MP : खुशखबरीः अब बजरंग बली की तपस्थली तक पहुंचना जल्द होगा आसान


सतना. महाबली हनुमान जी की तपस्थली हनुमान धारा पहाड़ी तक पहुंचना भक्तों के लिए अब सुगम हो जाएगा। अब भक्तों को सीढियां नहीं चढनी होंगी। वहां तक जाने के लिए रोप-वे तैयार है। बस प्रतीक्षा है शुभ मुहूर्त की। हालांकि वह शुभ मुहूर्त भी तय हो चुका है। इसी साल महज महीने भर बाद हनुमान भक्त रोप-वे पर सवारी कर इस दुर्गम स्थल तक पहुंच पाएंगे।

उम्मीद की जा रही है कि तीर्थ स्थल चित्रकूट की हनुमान धारा पहाड़ी तक जाने के लिए रोप-वे की शुरुआत शारदीय नवरात्र के पहले दिन हो सकती है। बता दें कि कोलकाता की दामोदर रोपवे इन्फ्रा ने 5 करोड़ की लागत से इस रोप-वे की आधार शिला वर्ष 2018 में रखी थी। अब सारा काम तकरीबन पूरा हो चुका है, बस इंतजार है उद्घाटन का।

प्रसिद्ध तीर्थ स्थली हनुमानधारा तक जाने के लिए रोप वे

जानकारी के मुताबिक इस रोप-वे की ट्रालियां आटोमैटिक होंगी, जो अपने आप खुलेंगी और बंद हो जाएंगी। हर ट्राली में एक साथ 6 श्रद्धालु बैठ सकेंगे। रोपवे की अप-डाउन कुल लंबाई 634 मीटर है। इसमें 12 आटोमैटिक ट्रालियां होंगी। प्रोजेक्ट के इंचार्ज एसके तिवारी और टेक्निकल हेड एस चौधरी की मानें तो यात्रियों के सुरक्षा मापदंडो का पूरा ध्यान रखा गया है।

बताया गया है कि समुद्र तल से हनुमानधारा पहाड़ी की ऊंचाई 600 फिट है। इस कारण बहुतेरे श्रद्धालु चाहते हुए भी हनुमानधारा के दर्शन नहीं कर पाते थे। ऐसे हनुमान भक्तों की इच्छा पूरी करने के लिए ही दो साल पहले रोप-वे चलाने का काम शुरू हुआ था जो अब पूरा हो चुका है।

बता दें कि मध्य प्रदेश के एक अन्य तीर्थ मां शारदा के परिसर तक जाने के लिए मैहर में रोप-वे का संचालन पहले से ही हो रहा है। चित्रकूट के दर्शनीय स्थल हनुमान धारा के लिये भी वर्षों से श्रद्धालुओं द्वारा रोप-वे की मांग की जा रही थी। वो भी अब तकरीबन पूरी हो चुकी है।

यहां यह भी बता दें कि कामतानाथ स्वामी के दर्शन करने आने वाले लाखों श्रद्धालुओं में से ज्यादातर भक्त हनुमानधारा के दर्शन को जाते हैं। पहाड़ों की काफी ऊंचाई पर दुरुह चढ़ाई के कारण जहां लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। पर भक्तों को पहाड़ी के दुर्गम मार्गों से पैदल जाने की जरूरत नहीं होगी। विश्व प्रसिद्ध धार्मिक व पर्यटक स्थल चित्रकूट के हनुमान धारा में रोप-वे का मार्ग अब प्रशस्त हो गया है।

चित्रकूट में हनुमानधारा का विशेष महत्व है। यहां पर हनुमानजी को वह सुख और शांति मिली थी, जो पूरे ब्रह्मांड में हासिल नहीं हुई। कहा जाता है कि लंका दहन में हनुमान जी का पूरा शरीर काफी तप गया था। लंका विजय के बाद उन्होंने अपने आराध्य प्रभु श्रीराम से शरीर की शीतलता का उपाय पूछा। प्रभु ने उनको विंध्य पर्वत पर ऋषि मुनियों की पवित्र भूमि की प्राकृतिक छटा पर तप करने की सलाह दी थी। हनुमानजी ने चित्रकूट आकर विंध्य पर्वत श्रृंखला की इसी पहाड़ी पर श्रीराम रक्षा स्त्रोत का पाठ 1008 बार किया था। अनुष्ठान पूर्ण होने पर जलधारा प्रकट हुई। उससे उनको शीतलता मिली। वह धारा वर्तमान में भी अविरल बह रही है। इसलिए इसका नाम हनुमानधारा पड़ा।

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