ALERT : 5 अक्‍टूबर को इन राज्‍यों में होगी भारी मूसलाधार बारिश : वज्रपात की चेतावनी

मानसून देश भर से विदा हो रहा है। लेकिन जाते-जाते भी कुछ राज्‍यों में अभी आंधी और बारिश का क्रम देखा जा सकता है। मध्‍य भारत और उत्‍तर भारत में इन दिनों तेज गर्मी पड़ रही है। उमस के कारण भी लोग बेहाल हैं। इस बीच भारतीय मौसम विभाग क्ष्ग्क़् ने अनुमान जताते हुए कहा है कि कुछ राज्‍यों में अभी मूसलाधार बारिश के आसार हैं। कई राज्‍य ऐसे हैं जहां हल्‍की बारिश का दौर देखने को मिलेगा। यहां जानिये देश में अगले दो से तीन दिनों तक कैसा मौसम रहेगा।

5 अक्‍टूबर के दौरान असम और मेघालय और त्रिपुरा में काफी भारी वर्षा के साथ काफी व्यापक वर्षा की संभावना है। अगले 5 दिनों के दौरान उत्तर पश्चिम भारत के अधिकांश हिस्सों में शुष्क मौसम की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार छत्तीसगढ़, नागालैंड, असम और मेघालय में अलग-अलग जगहों पर बिजली गिरने के साथ मध्यम गरज के साथ छीेंटे पड़ सकते हैं। अगले 12 के दौरान झारखंड, पश्चिम बंगाल और सिक्किम, तटीय आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में बारिश हो सकती है।

झारखंड में अगले 5 दिनों तक बारिश का अलर्ट, वज्रपात की चेतावनी

राजधानी रांची और पूरे झारखंड में अगले 5 दिनों तक बारिश की संभावना है। मौसम विभाग ने इसके लिए अलर्ट जारी किया है। आसपास के इलाके में आंशिक रूप से बादल छाए हुए हैं। मौसम विभाग के अनुसार शनिवार को रांची में दिन में बादल छाए रहेंगे। इसके साथ ही दिन में गर्जन के साथ एक से दो बार भारी बारिश हो सकती है।अगले 24 घंटों के दौरान रांची सहित आसपास के इलाकों में वज्रपात के साथ भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा गुमला, हजारीबाग, खूंटी, देवघर, धनबाद, दुमका, गिरिडीह, गोड्डा, जामताड़ा, पाकुड़, साहेबगंज, पूर्वी सिंहभूम और पश्चिमी सिंहभूम में वज्रपात के साथ भारी बारिश की संभावना जताते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार रांची सहित राज्य के सभी जिलों में अगले चार से पांच दिनों तक बारिश की संभावना है। बंगाल की खाड़ी में दक्षिण ओडिशा के पास एक कम दबाव का क्षेत्र बन रहा है।

इस मौसम में बीमारियों से बचें

चिकित्सकों का कहना है कि इस मौसम में स्वाभाविक रूप से संक्रामक व वायरस से जुड़ी बीमारियों का प्रसार होता है। इससे बचाव के लिए अपने घरों व आसपास स्वच्छता के प्रति सजग रहना तथा कहीं भी पानी का जमाव नहीं होने देना चाहिए। इसके अलावा खान, पान रहन सहन में भी मौसम के अनुसार बदलाव करना जरूरी है।


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