90 हजार रुपए लेकर सौंप दी बेटी, अब वो कह रहे 1.80 लाख दो और बेटी रख लो


इंदौर । सामाजिक कुरीतियों के चलते इंदौर के एक दंपती ने अपनी नाबलिग बेटी धार के परिवार को 90 हजार रुपये लेकर सौंप दी। परिवार ने इसे शादी का नाम भी दे दिया। ससुराल में नाबालिग से मारपीट की गई तो घर छोड़ दिया। अब ससुराल वालों ने लड़की के माता-पिता से कहा है कि अपनी बेटी को रखो और 1.80 लाख रुपये दे दो। लॉकडाउन से पहले (मार्च में) शहर के एक मजदूर परिवार ने रुपये लेकर अपनी बेटी को गांव के आदिवासी परिवार को सौंपी थी। लड़की की सिर्फ सगाई की गई थी और फिर शादी के पहले ही लड़की को ससुराल वाले ले गए।

बाल कल्याण समिति के मुताबिक नाबालिग के परिवार में उसके सहित 11 भाई-बहन हैं। यह नाबलिग सातवें नंबर की थी। माता-पिता सहित भाई-बहन भी मजदूरी करते हैं और कोई स्कूल तक नहीं गया। समिति अध्यक्ष माया पांडे के मुताबिक लड़की के माता-पिता से बात की तो उन्होंने स्वीकारा कि हमारे समाज में ऐसी प्रथा है जिसमें लड़की की शादी में लड़के वाले पैसा देते हैं। इसी वजह से बेटी के बदले रुपये लिए थे।

सास व पति ने प्रताड़ित किया तो घर से भागी

समिति अध्यक्ष के मुताबिक ससुराल में पति व सास लड़की के साथ अकसर मारपीट करते थे। लॉकडाउन खुलने के दौरान लड़की को मौका मिला तो वह 14 जून को रात में घर से निकली और अगले दिन दूसरे गांव के सरपंच से मदद मांगी। सरपच ने उसे पुलिस चौकी पर ले जाकर रिपोर्ट दर्ज कराई। इसके बाद लड़की को धार जिले के वन स्टॉप सेंटर में आश्रय दिया। इसके बाद धार जिले की बाल कल्याण समिति ने उसे 16 जून को इंदौर भेजा। बालिका अभी क्वारंटाइन आश्रयगृह में रह रही है। उसके परिवार को तलाश लिया गया। लड़की के माता-पिता और भाई का कहना है कि लड़की को अभी समिति अपने आश्रयगृह में रखे। ससुराल वाले यहां आकर झगड़ा करेंगे। हमारे पास इतना पैसा नहीं कि हम उन्हें दे सकें। अब दोनों ही पक्षों को बुलाकर चर्चा की जाएगी, इसके बाद वैधानिक कार्रवाई होगी।

लड़की किसी दूसरे गांव की थी और मुझे वह सुबह नौ बजे मिली। उसने बताया कि सास व पति मारपीट करते हैं, इस कारण वह रात को घर से भागी। उसने कहा इंदौर में रहने वाले माता-पिता के पास पहुंचाने के लिए मदद मांगी। वह पैदल ही घर आना चाहती थी, लेकिन उसे समझाइश देकर थाने ले गया। इसके बाद पुलिस ने लड़की की मदद की। छगन मसार, सरंपच, पीपल्या पंचायत, जिला धार

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