REWA : विंध्य के विधायकों ने खोला मोर्चा, गोपनीय गणित की बैठक सम्पन, नए चहरे की माँग


सतना। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर इन दिनों गहरे विचार मंथन में जिम्मेदारी के साथ जुटे हुए हैं। कोरोना वायरस महामारी के बढ़ते मरीजों के बीच मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार की चुनौती बढ़ती जा रही है। ग्वालियर राजघराने के ज्योतिरादित्य सिंधिया गुट के बढ़ते दखल की वजह से मंत्रिमंडल विस्तार में तालमेल बिठाना मुश्किल साबित हो रहा है। तमाम तरह के समीकरण साधने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पूरी तरह से संगठन को विश्वास में लेना चाहते हैं। संघ की धारणा को भी बराबर प्राथमिकता देने के लिए तालमेल साधा जा रहा है। सबसे बड़ी खबर यह है कि पिछले पंद्रह साल के दौरान रीवा की काया बदलने वाले पूर्व मंत्री राजेंद्र शुक्ल की राह इस बार आसान नजर नहीं आ रही है। 

विंध्य क्षेत्र में साल 2018 के दौरान भाजपा को ऐतिहासिक जीत दिलाने वाले पूर्व मंत्री का विरोध शुरू हो गया है और सबसे बड़ी बात यह है कि विरोध का शंखनाद विंध्य की धरती पर हुआ है। तकरीबन 14-15 विधायक एक मंच पर आए और पूर्व मंत्री के विरोध की रुपरेखा तैयार कर डाली। सूत्रों की मानें तो गोपनीय तरीके से आयोजित भाजपा विधायकों की बैठक से वाकिफ होने के उपरांत रीवा विधायक राजेंद्र शुक्ल अपनी टीम सेमरिया विधायक केपी त्रिपाठी, त्योंथर विधायक और सांसद जनार्दन मिश्रा के साथ राजधानी भोपाल पहुंच गए हैं। 

पूर्व मंत्री राजेंद्र शुक्ल के खिलाफ कुनबे में ही विरोध अब मुखर हो गया है। मंत्रिमंडल को लेकर रीवा में आयोजित गोपनीय बैठक में शामिल होने वाले विधायकों का कहना है कि रीवा से दूसरों को भी सरकार में मौका मिलना चाहिए। सबसे बड़े हैरत की बात यह है कि विरोध करने वाले रीवा, सतना और सीधी जिले के भाजपा विधायकों ने देवतालाब विधायक गिरिश गौतम का नाम मंत्री पद के लिए आगे बढ़ाया है। कुल मिलाकर विंध्य क्षेत्र की राजनीति आगामी दिनों के लिए चर्चाओं में बनी रहेगी। देवतालाब विधायक गिरीश गौतम, गुढ विधायक नागेंद्र सिंह को वैसे भी पूर्व मंत्री राजेंद्र शुक्ल के विरोधी तौर पर माना जाता था, सियासत में विंध्य क्षेत्र के विधायकों के समूह ने सरगर्मी बढ़ा दी है।

मैनेज करने में माहिर, जमीन मजबूत करने का प्रयास
भाजपा से जुड़े सूत्रों ने बताया कि जहां एक तरफ मध्यप्रदेश में कोरोना वायरस महामारी का बढ़ता प्रभाव भाजपा के लिए एक जटिल समस्या बन गया है तो वहीं दूसरी ओर भाजपा सरकार के मंत्रिमंडल का विस्तार भी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के लिए परेशानी की वजह बना हुआ है। विंध्य क्षेत्र में भाजपा के कुल 24 विधायक हैं इनमें से आधे से अधिक पूर्व मंत्री राजेंद्र शुक्ल का विरोध करने में मुस्तैद हैं। पिछले पंद्रह साल में रीवा सहित विंध्य क्षेत्र में छत्रप की भूमिका निभाने वाले डेवलपमेंट लीडर के आगे दूसरे सभी नेता एक दायरे तक सीमित रह गए। 

कहीं न कहीं भाजपा के अन्य विधायकों की पीड़ा जो काफी समय से रही है वह मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान सामने आ गई है।‌ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेहद करीबी कहे जाने वाले पूर्व मंत्री राजेंद्र शुक्ल के लिए मंत्रिमंडल में पहुंचने की राह बहुत अधिक कठिन नहीं होनी चाहिए। बहरहाल विंध्य क्षेत्र से भाजपा विधायकों का एक समूह पूर्व मंत्री के खिलाफ आवाज उठा चुका है, ऐसे में इस समूह ने अपनी मांग से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित भाजपा संगठन और संघ को भी बराबर अवगत करा दिया है। सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के भरोसे मंद पूर्व मंत्री राजेंद्र शुक्ल तगड़े मैनेजमेंट के लिए जाने जाते हैं। राजधानी भोपाल पहुंच कर रीवा विधायक राजेंद्र शुक्ल ने गुणा गणित तय करने के साथ ही संगठन में मेलजोल बढा दिया है। संघ की भूमिका को इस पूरे मामले के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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