Abhishek Bachchan की वेब सीरीज Breathe Into the Shadows की हो रही बुराई, कमजोर साबित हुई Web Series


Abhishek Bachchan की पहली वेब सीरीज Breathe Into the Shadows 10 जुलाई को रिलीज हुई है। अब इस थ्रिलर Web Series की समीक्षाएं आना शुरू हुई हैं, जो खुश कर देने वाली नहीं हैं। इस कहानी को थ्रिलर नहीं माना जा रहा और ना ही इसमें समीक्षकों को रोमांच महसूस हुआ है। पहली 'ब्रीद' से यह काफी कमजोर बताई जा रही है। इस किडनैपिंग ड्रामा में आप इमोशनल भी नहीं होते हैं, जबकि पहली ब्रीद में आर माधवन के कई सीन ऐसे थे जो आंखों में आंसू ले आते थे।
इंडियन एक्सप्रेस में शुभ्रा गुप्ता ने लिखा है - ढीले लिखे इस सीजन में कभी आप उचट जाते हैं तो कभी आपको मन लग जाता है। एक या दो ही सीन देखनेलायक है नहीं तो ऐसे डायलॉग है - क्रॉकरी की दुकान में खुला सांड! आखिरी के कुछ एपिसोड्स तो सब्र की इंतेहा ले लेते हैं।
हिन्दुस्तान टाइम्स में लिखा गया है - बिना सिर - पैर की बातें हैं। यह कहानी पैरेंट्स के बेटी के किडनैप हो जाने के दुख पर अटकती ही नहीं है और सीधे सीरियल किलर के पीछे पड़ जाती है। निर्देशक मयंक शर्मा ने फैमिली ड्रामा पूरी तरह खत्म कर दिया है जबकि पहले सीजन में यह कहानी की जान था। पूरी सीरीज में सिर्फ ही अमित साध ही हैं जो नॉन - साइकोपैथ नजर आते हैं।



एनडीटीवी ने तो हेडिंग ही दिया है 'अभिषेक बच्चन की वेब सीरीज में ऑक्सिजन कम है'। 12 एपिसोड की नौ घंटे तक चलने वाली इस सीरीज को यहां खत्म ना होने वाली मैराथन बताया गया है। पांच में से डेढ़ स्टार देते हुए यह पोर्टल लिखता है - अच्छी बातों के लिए यहां श्रेय दिया जाना चाहिए अमित साध को। अभिषेक बच्चन और नित्या मेनन यहां भावनात्मक मोर्चा संभाले थे लेकिन इसकी जरूरत ही नहीं थी।


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