REWA : जिले में बड़े पैमाने पर 3500 से अधिक स्व सहायता समूह की महिलाएं तैयार कर रहीं अगरबत्ती : हर साल सात से आठ लाख रुपए की इनकम


रीवा. जिले में राष्ट्रीय ग्रामीण अजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत स्व सहायता समूह की महिलाओं को आत्म निर्भर बनाने के लिए बेहतर पहल की गई है। समूह की महिलाएं बांस बर्तन, अगरबत्ती निर्माण सहित रोजमर्रा में उपयोग होने वाले घरेलू उत्पाद तैयार कर रहीं हैं। कोरोना काल में भी समूह की महिलाएं फिनायल, सेनेटाइजर, मास्क तैयार कर गांव-गांव सप्लाई किए। और अब आत्म निर्भर बनने के लिए समूह की महिलाओं ने बड़े पैमाने पर अगरबत्ती बनाने का काम शुरू किया है। 

हर साल 50 टन से अधिक हो रहा उत्पादन 
अजीविका मिशन की पहल पर जिले में समूह की महिलाएं आत्म निर्भर भारत की ओर एक कदम आगे बढ़ रही हैं। जिले में समूह की 3500 से अधिक महिलाएं अगर बत्ती तैयार कर भोपाल, जबलुपर, सागर समेत दिल्ली और उत्तर प्रदेश में में सप्लाई कर रही हैं। जोरी की शिवकुमारी हर साल 50 टन से अधिक अगरबत्ती तैयार कर रही है। शिवकुमारी के मुताबिक प्रति टन औसत 60 से 65 हजार रुपए की बिकती है। अगरबत्ती से औसत हर साल सात से आठ लाख रुपए की इनकम कर रही है। इतना ही नहीं शिवकुमार जोरी में अगरबत्ती तैयार करने के लिए 26 महिलाओं को रोजगार दिया है। 16 महिलाएं अगर बत्ती तैयार कर रही हैं। 6 महिलाएं पैकिंग में जुटी हैं। दो इलेक्ट्रनिक मशीन से अगरबत्ती तैयार कर रही हैं।
 
सात दिनी खजुराहो महोत्व में लगाया स्टाल 
प्रदेश के छतरपुर जिले के खजुराहो में सात दिवसीय माहोत्सव चल रहा है। खजुराहो शिल्प बाजार में अजीविका मिशन की ओर से मोगरा और गुलाब अगरबत्ती का स्टाल लगाया गया है। स्टाल का लीड शिवकुमारी कर रही है। समूह की महिलाओं के द्वारा तैयार की गई अगरबत्ती की खुशबू न केवल खजुराहो महोत्सव में फैल रही है बल्कि महोत्सव में पहुंचने वाले आस-पास जिले सहित विभिन्न राज्यों व विदेश से आए सैलानी भी अगरबस्ती की सुगंध ले रहे हैं। शिवकुमारी के अनुसार महोत्सव में कई सिनेमा के कलाकार भी आए। खजुराहो महोत्सव 17 दिसंबर से लेकर 23 दिसंबर तक चलेगा।

वर्जन.
समूह की महिलाएं अगरबत्ती सहित कई अन्य घरेलू उपयोग के उत्पाद तैयार कर रही हैं। प्रदेश के भोपाल, सागर सहित अन्य जगहों पर उत्पाद की ब्रांडिग के लिए महोत्सव में भेजा जा रहा है। खजुराहो के सात दिवसीय महोत्सव में अगरबस्ती का स्टाल लगाया गया है। कई समूह की महिलाएं स्वयं के उत्पाद में कई महिलाओं को रोजगार भी दे रहीं हैं। 

जितेन्द्र सिंह सहायक जिला प्रबंधक, अजीविका मिशन

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