MP : शरीर को स्वस्थ रखने के लिए जरुरी है प्राणायाम : योग विशेषज्ञ रिचा नांदेचा

इंदौर । शरीर को स्वस्थ रखने के लिए योग में प्राणायाम का बहुत महत्व है। प्राणायाम में अनुलोम विलोम बहुत कारगर है। इस आसन की सबसे खास बात यह है कि इसे किसी भी उम्र का व्यक्ति कर सकता है। यही नहीं अनुलोम विलोम मौसम के अनुरूप बदलकर भी किया जा सकता है। 

इस प्राणायाम से शरीर में ऊष्णता भी बढ़ाई जा सकती है और शीतलता भी। अनुलोम विलोम को यदि सामान्य दिनों में करना है तो इसे बायीं नासिका से आरंभ करना चाहिए। यदि शीत ऋतु में इसे किया जा रहा है या फिर जिन्हें सर्दी, खांसी, कफ की समस्या रहती है वे इस दाहिनी नासिका से करें।

योग विशेषज्ञ रिचा नांदेचा ने बताया कि इसे करने के लिए पद्मासन या सुखासन में बैठ जाएं। शीत के प्रकोप से बचने के लिए दायीं नासिका से सांस लें और बायीं नासिका से छोड़ें फिर बायीं नासिका से लेकर दाहिनी नासिका से सांस छोड़े। इसी क्रम को पांच से दस बार दोहराएं, जबकि सामान्य दिनों में बायीं नासिका से सांस लेकर दाहिनी नासिका से छोड़ना और दाहिनी नासिका से सांस लेकर बायीं नासिका से सांस को छोड़ा जाता है। हमारे शरीर की दाहिनी नाड़ी सूर्य और बायीं नाड़ी चंद्रमा की प्रतीक है। 

इस प्राणायाम में सबसे ज्यादा ध्यान रखने वाली बात यह है कि जिस नासिका से सांस ली जाती है विराम के वक्त उसी नासिका से सांस छोड़ी भी जाती है। यह प्राणायाम माइग्रेन की समस्या को भी दूर करता है और फेफड़ों और मस्तिष्क के लिए भी बेहतर है। शुरुआती दौर में इसके पांच से 10 चक्र किए जाने चाहिए। बाद में साधक चक्र बढ़ा सकता है। यह हमें सही ढंग से सांस लेना व उसपर नियंत्रण रखना सिखाता है।

Powered by Blogger.