REWA : 14 करोड़ से अधिक के गोलमाल में TRS के प्राचार्य रामलला शुक्ल हुए निलंबित



रीवा। बीते कुछ समय से भ्रष्टाचार को लेकर सुर्खियों में रहे टीआरएस कालेज के मामले में शासन स्तर से बड़ी कार्रवाई की गई है। पूर्व प्राचार्य डॉ. रामलला शुक्ला को निलंबित करने का आदेश जारी किया गया है। कालेज में बीते दो वित्तीय वर्षों के दौरान आय-व्यय के लेखों का परीक्षण कराया गया था। जिसमें करोड़ों रुपए की वित्तीय अनियमितता उजागर हुई थी।

निलंबन आदेश में कहा गया है कि वित्तीय वर्ष 2018-19 एवं 2019-20 में वित्तीय अनियमितता की जांच कराई गई है, जिसकी प्रारंभिक रिपोर्ट में 14.09 करोड़ रुपए की अनियमितता तत्कालीन प्राचार्य डॉ. रामलला शुक्ल द्वारा किए जाने की बात कही गई है।

तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए शुक्ल को क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक कार्यालय सागर अटैच किया गया है। उच्च शिक्षा विभाग का निर्देश रीवा के अतिरिक्त संचालक के पास भी आया है जिसमें कहा गया है कि निलंबन आदेश की प्रति संबंधित से तामील कराकर शासन को सूचित करें।

जानकारी मिली है कि निलंबन आदेश की प्रति मिलते ही अतिरिक्त संचालक कार्यालय ने टीआरएस कालेज को भी एक पत्र लिखा है और पूर्व प्राचार्य रामलला के पास भी भिजवाया है। वहीं इस संबंध में टीआरएस कालेज की प्राचार्य डॉ. अर्पिता अवस्थी का कहना है कि उन्हें केवल सोशल मीडिया के जरिए सूचना मिली है, आधिकारिक पत्र का अवलोकन अभी तक नहीं किया है।

सरकार बदलते ही टारगेट में रहे हैं पूर्व प्राचार्य
प्रदेश में सरकार बदलते ही रीवा में तत्काल कुछ अधिकारियों पर कार्रवाई हुई थी। जिसमें टीआरएस कालेज के तत्कालीन प्राचार्य रामलला शुक्ला भी शामिल हैं। उन्हें प्राचार्य के पद से हटाते हुए प्रो. अर्पिता अवस्थी को प्रभार दिया गया। जिसके कुछ दिन बाद ही उन्होंने कलेक्टर को पत्र लिखकर जानकारी दी कि कैशबुक का प्रभार नहीं दिया जा रहा है। कई वित्तीय अनियमितताओं का उल्लेख करते हुए जांच की मांग उठाई थी। कलेक्टर भी कुछ दिन के बाद कालेज निरीक्षण करने पहुंचे और करीब डेढ़ घंटे से अधिक समय तक वहां की स्थितियों का जायजा लिया। किसी कलेक्टर द्वारा टीआरएस कालेज में निरीक्षण का यह सर्वाधिक समय बताया जा रहा था। तभी से माना जा रहा था कि कार्रवाई होगी।

तीन सदस्यीय विशेष टीम जांच के लिए गठित की गई थी
कलेक्टर ने टीआरएस कालेज में कथित भ्रष्टाचार की जांच कराने के लिए अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा की अगुआई में तीन सदस्यीय विशेष जांच दल गठित किया था। करीब दो महीने तक एक-एक दस्तावेज का परीक्षण करने के बाद टीम ने अपनी रिपोर्ट में भ्रष्टाचार की पुष्टि की थी। इस रिपोर्ट के आधार पर संभागायुक्त आरके जैन ने पूर्व प्राचार्य रामलला शुक्ला, एसयू खान, सत्येन्द्र शर्मा सहित 15 प्रोफेसर्स और कर्मचारियों को नोटिस जारी किया था। इसमें से कइयों ने अपना जवाब तत्काल प्रस्तुत कर दिया है, कुछ अभी तक जवाब नहीं प्रस्तुत कर पाए हैं। माना जा रहा है कि भ्रष्टाचार के इस मामले में अभी और लोगों पर कार्रवाई हो सकती है। 

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