MP : रीवा जिले का एक ऐसा शिक्षक, जो शिक्षा विभाग को कर रहा कलंकित, कारनामे सुन उड़ जाएंगे आपके होश : पढ़िए



  • शिक्षक सुरेश द्विवेदी का एक और कारनामा आया सामने,संजय गांधी अस्पताल प्रबंधन को गुमराह कर पार्किंग का लिया ठेका

  • शिक्षक होकर करता है ठेकेदारी,शिक्षा विभाग को धोखा देकर ले रहा तनख्वाह,पत्रकारों को मुकदमा दर्ज कराने की देता है धमकी

रीवा। जिले के शिक्षा विभाग में पदस्थ शिक्षक सुरेश द्विवेदी का एक और कारनामा सामने आया है,सूत्रों के अनुसार नगर निगम ने साईं मंदिर के पास स्थित पार्किंग का टेंडर  निकाला था जिसमें सुरेश द्विवेदी ने अपनी पत्नी सावित्री द्विवेदी प्रोपराइटर महामृत्युंजय ग्रुप के नाम से टेंडर डाला और दो माह पूर्व जब नगर निगम ने निविदा खोली तो न्यूनतम दर महामृत्युंजय ग्रुप की निकली,निगम प्रशासन ने अनुबंध करने के लिए जब इन्हें पत्र लिखा तो इन्होंने बकायदा शपथ पत्र देकर यह बताया कि उनकी पत्नी जो कि महामृत्युंजय ग्रुप की मालकिन है वो मानसिक रूप से अस्वस्थ है इसलिए निविदा को निरस्त कर दिया जाय।अब इनके द्वारा संजय गांधी अस्पताल की पार्किंग का ठेका ले लिया गया है तो अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर इन्होंने संजय गांधी अस्पताल का ठेका कैसे ले लिया जब इनकी पत्नी मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं।विश्वस्त सूत्रों की मानें तो अस्पताल प्रबंधन के बाबुओं से सांठगांठ कर इन्होंने ठेका लिया है बताया जाता है कि सांई मंदिर पार्किंग के ठेके में इन्हें नुकसान था इसलिए इन्होंने नगर निगम की निविदा निरस्त कराकर संजय गांधी अस्पताल के पार्किंग का ठेका ले लिया किन्तु अब इनके द्वारा नगर निगम में निविदा निरस्त कराए जाने के लिए दिए गए कारण से संजय गांधी अस्पताल के ठेके में सवाल खड़े होने लगे हैं।

शिक्षक के पेशे को कर रहे कलंकित

शिक्षा विभाग को धोखे में रखकर लाखों रुपये की तनख्वाह लेने वाले यह महाशय करने को तो कई कार्य करते हैं केवल पढ़ाने को छोड़कर।ठेकेदारी इनका मूल व्यवसाय है और प्रॉपर्टी की खरीदी बेंची भी यह करते हैं।यह जिस प्राथमिक स्कूल में पढ़ाते हैं वहां तो ये कभी जाते तक नहीं हैं और उस स्कूल का नाम तक शायद ही इन्हें पता हो,ये अपने रिश्तेदार अपने परिवार एवं अपने मित्रों के माध्यम से पूरे कार्य करते हैं और अपने मूल काम को कभी नहीं करते।जब कोई इनके बारे में खबर लिखे तो उसे ये मानहानि और प्रकरण पंजीबद्ध कराने की धमकी देते हैं कहते हैं कि मुझे नौकरी से कोई मतलब है ऐसी नौकरी को मैं अपने जेब मे रखता हूँ।

यदि मानसिक रूप से हैं अस्वस्थ तो कैसे हैं जनपद सदस्य

यदि सूत्रों की माने तो नगर निगम की निविदा निरस्त कराने के लिए जो इन्होंने कारण बताए हैं कि इनकी पत्नी मानसिक तौर पर अस्वस्थ हैं तो फिर एक मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति जनपद सदस्य कैसे है,खैर इनकी पत्नी का कार्यकाल तो खत्म ही होने वाला है लेकिन इनके द्वारा आगे भी चुनाव लड़ने की तैयारी की जा रही है। 
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