MP : दीवाली के बाद शादियों का सीजन शुरू, बनी रहेगी सोने की चमक

इंदौर। कोविड-19 महामारी के कारण जब भारत समेत पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को तगड़ा झटका लगा तो सोने की चमक बढ़ गई। निवेश का सबसे सुरक्षित साधन होने की वजह से चुनौतियों और अनिश्चितता से भरे माहौल में दुनियाभर के लोगों ने सोने में खूब पैसा लगाया। अब धनतेरस और दीवाली के मौके पर भारत में सोने को अतिरिक्त सपोर्ट मिल रहा है।

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हालात बदलने लगे हैं। वैश्विक अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे पटरी पर आने के संकेत हैं। इस बीच कोविड वैक्सीन जल्द आने की उम्मीद जताई जा रही है, जो अर्थव्यवस्था, सरकारें और आम लोगों के लिए बड़ी राहत की बात है। शेयर बाजार के संकेत भी आए दिन लागतार रिकॉर्ड ऊंचे स्तर पर पहुंच रहे हैं। बुधवार तक सेंसेक्स और निफ्टी में लगातार आठवें दिन तेजी दर्ज की गई। हालांकि गुरुवार को इनमें हल्का करेक्शन (अत्यधिक तेजी के बाद स्वाभाविक गिरावट) आया। ऐसे हालात सोने के अच्छे नहीं माने जाते। जाहिर है, धनतेरस के मौके पर लोगों के जेहन में सवाल उठ रहे होंगे कि निवेश के लिए सोना खरीदना सही फैसला होगा या गलत।

अब तक अच्छा रहा साल

सोने के पक्ष में सबसे बड़ी बात यह है कि पिछले साल की दीवाली से अब तक सोने की कीमतों में करीब 32 प्रतिशत की तेजी आई है। दूसरी तरफ शेयर बाजार भी रिकॉर्ड ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। ऐसा कम ही होता है, जब सोना और शेयर बाजार में एक साथ तेजी का रुझान हो। आम तौर पर ये दोनों एसेट क्लास एक-दूसरे के विपरीत रुझान दिखाते हैं। चूंकि कोविड-19 के चलते पैदा हुई चुनौतियों की वजह से कुछ गिनी-चुनी कंपनियों को छोड़कर कॉरपोरेट की आय मोटे तौर पर बहुत अच्छी नहीं रही है, लिहाजा माना जा रहा है कि शेयरों की कीमत जरूरत से ज्यादा बढ़ गई है। इसके चलते इस बात की आशंका बढ़ गई है कि एक भी नकारात्मक खबर सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी गिरावट ला सकती है। इसके चलते सोने को सपोर्ट बना हुआ है।

सेंट्रल बैंकों का सपोर्ट

भारतीय रिजर्व बैंक समेत दुनियाभर के केंद्रीय बैंक बाजार में नकदी बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। इसके लिए ब्याज दरें घटाई जा रही हैं और बाजार में करीब 13 लाख करोड़ डॉलर का कैश डाला है। इसके अलावा तमाम बड़े देशों की सरकारें राहत पैकेज की घोषणाएं कर रही हैं। भारत में भी लगातार ऐसी घोषणा की जा रही हैं। ऐसे में सोने की चमक फीकी पड़ने की आशंका कम है। हो सकता कि दीवाली के बाद कुछ गिरावट आए, लेकिन यह स्थायी नहीं होगा। कारण यह है कि यूरोप में कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर शुरू हो गई है और अमेरिका में अब रोजाना दो लाख तक संक्रमण के नए मामले सामने आने लगे हैं। इससे डॉलर और यूरो में कमजोरी आएगी, जिसका सीधा फायदा सोने को होगा। डॉलर कमजोर होने पर सोना महंगा हो जाता है।

कुछ समय के लिए असर डाल सकती है वैक्सीन

रिलायंस सिक्योरिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक श्रीराम अय्यर के मुताबिक कोविड-19 वैक्सीन उपलब्ध होना शेयर जैसे ज्यादा जोखिम वाले एसेट्स के लिए सकारात्मक है, लेकिन सोने के लिए यह नकारात्मक संकेत होता है। फिर भी वैक्सीन आने और आम लोगों तक पहुंचने में काफी समय लगेगा। वैक्सीन आने के बाद सोने पर इसका असर भी ज्यादा समय तक नहीं दिखेगा। सोने में तेजी फिर लौटेगी। इसलिए जो लोग लंबी अवधि के नजरिये से सोने में पैसा लगाएंगे, उन्हें इसकी चिंता करने की जरूरत नहीं है। ध्यान रखें अमेरिकी चुनाव में डेमोके्रट्स की जीत से वहां बड़े आर्थिक राहत पैकेज की संभावना है, जिससे सोने को सपोर्ट मिलेगा।

सरकारी खर्च बढ़ने का दिखेगा असर

क्वांटम एसेट मैनेजमेंट कंपनी के वरिष्ठ फंड मैनेजर चिराग मेहता का कहना है कि कोरोना वायरस का असर लंबे समय तक रहेगा। पूरी दुनिया आर्थिक मंदी के मुहाने पर खड़ी है। सरकारों के खर्च, कर्ज और वित्तीय घाटे बढ़ रहे हैं। महंगाई भी बढ़ने की आशंका है। ऐसे माहौल में सोने की कीमत घटने की आशंका कम है। इस बात के पूरे आसार हैं कि सोना लंबे समय तक सुरक्षित निवेश बना रहेगा। सोने के पक्ष में एक और बात यह जाती है कि लॉकडाउन के दौरान देश में बहुत सारी शादियां टाल दी गई थीं। दीवाली के बाद शादियों का सीजन शुरू होगा। मेहता के मुताबिक देश में हर साल एक करोड़ से अधिक शादियां होती हैं। जाहिर है, ऐसे में सोने की मांग बढ़ेगी।

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