REWA : शिवराज की अमानवीय कार्यवाही रीवा में कई ग़रीबों के घर उजड़े ,मकान आवंटन नहीं : अधिकारियों ने जिम्मेदारी से झाडा पल्ला


रीवा। लॉकडाउन के बीच रतहरा तालाब की मेढ़ पर बसे लोगों के मकान तोड़कर प्रशासन ने उन्हें बेघर कर दिया है। अब इनके विस्थापन की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की जा रही है। नगर निगम के अधिकारियों ने जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है, इस कारण विरोध धीरे-धीरे तेज होता जा रहा है। कांग्रेस के पूर्व सीएम कमलनाथ, दिग्विजय सिंह सहित अन्य कई बड़े नेताओं ने इस कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए नए सिरे से पुनर्वास की मांग उठाई है।

नगर निगम के अधिकारियों ने तो शुरू यह कह दिया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के मकानों को आवंटन किया जाएगा। इस योजना के मकानों के लिए हितग्राही को भी अंशदान जमा करना होगा। जिसके लिए विस्थापित तैयार नहीं हैं और नेताओं ने भी पंाच-पांच हजार रुपए कुछ लोगों को देकर पल्ला झाड़ लिया है। प्रशासन ने दावा किया था कि 68 लोगों के मकान गिराए गए थे लेकिन संख्या की गिनती की गई तो पता चला है कि 163 लोगों के मकान और झोपड़ी को तोड़ा गया है। वहीं कांग्रेस के जिला प्रवक्ता अशफाक अहमद ने आदिवासी नेता हीरा अलावा को पत्र भेजकर आवाज उठाने की मांग की है।



मकान आवंटन की प्रक्रिया में कई पेंच
नेताओं और नगर निगम के अधिकारियों की ओर से दावा किया जाता रहा है कि मकान आवंटन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जल्द ही नए मकान में शिफ्ट कर दिए जाएंगे। अब कहा जा रहा है कि स्लम बस्ती की श्रेणी में करीब दो दर्जन लोग ही आते हैं। इसलिए इन्हें दो लाख में मकान दिए जाएंगे, जिसके लिए 20 हजार रुपए लोन के लिए जमा करना होगा। वहीं अधिकांश ऐसे हैं जो नान स्लम एरिया से आते हैं, उन्हें 4.75 लाख रुपए का मकान मिलेगा। मौखिक आश्वासन चाहे भले ही दिए गए हैं लेकिन जब तक उक्त राशि नहीं मिलेगा तो बैंक फाइनेंस नहीं होगा।

शाम के भोजन का नहीं हो रहा इंतेजाम
हटाए गए परिवारों को भोजन देने के लिए दोपहर नागरिक मंच सहित अन्य समाजसेवियों की टीमें पहुंची थी। सायं के भोजन का कोई इंतजाम प्रशासन की ओर से नहीं किया गया। पीडि़त दुअसिया बंसल, संगीता बंसल, ममता बंसल, दुइजी, छोटू बंसल, सुनील बसंल आदि ने बताया कि दोपहर के खाने में ही कुछ हिस्सा बच्चों के लिए बचा लिया था, उसे शाम को खिलाया लेकिन घर के बड़े लोग बिना खाए ही रहे।


48 घंटे में जानकारी देने लगाए आवेदन
सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत रतहरा मामले में जानकारी भी नगर निगम कार्यालय से मांगी गई है। सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने अधिनियम की धारा ७ के तहत ४८ घंटे के भीतर जानकारी की मांग की है, जिसमें पूछा है कि किस आदेश के तहत घर तोड़े गए और इनके भोजन और विस्थापन को लेकर क्या व्यवस्थाएं हैं। वहीं इसी तरह की जानकारी सामाजिक कार्यकर्ता संजय सिंह बघेल ने भी निगम से मांगी है। अधिनियम में उल्लेख है कि किसी के जीवन और भोजन से जुड़ा विषय होने पर ४८ घंटे के भीतर जानकारी दी जानी चाहिए। राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने भी इस मामले में ट्वीट किया है कि संवेदनशील मामला है, अधिनियम के मुताबिक जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं कराने पर आयोग संज्ञान लेगा।

जवाब देने से कतरा रहे निगम के अधिकारी
लॉकडाउन में मकान उजाडऩे के आरोप में नगर निगम प्रशासन घिरा हुआ है। भोपाल से भी अधिकारियों को फटकार मिली है। अब निगम के अधिकारियों ने चुप्पी साध ली है। आवास योजना के प्रभारी एपी शुक्ला ने बीमारी का हवाला दिया तो उपयंत्री संतोष पाण्डेय ने अनजान बन गए। जोन प्रभारी कौन है इस बात पर भी अफसरों में संशय है। बढ़ते विवाद के चलते आयुक्त अर्पित वर्मा ने भी चुप्पी साध ली है।

माकपा ने कहा निर्ममता की पराकाष्ठा है
रतहरा की घटना पर माक्र्सवादी कम्युनिष्ट पार्टी ने प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए कहा है कि तुगलक और नीरो जैसा मनोरोग और निर्ममता की पराकाष्ठा है। गरीबों का मकान तोड़कर सड़क पर सामान फेक दिया। बच्चों को लेकर वह भटक रहे हैं। इस पर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की गई है। माकपा नेता गिरिजेश सिंह सेंगर, रोहित तिवारी, अमित सोहगौरा आदि ने निंदा की है। वहीं जनता दल सेक्युलर के प्रदेश अध्यक्ष शिव सिंह, समाजवादी जन परिषद के अजय खरे सहित अन्य कई नेताओं ने लॉकडाउन में की गई कार्रवाई को गलत बताया है। 

भाजपा नेता का वीडियो वायरल
रतहरा के विस्थापितों के बीच विधायक प्रतिनिधि राजेश पाण्डेय का वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें उन्होंने कहा है कि सबका ध्यान विधायक राजेन्द्र शुक्ला रखते हैं। उनकी जय बोले आगे चलकर सारी व्यवस्थाएं करेंगे। इसी बीच पाण्डेय एक महिला नेत्री की पीठ पर हाथ फेरते दिख रहे हैं, जिस पर सोशल मीडिया ने घेराबंदी शुरू कर दी है। इस पर राजेश पाण्डेय ने सफाई दी है कि वह उनकी छात्रा रही है, पुत्री के समान व्यवहार करते हैं। अनावश्यक रूप से लोग तूल दे रहे हैं।


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