SATNA : नसबंदी कराने आई 21 महिलाओं को लगाया इंजेक्शन, 10 का किया ऑपरेशन, फिर खड़े कर दिए हाथ : ये कैसा सिस्टम ?



सतना. मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली की एक और तस्वीर सामने आई है। तस्वीर भी ऐसी है जिसे देखकर आप भी कहेंगे कि इनका भगवान ही मालिक है। मामला सतना जिले के रामपुर बघेलान का है जहां स्वास्थ्य केन्द्र में नसबंदी कराने आई महिलाओं के साथ कुछ ऐसा हुआ कि हर कोई हैरान रह गया। नसबंदी से पहले उन्हें बेहोशी का इंजेक्शन लगाया गया लेकिन ऑपरेशन के बिना ही उन्हें घर ले जाने के लिए परिजन को सौंप दिया गया।

अस्पताल में बेहोश पड़ी रहीं महिलाएं
घटना बुधवार की है जब 21 महिलाएं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में नसबंदी का ऑपरेशन कराने के लिए पहुंची थीं। स्वास्थ्य केन्द्र के डॉक्टर्स ने उन्हें बेहोशी का इंजेक्शन भी लगा दिया। लेकिन 21 में से महज 10 महिलाओं का ऑपरेशन करने के बाद ही डॉक्टर्स ने अपने हाथ खड़े कर दिए। जिसका नतीजा ये हुआ कि बेहोश महिलाएं अस्पताल के फर्श पर इधर उधर तो कहीं दीवार से टिककर घंटों तक पड़ी रहीं। किसी ने भी उनकी सुध नहीं ली हैरानी की बात ये भी है कि बेहोश महिलाओं की सुध लेने की जगह स्वास्थ्य केन्द्र के स्टाफ ने उनके परिजन को उन्हें घर ले जाने की सलाह दे डाली। अब ये बड़ी मुश्किल थी कि एक तो न ही ऑपरेशन हुआ था और न ही महिलाएं होश में थीं तो भला परिजन उन्हें घर कैसे ले जाते? सवाल किए तो जवाब तो नहीं मिला उल्टे धुतकार जरुर दिए गए।

बेहोश महिलाओं को छोड़कर चलते बने डॉक्टर्स 
बेहोश महिलाओं के परिजन ने बताया कि नसबंदी किए बगैर ही डॉक्टर्स महिलाओं को बेहोशी की हालत में ही घर ले जाने की बात कहकर चले गए। परिजन ने सवाल भी पूछा कि डॉक्टर साहब होश कब आएगा तो जवाब नहीं दिया बस इतना ही कहा कि आप घर ले जाएं। किसी तरह परिजन महिलाओं को बेहोशी की हालत में ही अपने साथ घर ले गए। बता दें कि नसबंदी के लिए सरकार और प्रशासन जागरुकता अभियान चलाती है और लोगों को इसके लिए जागरुक करने के लिए लाखों रुपए खर्च होते हैं ऐसे में स्वास्थ्य केन्द्र में बरती गई ये लापरवाही काफी गंभीर है।

बड़े सवाल
आखिरकार बेहोशी की हालत में ही अस्पताल से महिलाओं को घर ले जाने के लिए क्यों कहा गया ?
डॉक्टर्स ने महिलाओं के होश में आने का इंतजार क्यों नहीं किया ?
जिन महिलाओं का ऑपरेशन नहीं होना था उन्हें बेहोशी का इंजेक्शन क्यों लगाया गया ? 
बेहोश महिलाओं को अस्पताल में बिस्तर उपलब्ध क्यों नहीं कराए गए ?
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