REWA : एक बार फिर GDC में हजारों की संख्या में छात्राएं रह गई वंचित, छात्राओं ने कहा- हमारी समस्या पर किसी का ध्यान नहीं



रीवा। कालेजों में प्रवेश पाने से एक बार फिर बड़ी संख्या में छात्राएं वंचित रह गई हैं। हजारों की संख्या में छात्राओं ने शहर के शासकीय कन्या महाविद्यालय में प्रवेश के लिए आवेदन किया था लेकिन सभी को प्रवेश नहीं मिल पाया है। स्नातक में प्रवेश का सीएलसी चरण भी पूरा हो गया, 27 अक्टूबर को प्रवेश पाने वाले छात्रों से शुल्क जमा कराने के लिए अंतिम अवसर दिया गया था। 

इसके साथ ही कालेज में प्रवेश लेने के लिए अंतिम अवसर भी समाप्त हो गया। सबसे अधिक रीवा जिले में छात्रों को समस्या हुई है, वह जहां पर प्रवेश चाह रही थी, वहां पर नहीं मिल पाया है। इस कारण मायूषी हाथ लगी है, कुछ ने तो प्राइवेट कालेजों में एडमिशन लिया है तो कइयों ने अब एक साल तक और इंतजार करने का मन बनाया है। बीते कई वर्षों से रीवा में एक और कन्या महाविद्यालय की मांग उठाई जा रही है, यह मांग इस साल भी पूरी नहीं हो पाई जिसकी वजह से सैकड़ों की संख्या में हर विभाग में छात्राएं प्रवेश पाने से वंचित रह गईं। शहर में एक और कन्या महाविद्यालय होता तो इन छात्राओं को प्रवेश दिया जा सकता था। अधिकांश अभिभावक अपनी लड़कियों का प्रवेश जीडीसी में ही कराना चाहते हैं। उनका कहना है कि टीआरएस सहित अन्य कालेजों का अब पढ़ाई जैसा माहौल नहीं होने की वजह से वह सुरक्षित कैम्पस चाहते हैं। इसके पहले भी हजारों की संख्या में छात्राएं प्रवेश से वंचित रह जाती थी, उसी तरह इस साल भी हुआ है।

सरकार की घोषणा पर प्रशासन नहीं किया अमल
पूर्व में कई बार स्थानीय विधायक एवं अन्य नेताओं द्वारा शहर में एक और कन्या महाविद्यालय की मांग को उचित बताते हुए आश्वासन दिया जाता रहा है। सरकार बदली तो कांग्रेस के स्थानीय नेताओं ने जोर दिया और तत्कालीन उच्च शिक्षा मंत्री ने मंच से घोषणा किया कि अगला प्रवेश नए जीडीसी में भी होगा। इसके लिए कलेक्टर से तत्काल प्रस्ताव भेजने के लिए कहा गया था। इसके बाद स्थानीय नेताओं ने भी प्रयास नहीं किया और कलेक्टर के स्तर पर भी कोई गंभीरता नहीं दिखाई गई। इसके कुछ समय बाद सरकार बदल गई, नई सरकार आई तो जिम्मेदारों को फोकस कुछ चिन्हित कार्यों तक ही सीमित रह गया। छात्राओं की इस बड़ी समस्या पर किसी ने ध्यान नहीं दिया।

जनता कालेज को जीडीसी बनाने की योजना भी फेल
उच्च शिक्षा के अधिकारियों की ओर से पूर्व में एक प्रस्ताव यह भी दिया गया था कि अनुदान प्राप्त जनता कालेज को ही शासकीय कन्या महाविद्यालय के रूप में अपग्रेड कर दिया जाए, जिससे छात्राओं को कालेज में प्रवेश की समस्या नहीं रहे। इस योजना पर भी कोई सहमति नहीं बन पाई है। राजनीतिक रूप से इसके लिए प्रयास नहीं किए जाने की वजह से यह समस्या सामने आई है। वहीं एक मांग मऊगंज में भी कन्या महाविद्यालय की उठी थी, इससे उस क्षेत्र की छात्राओं को राहत मिल सकती थी।

छात्राओं ने कहा, हमारी समस्या पर किसी का ध्यान नहीं
प्रवेश से वंचित रह गई कई छात्राओं ने व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा है कि उनकी समस्या पर किसी का ध्यान नहीं है। अब पूरे एक वर्ष तक वह पढ़ाई से दूर रहेंगी। खजुहा गांव के पास से आई ऋचा द्विवेदी ने कहा कि वह केवल जीडीसी में ही प्रवेश चाहती थी, करीब दो महीने तक इंतजार किया फिर भी नाम नहीं आया। यह सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह छात्राओं को प्रवेश दिलवाए। सीधी से आई काजल सिंह और गीता पटेल कहती हैं कि बड़ी मुश्किल से परिवार के लोग रीवा में पढ़ाने के लिए तैयार हुए लेकिन यहां तो प्रवेश ही नहीं मिला। प्रतिमा तिवारी ने कहा कि कालेज की ओर से आश्वासन मिला था कि बढ़ी सीटों के बाद प्रवेश हो जाएगा लेकिन अब तक नहीं मिल पाया है। 

स्नातक में प्रवेश की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, अधिकांश विभागों की सीटें बढ़ाए जाने के बाद भी सभी फुल हो गईं और कई छात्राओं को प्रवेश नहीं मिल पाया है। फिलहाल यह बता पाना मुश्किल होगा कि कितनी संख्या में छात्राओं को प्रवेश नहीं मिला है, हमारे पास उनका आंकड़ा होता है जिन्हें प्रवेश दिया जाता है।

डॉ. नीता सिंह, प्राचार्य शासकीय कन्या महाविद्यालय रीवा

रीवा में एक और जीडीसी की मांग उठी थी, जिस पर तत्कालीन उच्च शिक्षा मंत्री ने भूमि की व्यवस्था के लिए कलेक्टर को निर्देशित किया था। हमारी ओर से एक सुझाव यह भी दिया गया था कि जनता कालेज को ही जीडीसी में अपग्रेड कर दिया जाए। यह सही है कि बड़ी संख्या में छात्राओं को प्रवेश नहीं मिल पाया है।

डॉ. पंकज श्रीवास्तव अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा

मांग के अनुरूप विकास चाहिए
रीवा में बीते कुछ वर्षों से विकास के कई कार्य तेजी के साथ हुए हैं, इसकी ब्रांडिंग भी सरकार कर रही है। इसके साथ ही कई ऐसी जरूरतें हैं, जिन्हें अब तक पूरा नहीं किया जा सका है। इसमें प्रमुख मांग शहर में एक और कन्या महाविद्यालय की है। हर साल प्रवेश के दिनों में यह मांग तेजी से उठती है, नेताओं के आश्वासन भी मिलते हैं लेकिन बाद में सब भूल जाते हैं। रीवा में 60 के दशक में सभी प्रमुख उच्च शिक्षा संस्थानों की स्थापना हुई थी। इसके बाद से शिक्षा को नजरंदाज किया जाता रहा। लंबे अंतराल के बाद मंत्री रमाकांत तिवारी(अब दिवंगत) ने वेटरनरी कालेज की सौगात दिलवाई। तब से अब तक अन्य संस्थानों की मांग उठ रही है, इसी में कन्या महाविद्यालय भी शामिल है। आवश्यकता इस बात की है कि शहर का विकास जो भी वह जनता की मांग के अनुरूप होना चाहिए। सड़कें बनकर तैयार होती हैं फिर दूसरा प्रोजेक्ट शुरू हो जाता है, इसलिए शिक्षण व्यवस्था पर भी गंभीरता की आवश्यकता है।
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