REWA : खुदाई करते युवक को मिली 17वी शताब्दी की मूर्तियां देखकर उड़ गए होश

रीवा। शहर के सिटी कोतवाली थाना अंतर्गत रानी तालाब स्थित अशोक नगर में नए भवन के निर्माण के लिए भूमि स्वामी सोमनाथ साहू द्वारा नीव की खुदाई मजदूरों की मदद से की जा रही थी। तकरीबन 7 फीट खुदाई के बाद मजदूरों के हाथ अष्टधातु की 2 प्रतिमाएं लग गई । इसकी सूचना आनन-फानन में पुलिस को दी गई । सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों प्रतिमाओं को जप्त कर यह पता लगाने में जुट गई है कि आखिर उक्त प्रतिमा किस शताब्दी की है। इसके लिए एसपी रीवा के निर्देश पर पुरातत्व विभाग को पत्र लिखकर यह जानकारी मांगी गई है, उक्त प्रतिमाएं किस शताब्दी की है साथ ही इनका पौराणिक महत्व क्या है।

17वी शताब्दी की मूर्तियां

पुरातत्व जबलपुर के उपसंचालक पीसी महोबिया ने जानकारी देते हुए बताया कि अभी उन्होंने मूर्तियों को नजदीक से नहीं देखा है । उनके पास जो फोटो मीडिया द्वारा उपलब्ध कराई गई है। उसे देखकर यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि 17 वी शताब्दी के आसपास की प्रतिमा है, हालांकि प्रतिमा देख कर ही सही अनुमान लगाया जा सकेगा।

छठवीं शताब्दी से बनने लगी थी प्रतिमा

इतिहास विंद रामनरेश पांडे की माने तो छठवीं शताब्दी यानी कुषाण काल में अष्टधातु की प्रतिमा बननी शुरू हो गई थी । उस समय जिन प्रतिमाओं का निर्माण किया जाता था उसमें सर्वाधिक स्वर्ण धातु का प्रयोग किया जाता था साथ ही अन्य धातुओं की मात्रा बेहद कम होती थी । जिसके कारण मूर्तियों की कीमत बहुत ज्यादा हुआ करती थी ,लेकिन बदलते दौर के साथ अष्टधातु की प्रतिमा का निर्माण 19वीं शताब्दी तक होता रहा जिसके कारण अष्टधातु की प्रतिमा में सर्वाधिक लौह तत्व की अधिकता होती थी ।

15 किलो की प्रतिमा

जानकारी देते हुए सिटी कोतवाली थाना प्रभारी आदित्य प्रताप सिंह ने बताया कि बड़ी प्रतिमा का वजन तकरीबन 15 किलो है । जबकि छोटी प्रतिमा का वजन 8 से 10 किलो बताया जा रहा है । उक्त प्रतिमा को जप्त कर पुरातत्व विभाग को पत्र लिखकर यह पता लगाया जा रहा है कि यह कितनी पुरानी है।

अष्टधातु की प्रतिमा होने की सूचना मिली थी । पुरातत्व विभाग को पत्र लिखा जा चुका है। पुरातत्व विभाग जांच करके यह बताएगा कि यह किस शताब्दी की प्रतिमा है । उक्त प्रतिमाओं को सुरक्षित रखा गया है ।

राकेश कुमार सिंह, एसपी रीवा

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