MP : रीवा के APS विश्वविद्यालय में अफसरों ने बड़े पैमाने पर किया घपला : छात्रों का शुल्क हजम कर रोका परीक्षा परिणाम



रीवा। अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में दूरवर्ती शिक्षा के नाम पर अफसरों ने बड़े पैमाने पर घपला कर दिया है। जिसका खामियाजा अब छात्रों को भुगतना पड़ रहा है। पूर्व में छात्रों को पंजीयन कराया गया और उनकी परीक्षा भी आयोजित कराई गई लेकिन जब परीक्षा परिणाम जारी करने की बारी आई तो पता चला कि इन छात्रों की ओर से जमा की गई राशि विश्वविद्यालय के कोष में जमा ही नहीं है। इस कारण अब छात्रों का परीक्षा परिणाम ही रोक दिया गया है। जिसकी वजह से छात्र लगातार परेशान हो रहे हैं, विश्वविद्यालय की ओर से कोई ठोस वजह भी नहीं बताई जा रही है।

परीक्षा परिणाम रुके होने की वजह से छात्र दूसरे कार्य भी नहीं कर पा रहे हैं, उन्हें इसी का इंतजार है। लगातार विश्वविद्यालय के अधिकारियों से संपर्क में भी छात्र हैं और परीक्षा परिणाम की भी मांग कर रहे हैं। इधर विश्वविद्यालय प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों की लापरवाही और मनमानी सामने आई तो वह एक दूसरे पर ठींकरा फोडऩे में लगे हुए हैं।

विश्वविद्यालय के अधिकारियों का एक तर्क यह भी है कि कालेजों के माध्यम से जो पंजीयन फार्म आए थे उसमें ही कुछ विसंगतियां थी जिनकी वजह से ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। जो छात्र अपना परीक्षा परिणाम जानने के लिए विश्वविद्यालय आ रहे हैं उन्हें कालेजों की लापरवाही बताकर लौटाया जा रहा है। जब कालेज पहुंचते हैं तो फिर से विश्वविद्यालय भेजा जाता है।

प्रवेश पत्र वितरित किया और परीक्षा ली तब तक नहीं दिया ध्यान
विश्वविद्यालय के अधिकारियों की बड़ी लापरवाही यह है कि दूरवर्ती शिक्षा के लिए पंजीकृत छात्रों के शुल्क को लेकर शुरुआती दिनों में कोई ध्यान नहीं दिया गया। इस बाद जब प्रवेश पत्र जारी हुए तब भी इस पर ध्यान नहीं दिया और न ही किसी तरह की आपत्ति उठाई। छात्रों ने परीक्षा भी दे डाली। जब परीक्षा परिणाम देने की बात आई तो कहा गया कि इनका शुल्क ही जमा नहीं है। अब छात्र इसलिए दोबारा शुल्क नहीं देना चाह रहे हैं क्योंकि उनका कहना है कि वह पहले ही रुपए जमा कर चुके हैं और उसकी रसीदें भी उनके पास मौजूद हैं। बता दें कि विश्वविद्यालय सामान्य तौर पर उन छात्रों का प्रवेश पत्र जारी नहीं करता जिनका परीक्षा शुल्क सहित अन्य शुल्क जमा नहीं होता।

दो वर्ष से छात्रों को भटका रहे अधिकारी
अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय ने दूरवर्ती शिक्षा के वर्ष २०१७-१८ के परीक्षार्थियों का परीक्षा परिणाम रोक रखा है। ऐसे में छात्र लगातार भटक रहे हैं, कुछ दूसरे कक्षाओं में प्रवेश नहीं पा रहे हैं तो कुछ नौकरियों के लिए आवेदन नहीं कर पा रहे हैं। विश्वविद्यालय और संबंधित कालेजों की लापरवाही की वजह से छात्रों का समय खराब हो रहा है। अब तक जिम्मेदारों की भूमिका प्रबंधन तय नहीं कर पाया है। जानकारी के मुताबिक करीब छह सौ की संख्या से अधिक छात्रों का परीक्षा परिणाम अटका हुआ है। इन छात्रों से जमा कराए गए रुपए कहां गए इसका हिसाब नहीं है।

करोड़ों का घपला पता नहीं लगा पाया विश्वविद्यालय
दूरवर्ती शिक्षा के नाम पर कई वर्षों से घपला किया जा रहा था। जिस वर्ष की परीक्षा का परिणाम रोका गया है, उस साल करीब ३६ लाख रुपए विश्वविद्यालय को आना चाहिए था। इन छात्रों को प्रवेश पत्र के साथ ही उत्तर पुस्तिका एवं प्रश्रपत्र सहित अन्य कार्यों में विश्वविद्यालय की बड़ी रकम भी लगी है। सूत्रों की मानें तो इसके पहले भी छात्रों से ली जाने वाली फीस विश्वविद्यालय के कोष में पूरी तरह से जमा नहीं की जाती थी। अब उसका भी पता लगाने का कार्य प्रारंभ किया गया है।

कुलसचिव का नो-कमेंट्स
दूरवर्ती शिक्षा के छात्रों का परीक्षा परिणाम रोकने और विश्वविद्यालय को हुई बड़ी आर्थिक क्षति के संबंध में विश्वविद्यालय के कुलसचिव बृजेश सिंह से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया लेकिन उनकी ओर से इस मामले में किसी तरह की प्रतिक्रिया देने से इंकार कर दिया गया है। जबकि उनकी भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। परीक्षा का आयोजन और उसका परिणाम जारी करने तक की व्यवस्था उनकी ही होती है। इसके पहले भी वह विश्वविद्यालय में पदस्थ रह चुके हैं और उस कार्यकाल से भी जुड़ा मामला बताया जा रहा है। इस पर उनसे पक्ष लेने का प्रयास किया गया।

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