शत्रुओं से निपटने के लिए जानिए क्या कहती है चाणक्य नीति : CHANAKYA NITI


आचार्य चाणक्य ने जीवन के हर एक पहलू पर अपनी नीति दी है। स्वस्थ्य के बारे में भी चाणक्य की नीति है जिसमें उन्होंने कहा है कि भोजन के बीच में पानी पीना विष के समान होता है। इसके अलावा शिक्षा, मित्र, बिजनेस, आचार-विचार समेत कई महत्त्वपूर्ण विषयों पर चाणक्य ने अपने विचार दिये हैं। शत्रु के बारे में भी चाणक्य की नीति है। चाणक्य नीति नामक पुस्तक में दुश्मन को परास्त करने बारे में भी वर्णन मिलता है। आचार्य चाणक्य कहते हैं कि शत्रु चाहे कोई भी हो, उसे छोटा या कमजोर नहीं समझना चाहिए। 

आइए जानते हैं कि जब शत्रु से घिर जाएं उस वक्त चाणक्य नीति के मुताबिक क्या करना चाहिए। - शत्रु से घिर जाने पर हर वक्त सतर्क रहना चाहिए। सावधान रहते हुए दुश्मन की हर एक गतिविधि पर अपनी नजर बनाई रखनी चाहिए। शत्रु के प्रहार का इंतजार करना चाहिए और जब वह आक्रामक होकर प्रहार करे उसके बाद ही अपना स्टेप लेना बेहतर होता है। 

शत्रु के घिरे होने पर भी उससे मुंह नहीं फेरना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से तर्क करने की शक्ति क्षीण हो जाती है। इसलिए शत्रु के साथ एक खिलाड़ी के तौर पर पेश आना चाहिए।  चाणक्य नीति में कहा गया है कि शत्रु के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त कर लेने से उस पर 75 फीसदी जीत हासिल हो जाती है। साथ ही जब शत्रु के बारे में संपूर्ण जानकारी हासिल कर लेते हैं तो उसे आसानी से पराजित कर सकते हैं। 

अनुलोमेन बलिनं प्रतिलोमेन दुर्जनम्। 
आत्मतुल्यबलं शत्रु: विनयेन बलेन वा। 

चाणक्य नीति में वर्णित इस श्लोक के माध्यम से चाणक्य कहते हैं कि अगर शत्रु आपसे अधिक बलशाली है तो उसके अनुकूल आचरण कर उसे परास्त किया जा सकता है। अगर शत्रु दुष्ट स्वभाव का है तो उसके विपरीत चलकर उसे हराया जा सकता है। वहीं अगर शत्रु आपके समान बल वाला है तो विनय (अनुरोध) या बलपूर्वक हराया जा सकता है।


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