REWA : नगर निगम नव नियुक्त IAS मृणाल मीणा ने किया पद ग्रहण : ये चुनौतियां करेंगी परेशान


रीवा। नगर निगम आयुक्त मृणाल मीणा ने सुबह निगम कार्यालय पहुंचकर जवाइनिंग दे दी। पहले दिन निगम के कामकाज से वह दूर रहे। सुबह वाइनिंग के बाद निगम के आयुक्त एसके पाण्डेय और प्रभारी अधीक्षण यंत्री शैलेन्द्र शुक्ला से करीब आधे घंटे तक चर्चा करने के बाद वे कलेक्ट्रेट में आयोजित मीटिंग में चले गए। दिन भर बैठक में समय बीत गया। मंगलवार को निगम के अधिकारियों की बैठक बुलाई है, जिसमें विधिवत का कामकाज प्रारंभ होगा। 2015 बैच के आइएएस मृणाल इसके पहले राजगढ़ जिला पंचायत के मुख्यकार्यपालन अधिकारी के पद पदस्थ रहे हैं। इसके पहले रीवा जिले में प्रशिक्षु अधिकारी के रूप में वह रह चुके हैं। निगम का कामकाज के लिए यदि कठिन नहीं हो पूरी तरह से आसान भी नहीं होगा। पूर्व में कुछ ऐसी उलझनें रही हैं जिनकी वजह से प्रदेश स्तर पर सुर्खियां बनती रही हैं। शहर के विकास की अव्यवस्था को सुधारना के लिए कड़ी चुनौती होगा।



पूर्व के तीन आयुक्त रहे हैं विवादों में

निगम में लगातार पूर्व के तीन आयुक्तों के साथ विवाद जुड़ा रहा है। इस कारण इससे स्वयं को अलग रखते हुए काम को गति देना नए आयुक्त के लिए आसान नहीं होगा। कुछ समय पहले ही हटाए गए प्रभारी आयुक्त अर्पित वर्मा लॉकडाउन में रतहरा का अतिक्रमण हटाने और कोरोना संक्रमित का ठीक से अंतिम संस्कार नहीं करा पाने के मामले में विवादित हो गए थे। इसके पहले रहे सभाजीत यादव के खिलाफ भाजपा नेताओं ने मोर्चा ही खोल रखा था। उन्होंने  एमआइसी को दो बार भंग करने का प्रस्ताव भेजा था। पूर्व मंत्री को वसूली का नोटिस देकर सुर्खियों में आए थे। वहीं के पहले रहे आरपी सिंह अधिकारी, कर्मचारियों के बीच गुटबाजी और एक पक्ष के लिए काम करने के आरोपों के कारण विवादित रहे। हालांकि इनके पहले कर्मवीर शर्मा और सौरभ सुमन का बेहतर कार्यकाल रहा है। लोग अब तक याद करते हैं।




 इन प्रमुख चुनौतियों का करना होगा सामना

1- जलभराव की समस्या- नए आयुक्त के लिए पहली चुनौती शहर को जलभराव की समस्या से बचाना होगा। बरसात शुरू हो गई है, नालों की सफाई हुई नहीं है, ऐसे में तेज बारिश से कई मोहल्लों में पानी भरेगा। कम समय में व्यवस्था बनाना चुनौती भरा काम होगा।

2- कचरा प्रबंधन- शहर में कचरा प्रबंधन की समस्या लंबे समय से है। डोरटूडोर कचरा कलेक्शन के लिए कंपनी को ठेका दिया गया है लेकिन मोहल्लों में वाहन नहीं पहुंचते, सडक़ों पर कचरे का ढेर लगा रहता है। पहले भी कई नोटिसें जारी हुई लेकिन कोई असर नहीं हुआ।

3- सीवरेज प्रोजेक्ट- रीवा शहर के लिए इनदिनों सीवरेज प्रोजेक्ट सबसे बड़े सिरदर्द के रूप में है। शहर के बड़े हिस्से की सडक़ें खोकदर ठेकेदार ने छोड़ दिया

है। जहां पर कीचड़ की वजह से वाहन फंस रहे हैं, दुर्घटनाएं हो रही हैं। अब तक निगम अधिकारी ठेकेदार के सामने लाचार नजर आते रहे हैं। 214 करोड़ रुपए के इस प्रोजेक्ट को समय पर पूरा कराना बड़ी चुनौती होगी।
4- स्टार्म वाटर ड्रेन- करीब 22 करोड़ रुपए लागत से शहर में बनाए जा रहे 17 बड़े नालों का काम तीन वर्ष से अटका है। इस ठेकेदार के राजनीतिक प्रभाव के चलते निगम के अधिकारी मनमानी के बावजूद खामोश रहे हैं। शहर में जलभराव को रोकने इसका निर्माण पूरा होना आवश्यक है।

5- मृत मवेशियों का निस्तारण- मृत मवेशियों का शहर में निस्तारण करने के लिए कोई माकून इंतजाम नहीं है। इसलिए बरसात के दिनों से हर साल बवाल होता है। इस वर्ष भी वेटरनरी कालेज ने अपनी भूमि पर मवेशी फेंकने पर आपत्ति दर्ज करा दी है

6- पेयजल सप्लाई- पेयजल सप्लाई के लिए भी ठेका निगम ने दे रखा है लेकिन आए दिन पाइपलाइन में लीकेज की समस्या से दूषित पानी पहुंच रहा है। शुद्ध पानी दिला पाना भी बड़ी चुनौती होगा।

7- आवास योजना- प्रधानमंत्री आवास योजना के बीएलसी घटक के हितग्राहियों का अधूरा मकान पड़ा है। किस्त नहीं मिलने से निर्माण रुका है। बरसात में पन्नियां लगाकर लोग गुजारा कर रहे हैं। वहीं एएचपी घटक के मकानों का आवंटन बड़ा पेंच है। अधूरे मकानों को पूरा कराना और  बिक्री कर पाना भी कठिन काम होगा। ईडब्ल्यूएस मकानों की कीमत को लेकर विवाद पहले ही चल रहा है। 

8- राजस्व वसूली- निगम की आर्थिक स्थिति बीते कुछ समय से बिगड़ती जा रही है। पूर्व में लिए गए ऋण में राशि कटौती के चलते समय पर वेतन भी नहीं मिल पा रहा है। राजस्व वसूली पहले भी कमजोर थी, अब लॉकडान की वजह से कई महीने से काम ठप है। इस पर गति देना भी चुनौती होगा।



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