REWA : युवती के साथ 10 दिन तक बारी-बारी से थाना प्रभारी ,SDOP एवं 3 आरक्षको ने अलग-अलग समय पर किया बलात्कार

रीवा। अभी मनगवां थाना प्रभारी की पदस्थापना को लेकर विवाद थमा भी नहीं था कि शनिवार को पत्रकार वार्ता आयोजित कर रीवा अधिवक्ता संघ के जिला अध्यक्ष राजेंद्र पांडे ने पुलिस विभाग पर बड़ा आरोप लगा दिया है । जिसके बाद से पुलिस विभाग में हरकत होना शुरू हो गई है ।

उन्होंने पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि गत 9 मई को मनगवां थाने में हत्या के आरोप में गिरफ्तार हुई महिला के साथ तत्कालीन थाना प्रभारी मनगवां मृगेंद्र सिंह ,एसडीओपी मनगवां बीएस बरिबा एवं 3 पुलिस कर्मियों ने दुष्कर्म किया है । उन्होंने कहा कि इस सब घटनाक्रम के समय मौके पर महिला उपनिरीक्षक सुप्रिया जैन भी मौजूद थी । उन्होंने कहा कि इस संबंध में जिला एवं सत्र न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अरुण कुमार सिंह द्वारा पत्र लिखकर रीवा एसपी से अपराध पंजीबद्घ करने की बात कही गई है । उन्होंने कहा कि न्यायिक जांच के लिए पूरे मामले में महिला मजिस्ट्रेट कंचन चौकसे जवाबदारी सौंपी गई है । उन्होंने कहा कि जब रीवा जिले में ऐसे थाना प्रभारी एवं एसडीओपी सेवा देते रहेंगे तो लोगों को कैसे न्याय मिल पाएगा ।

ऐसे हुआ खुलासा

पत्रकारों से चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि गत दिवस रीवा न्यायालय के एडीजे विपिन कुमार लवानिया केंद्रीय जेल निरीक्षण करने पहुंचे थे । जहां पर उनसे उक्त पीडत महिला ने मुलाकात की महिला ने लिखित बयान में मजिस्ट्रेट को बताया कि उसे एक हत्या के आरोप में 9 मई को गिरफ्तार किया गया था जबकि न्यायालय में उसे 20 मई को पेश किया गया । उन्होंने कहा 10 दिन तक मुझे लाकप में रखकर मेरे साथ थानाप्रभारी ,एसडीओपी एवं 3 आरक्षको ने अलग-अलग समय पर बलात्कार किया । 

जिसका मैं विरोध करती रही लेकिन वह नहीं मानें हालांकि उस समय मंनगवा थाने में तैनात पूनम नाम की एक महिला आरक्षक ने इसका विरोध भी किया था । जिसे गाली देकर उसे मौके से भगा दिया गया था । उक्त महिला ने न्यायाधीश को बताया कि जब वह जेल पहुंची तो उसने पूरी घटनाक्रम की जानकारी महिला वार्डन को दी थी । बयान के बाद महिला वार्डन ने भी जानकारी देने की बात स्वीकार कर ली है। एक प्रश्न के जवाब में श्री पांडे ने बताया कि उक्त पत्र जिला एवं सत्र न्यायालय के डीजे के द्वारा 14 अक्टूबर 2020 को पुलिस अधीक्षक रीवा को लिखा गया है । साथ ही पूरे मामले की न्यायिक जांच के लिए कंचन चौकसे को नियुक्त किया है । वह नोटिस जारी करने की तैयारी में है । इस संबंध में पुलिस अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने अपना पक्ष रखने से साफ तौर पर मना कर दिया है ।


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