REWA : नींद से जागे भाजपा सरकार और प्रशासन संभाले मोर्चा : सिद्धार्थ तिवारी



रीवा। देश में कोरोनावायरस महामारी का असर लगातार बढ़ता जा रहा है, ऐसी स्थिति में जिला प्रशासन और मध्य प्रदेश सरकार का रोल बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। जिले के युवा कांग्रेस नेता और पूर्व लोकसभा प्रत्याशी सिद्धार्थ राज तिवारी ने बुधवार को जिला कलेक्ट्रेट पहुंच कर कलेक्टर बसंत कुर्रे से सौजन्य मुलाकात करते हुए मौजूदा हालातों पर विचार मंथन करते हुए आवश्यक सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि मानव महामारी से देश वासियों को बचाने की जिम्मेदारी सरकार और शासन की है। पूर्व लोकसभा प्रत्याशी सिद्धार्थ तिवारी ने कहा कि इस समय सबसे बड़ी चुनौती बाहर से आने वाली मजदूरों की भीड़ है। लगातार परदेश से हमारे जिले के मजदूर वापस लौट रहे हैं।

 मजदूरों की भीड़ को देखते हुए कोराइनसेंटर जिले में बनाए जाने की अत्यंत आवश्यकता है। एक सेंटर तराई क्षेत्र में तो दूसरा शहरी क्षेत्र में जिला प्रशासन शुरू करवाए। उन्होंने कहा कि पोलियो की तरह हमें कोरोना को लेते हुए बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की समय रहते व्यवस्था करानी होगी। मौजूदा समय में रीवा में बाहर से आने वाले केवल 75 मजदूरों का कोरोना टेस्ट किसी तरह संभव हो रहा है। तीस लाख आबादी के हिसाब से शहरी और ग्रामीण में बनाए जाने वाले सेंटरों में रोज कम से कम 250 मजदूरों का टेस्ट होना चाहिए। इसके साथ ही जिला प्रशासन कोरोनावायरस महामारी वाले मरीजों के लिए 200 बेड वाले अस्पताल की व्यवस्था कराए। जिससे अस्पतालों में दूसरी स्वास्थ्य सेवाएं बाधित न होने पाएं।



पंद्रह दिनों बाद भूखमरी और बेरोजगारी की समस्या
जिला कलेक्टर बसंत कुर्रे को सौंपे गए ज्ञापन पत्र में पूर्व लोकसभा प्रत्याशी सिद्धार्थ तिवारी ने कहा कि इन दिनों परदेश से मजदूरों की घर वापसी का दौर चल रहा है। सभी मजदूर रोजगार छोड़ कर वापस लौट रहे हैं। ऐसे में उनके पास अधिकतम 10-15 दिनों के भोजन की व्यवस्था शेष होगी। ऐसे में यह तय है कि आगामी पंद्रह दिन बाद बीमारी के साथ साथ भूखमरी की समस्या का सामना भी लोगों को करना पड़ेगा। मानव महामारी के कारण परदेश में रहने वाले मजदूरों ने रोजगार छोड़ कर अपने घरों को लौटना बेहतर समझा है।

यूपीए सरकार की मनरेगा से मजदूरों को होगी राहत
रीवा जिले के पूर्व लोकसभा प्रत्याशी सिद्धार्थ तिवारी ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नाम पर एक समाधान पर आधारित ज्ञापन पत्र सौंपा है। उन्होंने कहा कि रोजगार छोड़ कर मजबूरी में जिला वापस लौटने वाले मजदूरों के सामने यहां आने के बाद सबसे बड़ा संकट रोजगार का खड़ा होगा। उन्होंने कहा कि पूर्व की यूपीए सरकार ने गांव गांव में रहने वाले मजदूरों को रोजगार मुहैया कराने के उद्देश्य से मनरेगा के तहत मनरेगा को लागू किया था, जिसका लाभ देश स्तर पर मजदूरों को मिल रहा था।‌ 

उन्होंने कहा कि आपातकाल के इस दौर में परेशान मजदूरों को भूखमरी से बचाने के लिए रोजगार दिया जाना बेहद जरूरी है। मनरेगा के सहारे मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार लोगों की परेशानी का समाधान कहीं बेहतर तरीके से कर पाएगी। रीवा जिले में फिलहाल मनरेगा के तहत पंजीकृत मजदूरों की कुल संख्या 1 लाख 26 हजार के आसपास है। परदेश से लौटने वाले मजदूरों की संख्या भी हजारों में है, ऐसे में सबको रोजगार देने के लिए मनरेगा को लागू किया जाना बहुत जरूरी है।



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