है कि केन्द्रांश और राज्यांश हुडको ऋण के साथ 6.53 करोड़ रुपए और नगर निगम की ओर से 1.78 करोड़ रुपए इन मकानों के निर्माण में खर्च की गई थी। इसमें 3.72 करोड़ रुपए उन हितग्राहियों से लेना था जिन्हें मकान दिया जाना है। वर्ष 2015 में जिला प्रशासन ने 1.642 हेक्टेयर रकबा नगर निगम को बिना प्राब्याजी के एक रुपए के वार्षिक भू-भाटक पर हस्तांतरित किया था।

विधायक के नि:शुल्क मकान देने का किया था आश्वासन वसूली नोटिस  से सुर्खियों में आई योजना


करीब दस वर्ष पहले से आइएचएसडीपी योजना पर काम हो रहा था लेकिन इसके बारे में नगर निगम एवं शहर के कुछ ही लोगों को जानकारी थी। बीते साल इन मकानों के हितग्राहियों ने नगर निगम कार्यालय का घेराव कर विरोध प्रदर्शन किया और ज्ञापन में उल्लेख किया कि तत्कालीन मंत्री एवं वर्तमान रीवा के विधायक राजेन्द्र शुक्ला ने नि:शुल्क मकान देने का आश्वासन दिया था। ज्ञापन के साथ कुछ पंपलेट भी सौंपे गए थे। साथ ही तत्कालीन निगम के अधिकारियों का भी हवाला दिया गया और कहा गया कि उनकी ओर से भी राशि नहीं लेने की बात कही गई थी। इस मामले का अध्ययन करने के बाद नगर निगम के आयुक्त सभाजीत यादव ने विधायक शुक्ला को ४.९४ करोड़ रुपए के वसूली का नोटिस जारी करते हुए राशि जमा करने के लिए कहा। इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक सरगर्मी तेज हुई, निगम आयुक्त पर भी कई आरोप भाजपा नेताओं की ओर से लगाए गए।

विधानसभा को भेजी जानकारी में भी किया उल्लेख
विधानसभा की ओर नगर निगम आयुक्त सभाजीत यादव को नोटिस जारी कर विशेषाधिकार हनन का आरोप लगाते हुए जवाब मांगा गया था। इस पर निगम आयुक्त ने विधानसभा को भेजे गए जवाब में आइएचएसडीपी योजना का भी उल्लेख किया है। जिसमें उन्होंने कहा कि हितग्राहियों से जो राशि निगम को मिलनी थी, वह विधायक राजेन्द्र शुक्ला द्वारा मकान में प्रवेश कराने के चलते नहीं मिल पाई है। 4.94 करोड़ रुपए की राशि में 3.41 करोड़ हितग्राहियों से मिलने वाली राशि है और वर्ष 2015 से लेकर 2019 तक नौ प्रतिशत की दर से ब्याज 1.53 करोड़ रुपए जोड़ी गई है। 

आइएचएसडीपी योजना के तहत बनाए गए मकानों में हितग्राहियों से भी राशि ली जानी है। उनकी ओर से राशि नहीं दिए जाने के चलते आवंटन अब तक नहीं हुआ है। पूर्व में नि:शुल्क मकान देने का आश्वासन देकर मकानों में प्रवेश भी करा दिया गया है। पूरे मामले से शासन को अवगत कराया गया है। निर्देश आने के बाद ही कोई कार्रवाई की जा सकती है।

सभाजीत यादव, आयुक्त नगर निगम रीवा
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