पत्नियों की इच्छा पहले कॅरियर फिर संतान, पतियों को नहीं आ रहा रास


भोपाल । पत्नियों में कॅरियर के प्रति लगाव उनके पतियों को इतना नागवार गुजरा कि मामला कुटुंब न्यायालय तक पहुंच गया। अभी हाल ही में कुटुंब न्यायालय में तीन ऐसे मामले आए हैं, जिसमें शादी के बाद महिलाएं अपनी पढ़ाई और कॅरियर के कारण परिवार को आगे बढ़ाना नहीं चाहती हैं। वहीं उनके पति और घर वाले उन पर दबाव डाल रहे हैं। ऐसे मामलों में अलगाव जैसी स्थिति बन रही है। हालांकि काउंसिलिंग के बाद मामले सुलझ भी रहे हैं। कुटुंब न्यायालय की काउंसलर का मानना है कि आजकल महिलाएं कॅरियर को प्राथमिकता दे रही हैं।

करीब 15 फीसद ऐसे मामले आ रहे हैं

काउंसलर का मानना है कि आजकल 10 से 15 फीसद ऐसे मामले आ रहे हैं, जिनमें कॅरियर के प्रति लगाव के कारण दंपती के बीच बिखराव की स्थिति बन रही है। अब महिलाएं भी अपने कॅरियर के प्रति सजग होने लगी हैं। उन्हें ऐसा लगता है कि पहले अपना कॅरियर बना लें, फिर परिवार को आगे बढ़ाएं।

केस 1 : शिक्षा विभाग में कार्यरत अधिकारी पति ने रूठकर मायके गई पत्नी को वापस बुलाने का केस लगाया है। मामले में पति को पत्नी के जागरूक होने से समस्या है। शादी के तीन साल हुए हैं और अब तक उनका कोई बच्चा नहीं है। पीएचडी कर रही पत्नी ने पति से कॅरियर बनाने के लिए समय मांगा तो विवाद शुरू हो गया। पति ने कहा कि वह बुंदेलखंड क्षेत्र के एक गांव से है, जबकि पत्नी का मायका देवास का है। इस लिहाज से उसे लगा था कि वह घर-परिवार के बारे में ज्यादा सोचेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। दोनों की काउंसिलिंग की जा रही है।

केस-2 : इंजीनियर दंपती के बीच भी परिवार को आगे बढ़ाने को लेकर अनबन हो गई। पति ने इंजीनियरिंग करने के बाद स्टार्टअप शुरू किया है, जबकि पत्नी एक कंपनी में नौकरी के साथ-साथ यूपीएससी की तैयारी भी कर रही है। शादी के चार साल हो गए हैं, लेकिन पत्नी के कॅरियर के प्रति लगाव से पति परेशान हो गया। मामले में दोनों की काउंसिलिंग कर समझौता कराया गया।

केस-3 : निजी बैंक में ब्रांच मैनेजर के पद पर कार्यरत पत्नी ने शिकायत की है कि सास उसे मां बनने के लिए दबाव डालती है। इस कारण पति से विवाद हो गया। पत्नी का कहना है कि शादी को दो साल हुए हैं और उसे प्रमोशन मिलने वाला है, जिस कारण वह अभी मां बनना नहीं चाहती है। दोनों की काउंसिलिंग की जा रही है।

ऐसे मामलों में दंपती को समझाने का प्रयास किया जाता है। दोनों एक-दूसरे के साथ रहना चाहते हैं, लेकिन महिलाएं अपने कॅरियर से समझौता नहीं करना चाहती हैं। कई मामलों में समझौता कराया गया है। - शैल अवस्थी, काउंसलर, कुटुंब न्यायालय

पहले के समय में महिलाओं की पहली प्राथमिकता परिवार और घर होता था। अब महिलाएं कॅरियर के बारे में ज्यादा सोच रही हैं। खुद को आत्मनिर्भर और अपनी अलग पहचान बनाना चाह रही हैं। - प्रो. रमा सिंह, समाजशास्त्री

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