REWA : निगम के एक और बड़े अफसर पर कार्रवाई, कमिश्नर ने ज्वाइन करने से पहले निलंबन का आदेश कराया था टाइप, बदले के भाव से कार्रवाई का लगा आरोप


रीवा। प्रदेश में सरकार बदलने का असर सबसे अधिक नगर निगम रीवा में दिखने लगा है। सीएम के शपथ ग्रहण के 24 घंटे के भीतर आयुक्त सभाजीत यादव को रीवा से हटाकर अपर सचिव के रूप में मंत्रालय में अटैच किया गया है। जिला पंचायत के सीइओ अर्पित वर्मा को निगम आयुक्त का प्रभार दिया गया है। उन्होंने निगम कार्यालय पहुंचकर ज्वाइनिंग भी कर ली। उन्होंने ज्वाइन करने के साथ ही पहला आदेश संपत्ति अधिकारी अरुण मिश्रा के निलंबन का जारी किया। इस कार्रवाई की जल्दबाजी ऐसी थी कि अर्पित वर्मा नगर निगम आदेश टाइप करवाकर पहुंचे थेए निगम में कम्प्यूटर आपरेटर नहीं थे। मिश्रा के पास मौजूद सभी प्रभार उपायुक्त एसके पाण्डेय को दिए गए हैं।

इसके बाद आयुक्त वर्मा ने अधिकारियों से परिचय लेकर कोरोना संक्रमण के बचाव की तैयारियों की जानकारी ली। इस तरह की कार्रवाई की संभावना पहले ही जाहिर की जा रही थी। भाजपा के नेताओं ने पहले ही चेतावनी दी थी कि सरकार बनते ही नगर निगम के अधिकारियों पर कार्रवाई होगी। निलंबन आदेश में कार्रवाई की वजह सुधार न्यास द्वारा अधिग्रहित भूमि में अनियमिता को बताया गया है।

इसमें यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि किस तरह की अनियमितता की गई है और इसकी जांच पहले हुई थी अथवा नहीं। माना जा रहा है कि भाजपा नेताओं के निशाने पर रहे अभी कुछ और कर्मचारियों पर कार्रवाई हो सकती है। इसके साथ ही वे अधिकारी भी सक्रिय हो गए हैं जो कांग्रेस की सरकार आते ही हटाए गए थे। 

लॉकडाउन की स्थिति में कार्रवाई पर उठे सवाल
इनदिनों कोरोना संक्रमण के कारण शहर में लॉकडाउन घोषित किया गया है। निगम को आवश्यक सेवाएं प्रदान करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। संपत्ति अधिकारी अरुण मिश्रा को इस व्यवस्था के लिए नोडल अधिकारी बनाया गया था। बिना किसी ठोस वजह से निलंबन किए जाने को लेकर कांग्रेस ने आपत्ति उठाई है। कहा है कि भाजपा द्वेषपूर्ण कार्रवाई के लिए कोरोना जैसी महामारी को नजरंदाज कर रही है। शहर के स्कीम नंबर छह के मुख्य दोषी अधिकारियों को बचाने के लिए यह प्रयास किया जा रहा है। लॉकडाउन समाप्त होने के बाद इस मामले को लेकर कांग्रेस ने आंदोलन करने की बात कही है।
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