बड़ी कामयाबी : वायुसेना ने आसमान में 'आकाश' से 10 बार मार गिराए दुश्मन के लड़ाकू विमान


चीन के साथ चल रहे तनाव के बीच भारतीय वायुसेना ने लगातार अपनी ताकत में इजाफा कर दुश्मनों पर अपनी पकड़ मजबूत किए हुए है। भारतीय वायुसेना ने 10 आकाश मिसाइलों का सफल परीक्षण किया है। आकाश एक मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल रक्षा प्रणाली है, जिसे रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन द्वारा विकसित किया गया है। इसके साथ ही भारत डायनेमिक्स लिमिटेड और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड द्वारा इन मिसाइल को निर्मित किया गया है।

वायुसेना अधिकारियों ने बताया कि भारतीय वायु सेना ने अभ्यास के दौरान आकाश मिसाइलों और कंधे से हवा में मार करने वाली मिसाइलों का सफल परीक्षण किया। इन मिसाइलों का परीक्षण आंध्र प्रदेश के सूर्यलंका परीक्षण रेंज में पिछले सप्ताह किया गया। लक्ष्य पर दागी गई अधिकांश आकाश मिसाइलों ने सीधा प्रहार किया। लड़ाई के दौरान दुश्मन के विमानों को मार गिराने के लिए ये मिसाइलें संयुक्त गाइडेड हथियारों से लैस हैं। 

एलएसी पर तैनात की 'आकाश' 

खास बात यह है कि इन दोनों प्रणालियों को वर्तमान में पूर्वी लद्दाख और अन्य क्षेत्रों में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी ) के साथ तैनात किया गया है ताकि दुश्मन के किसी भी विमान को भारतीय वायु अंतरिक्ष का उल्लंघन करने के लिए बाहर निकाला जा सके।

स्वदेशी हथियार प्रणालियों में से एक है यह मिसाइल

आकाश मिसाइल को लेकर भारतीय वायु सेना से जुड़े एक अधिकारी ने कहा कि आकाश सबसे सफल स्वदेशी हथियार प्रणालियों में से एक है और यह रक्षा बलों की स्वदेशी हथियारों से युद्ध करने की इच्छा को पूरा करेगा। आकाश मिसाइल को हाल ही में अपग्रेड किया गया है और जो इसे पहले की तुलना में अधिक आसानी के साथ लक्ष्य को मार गिराने में मदद करेगा।

डीआरडीओ ने विकसित की है आकाश मिसाइल

परमाणु हथियार ले जाने की क्षमता रखने वाले आकाश मिसाइल सिस्टम को भारतीय रक्षा अनुसंधान व विकास संगठन (डीआरडीओ) ने डिजाइन किया है। इसकी हर एक मिसाइल 30 किलोमीटर के दायरे में 19 किलोमीटर की ऊंचाई तक लक्ष्य को भेद सकती है। करीब 4 हजार किमी/घंटा की सुपरसोनिक गति वाली आकाश मिसाइल का वजन 720 किलोग्राम और लंबाई 5.8 मीटर है। यह 60 किलोग्राम विस्फोटक ले जा सकती है।

स्वदेश निर्मित राजेंद्र रडार से लैस

इसे स्वदेश निर्मित राजेंद्र रडार से लैस किया गया है। एक मिसाइल डिफेंस सिस्टम में चार लांचर, एक राजेंद्र रडार होते हैं और हर लांचर पर तीन आकाश मिसाइल तैनात की जाती हैं। एक लांचर एक समय में 16 लक्ष्य को ट्रैक कर सकता है यानी 64 लक्ष्यों पर हर समय नजर रहती है और राजेंद्र रडार के एक इशारे पर एक साथ 12 आकाश मिसाइल अलग-अलग लक्ष्य भेदने निकल जाती हैं।

बता दें कि डीआरडीओ आकाश प्राइम मिसाइल प्रणाली पर भी काम कर रहा है, जो इसे बहुत अधिक ऊंचाई वाले स्थानों पर भी लक्ष्य हासिल करने में सक्षम बनाएगी।
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