कोरोना मास्क को बार-बार हाथ से छूने पर बढ़ सकता है संक्रमण का खतरा

जबलपुर। कोरोना के संक्रमण से बचाव के लिए मास्क लगाना और सैनिटाइजेशन करना अब आम जनजीवन का हिस्सा बन गया है। यदि सुरक्षित रहना और स्वस्थ रहना है तो जितना आवश्यक सांस लेना है उतना ही जरूरी मास्क लगाना भी है। अपने बचाव के लिए लोग मास्क लगाते तो हैं लेकिन इनमें से 80 प्रतिशत लोग इतना समय निकलने के बाद भी मास्क लगाने का सही तरीका नहीं जानते। या तो फिर लापरवाही के चलते ऐसा करते हैं कि कुछ नहीं होता। लेकिन यह सोच गलत है कि कुछ नहीं होगा। इन्हीं छोटी-छोटी बातों का ध्यान न देने से ही संक्रमण अभी भी बना हुआ है। बात सिर्फ यह नहीं कि मास्क चेहरे पर लगा लेना है, जबकि विषय यह है कि कैसा मास्क लगाना है और किस तरह लगाना है कि सच में सुरक्षित रहा जा सके। डॉक्टर्स का कहना है कि अभी लोगों को मास्क क्यों लगाना है यह भी नहीं पता। इसलिए बहुत सारे ऐसे लोग हैं जो मास्क नहीं लगा रहे हैं। इसलिए यह जानना जरूरी है कि मास्क लगाने का सही तरीका क्या है।

मास्क लगाना क्यों है जरूरी: मास्क किसी भी इन्फेक्शन से बचने के लिए लगाना जरूरी है। यह सभी जानते हैं। लेकिन यह पता होना भी जरूरी है कि सभी लोगों को बार-बार मुंह में, नाक में हाथ लगाने की आदत होती है या फिर हाथ बार-बार चेहरे पर चला जाता है। इन्फेक्शन हाथ से मुंह और नाक तक पहुंच जाता है। इसलिए मास्क लगाना जरूरी है कि अगर चेहरे पर हाथ जाए तो मुंह और नाक इन्फेक्शन से बच सके। यही वजह है कि यदि ढीला मास्क लगाएंगे और बार-बार उसे सुधारने के लिए हाथ मुंह तक ले जाएंगे तो इन्फेक्शन से बचाव तो हो ही नहीं पाएगा। दूसरी बात यह भी है कि जिन्हें खांसी या छींक की समस्या है उन लोगों को जरूर मास्क लगाना चाहिए। जिससे खांसी या छींक से इन्फेक्शन दूसरों तक न पहुंचे। और दूसरों को भी लगाना चाहिए कि वे ऐसे किसी भी इन्फेक्शन से बच सकें।

सिंगल लेयर मास्क न लगाएं: मास्क लगाना जरूरी है पर कौन सा मास्क लगाना है यह पता होना भी जरूरी है।

मास्क लगाने को लेकर कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए-

सिंगल लेयर मास्क लगाने का कोई फायदा नहीं होता।

कोशिश करें कि डबल या ट्रिपल लेयर कपड़े का मास्क लगाएं।

मास्क ढीला नहीं होना चाहिए। ऐसा मास्क हो जो नाक से लेकर ठोढ़ी तक फिट रहे।

मास्क ऊन या अन्य किसी पतले कपड़े का न होकर कॉटन के थोड़े मोटे कपड़े का होना चाहिए। ऊन का मास्क तो फैलता है, इससे उसे लगाने का कोई मतलब नहीं रह जाता।

कई लोग वॉल्व वाले मास्क लगा रहे हैं इसे लगाने से भी इन्फेक्शन नहीं रुकता।

कपड़े के मास्क को री-यूज किया जा सकता है। लेकिन इसे कम से 30 सेकंड तक साबुन के पानी डुबो कर रखें और अच्छी तरह से सुखा लें। उसके बाद ही री-यूज करें। मास्क को हर दिन साबुन से धोना जरूरी है।

कुछ मास्क यूज एंड थ्रो होते हैं। उन्हें री-यूज करने का कोई फायदा नहीं होता। वे एक बार उपयोग करने के बाद ही व्यर्थ हो जाते हैं।

एन-95 मास्क हर किसी को लगाने की जरूरत नहीं है। यह उन लोगों के लिए है जो कोविड-19 के मरीजों के संपर्क में रहते हैं। खासकर मेडिकल स्टाफ, डॉक्टर्स के लिए एन-95 मास्क जरूरी है।

एन-95 मास्क को अगर री-यूज करना भी है तो उसे 8 से 10 घंटे उपयोग करने के बाद फिर पांच दिन तक रख देना चाहिए। फिर उसे उपयोग करना है। एन-95 मास्क को धोने के बाद उसकी क्षमता 50 प्रतिशत कम हो जाती है। इसलिए ऐसे मास्क को लगने का कोई लाभ नहीं होता।

बार-बार न निकलें मास्क

डॉ. विशाल कस्तवार ने बताया कि लोगों को अभी पता ही नहीं है कि मास्क लगाना कैसे है। इसलिए यह जानकारी होना चाहिए। तभी तो मास्क लगाने का सही मतलब है। अभी तो अधिकांश लोग कहते हैं कि मास्क लगाने से घबराहट होती है, इसलिए बार-बार मास्क निकाल लेते हैं। कुछ लोग मास्क गले में लटका लेते हैं तो कुछ सिर्फ मुंह पर मास्क लगाए रहते हैं, नाक पर नहीं लगाते। जबकि मास्क नाक को कवर करते हुए ठोढ़ी तक लगाना चाहिए। और ऐसे कि उसे बार-बार सुधारने के लिए मुंह में हाथ लगाने की जरूरत न पड़े। मास्क को बार-बार निकालना भी गलत है। ऐसा करने से इन्फेक्शन का खतरा तो बना ही रहता है। अगर मास्क निकालना भी है तो कान के पास से हटाएं, न कि चेहरे पर हाथ लगाकर।

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