REWA- SIDHI के जनादेश को भाजपा ने किया नजर अंदाज : सिंधिया गुट के मंत्रियों को मिला मौका


मध्य प्रदेश। भारतीय जनता पार्टी ने मध्य प्रदेश में सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर जो निर्णायक फैसला किया है, उससे विंध्य और महाकौशल क्षेत्र को एक दम से नजर अंदाज किया गया है। जिस तरह से विंध्य को भाजपा ने मायूस किया है उसकी उम्मीद शायद किसी को नहीं थी। जिस तरह से साल 2018 के विधानसभा चुनाव में विंध्य के जनमानस ने सबसे बड़ा और मजबूत जनादेश दिया था, उस तरह का महत्व भाजपा ने अवसर आने पर विंध्य को नहीं दिया। जब भाजपा सरकार में विंध्य को तवज्जो देने का समय आया तो भाजपा आलाकमान ने सुपड़ा ही साफ कर दिया। 

रस्म अदायगी करते हुए सतना जिले के अमरपाटन विधायक रामखिलावन पटेल को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। विधानसभा चुनाव 2018 के दौरान विंध्य क्षेत्र की कुल 30 विधानसभा सीटों में से 24 पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। जब विंध्य क्षेत्र से रिकार्ड तोड जनादेश दिया गया तो फिर शिवराज सरकार के कैबिनेट विस्तार में विंध्य को कोई खास तवज्जो नहीं दी गई है। विंध्य क्षेत्र की तरह महाकौशल क्षेत्र में भी भाजपा सरकार की उपेक्षा का दौर जारी रहा। 

भाजपा आलाकमान ने पहली बार मध्य प्रदेश से पहुंची विधायकों की लिस्ट को रिजेक्ट करते हुए दिल्ली दरबार से मंत्रिमंडल विस्तार पर अंतिम फैसला किया गया। भाजपा आलाकमान ने पूर्व मंत्रियों को कैबिनेट विस्तार से बाहर करने का फैसला कर लिया था। विंध्य क्षेत्र के रीवा और सीधी जिले में रहने वाले लोगों ने आंख मूंद कर भाजपा को भारी जनादेश विधानसभा चुनाव में सौंपा था। इसके बाद भी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के मंत्रिमंडल विस्तार में रीवा और सीधी जिले का नामोनिशान मिटा दिया गया। 


भाजपा की इस उपेक्षा को विंध्य का जनमानस नहीं समझ पा रहा है। विंध्य क्षेत्र में बाह्मण समाज का झुकाव पूरी तरह से भाजपा की तरफ रहा है, इस खास वर्ग के किसी भी सीनियर विधायक को शिवराज सिंह चौहान के मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया। विंध्य की सियासत में भाजपा आलाकमान के फैसले से सबके होश उड़ गए हैं। आखिर ऐसी क्या वजह रही कि रीवा और सीधी जिले से वरिष्ठ भाजपा विधायकों को भाजपा सरकार का हिस्सा क्यों नहीं बनाया गया। 

विकास पुरुष को भी कर दिया नजरअंदाज
साल 2018 में विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने सबसे अधिक चौंकाने वाला प्रर्दशन विंध्य क्षेत्र में किया था। इस ऐतिहासिक जीत में कहीं न कहीं अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका पूर्व मंत्री और रीवा विधायक राजेंद्र शुक्ल की रही। रीवा जिले की सभी आठ विधानसभा सीटों पर भाजपा का डंका बजाया गया। पिछले पंद्रह सालों में भाजपा सरकार का हिस्सा रहते हुए पूर्व मंत्री ने सुनियोजित तरीके से विकास की गंगा रीवा विधानसभा क्षेत्र में बहाई थी। मार्च 2020 में जब विश्वासघात और खरीद फरोख्त के सहारे चौथी बार भाजपा सरकार सत्ता सीन हुई तो विंध्य क्षेत्र में लोग करने लगे कि विंध्य क्षेत्र के तथाकथित विकास पुरुष को भाजपा सरकार के कैबिनेट में शामिल करते हुए महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। जमीनी स्तर पर पूर्व मंत्री राजेंद्र शुक्ल का खुलकर पहली बार अपनों ने ही विरोध किया है। भाजपा सरकार, संगठन और भाजपा आलाकमान के साथ साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ तक पहुंच कर रीवा जिले के पांच भाजपा विधायकों ने पूर्व मंत्री को कैबिनेट से बाहर रखने का आग्रह किया था।

इसी विरोध के कारण अंततः भाजपा आलाकमान ने पूर्व मंत्री को इस बार भाजपा सरकार में शामिल न करने का फैसला किया। भाजपा से जुड़े सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पूर्व मंत्री राजेंद्र शुक्ल को चौथी बार कैबिनेट में शामिल करने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया पर अफसोस उन्हें सफलता नहीं मिली है। नीचे से लेकर ऊपर तक रीवा विधायक का विरोध अपनों ने ही किया है। अंतिम समय तक पूर्व मंत्री के सर्मथको ने उम्मीद बांध रखी थी कि जश्न मनाने का मौका मिलेगा पर होनी को कुछ और ही मंजूर था इसलिए रीवा विधायक राजेंद्र शुक्ल के हाथ में अंततः मायूसी ही लगी। 

उधर पूर्व मंत्री ने जब यह देखा कि उनकी दाल नहीं गली तो उन्होंने पूरी ताकत लगा दी कि यदि रीवा से मैं नहीं तो कोई दूसरा नहीं होगा। उनकी इसी चाणक्य वाली चाल का असर यह हुआ कि रीवा के देवतालाब विधायक गिरीश गौतम का जो नाम मंत्रिमंडल विस्तार के लिए फाइनल लगभग कर दिया था, उन्हें भी अचानक भाजपा आलाकमान के शपथ लेने वाले मंत्रियों की सूची से बाहर कर दिया गया। इतना ही नहीं आहत विकास पुरुष ने सीधी जिले के कद्दावर नेता विधायक केदारनाथ शुक्ला के लिए भी परेशानी खड़ी कर दी। सूत्रों ने बताया कि अचानक सीएम शिवराज सिंह चौहान और संगठन ने सीधी विधायक केदारनाथ शुक्ला का नाम सूची से बाहर करना ही उचित समझा। 




Powered by Blogger.