शादी समारोह में नजर नहीं आएगी बंदूक, नगरीय निकाय चुनाव के बाद मिलेंगे लाइसेंसी हथियार

उपचुनाव में जमा हुए लाइसेंसी हथियार अब नगरीय निकाय चुनाव के बाद मिल सकेंगे। इस बात के संकेत जिला प्रशासन व पुलिस अधिकारियों ने दिए हैं। संभावना है नगर- निगम के चुनाव जनवरी के अंत में हो सकते हैं। नगरीय निकाय चुनावों की तैयारियां शुरू हो गईं हैं। 17 नवंबर को वार्डों का आरक्षण की प्रक्रिया होनी है। लाइसेंसधारियों भी हथियार जमा कराने की परेशानी से बचने के लिए अभी हथियार वापस नहीं मांग रहे हैं।

जिले की तीन विधानसभा में हुए चुनाव में कलेक्टर ने लगभग चुनाव से पहले एक आदेश जारी कर जिले के सभी हथियारों के लाइसेंस अस्थाई रूप से निलंबित कर दिए थे। कलेक्टर ने लाइसेंसधारियों को हथियार चुनाव से पहले थाने में जमा कराने के निर्देश दिए थे। रिटायर्ड सेना के जवान, पुलिस के अधिकारी व जवान, बैंकों के सुरक्षा गार्ड के अलावा विशेष परिस्थतियों में डेढ़ हजार से अधिक लाइसेंसधारियों को हथियार जमा नहीं करने की छूट मिली थी। शेष हथियार जिला प्रशासन व पुलिस ने थानों में जमा करा लिए थे।

अब नगर निगम चुनाव के बाद मिलेंगें हथियार

जिला प्रशासन व पुलिस अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि अभी लाइसेंसी हथियारों की वापस नहीं किए जाएंगें। क्योंकि नगरीय निकाय चुनावों की प्रक्रिया शुरू हो गई है। अगर लाइसेंसी हथियार अभी वापस किए जाते हैं तो निगम चुनाव की घोषणा के बाद फिर से हथियार जमा कराने की प्रक्रिया करनी पड़ेगी। इसलिए अभी विधानसभा चुनाव केतत्काल बाद हथियार वापस नहीं किए जा रहे हैं। नगर निगम चुनावों के घोषणा का इंतजार किया जा रहा है। अगर चुनाव आयोग से नगरीय निकाय चुनाव जनवरी-फरवरी में कराए जाने के संकेत मिलते हैं तो फिर लाइसेंसी हथियार नगरीय चुनाव के बाद ही वापस किए जाएंगें। जिले में 30 हजार के लगभग लाइसेंसी हथियार हैं।

अंचल के विवाह समारोह में अब कंघों पर बंदूक नजर नहीं आएगी

नौ दिन बाद से सहलग शुरू हो रहे हैं। ग्वालियर-चंबल अंचल में कंधों पर बंदूक टांगकर जाना प्रचलन में हैं। कंधे पर बंदूक होना सामाजिक प्रतिष्ठना से भी जुड़ा हुआ है। शादी-समारोह में लाइसेंसी हथियारों से हर्ष फायर की शिकायतें भी काफी आतीं हैं। हर साल हर्ष फायर में चार से पांच लोगों की जाने जातीं हैं। लेकिन उपचुनाव के बाद नगरीय निकाय चुनाव

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