REWA : रीवा की सौर ऊर्जा से धड़कती है दिल वालों की दिल्ली मेट्रो, 22 कंपनियों ने इस पर दिखाई रुचि


रीवा. निर्जन और बंजर बदवार की पहाड़ी की कभी अपराधियों के पनाहगाह के रूप में पहचान थी। अब यहां सौर ऊर्जा से तैयार होने वाली बिजली प्रदेश भर को ही रोशन नहीं कर रही है, बल्कि दिल्ली मेट्रो का दिल भी यहीं के ऊर्जा से धड़कता है। स्थापना के समय एशिया का सबसे बड़ा 750 मेगावॉट क्षमता का सिंगल साइट प्रोजेक्ट दुनिया के लिए मॉडल प्रोजेक्ट बन गया है।

नेशनल हाइवे के दोनों ओर फैला पॉवर प्रोजेक्ट
सीधी नेशनल हाइवे के दोनों ओर गुढ़ तहसील के बदवार की बंजर पहाड़ी पर 750 मेगावॉट क्षमता के पॉवर प्रोजेक्ट के प्रस्ताव पर चर्चा आठ साल पहले हुई थी। तब दुनिया में एक परिसर में इतनी बड़ी क्षमता का कोई सोलर पॉवर प्लांट नहीं था। देश की 22 कंपनियों ने इस पर रुचि दिखाई और प्रतिनिधियों को बदवार पहाड़ भेजा। इसमें आठ विदेशी कंपनियां शामिल थी। इस सोलर पॉवर प्रोजेक्ट की अपनी अलग विशेषताएं हैं, जिस पथरीली और बंजर भूमि में खेती संभव नहीं थी, यहां तक की पौधे भी नहीं लगाए जा सकते थे। उसका सोलर पॉवर प्लांट के लिए उपयोग कर दुनिया भर के लिए भारत ने नया माडल पेश किया है। जिले के बदवार पहाड़ में 15 सौ हेक्टेयर से अधिक एरिया में स्थापित रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर पॉवर प्लांट की कुल क्षमता 750 मेगावाट है। परियोजना का क्रियान्वयन मध्यप्रदेश शासन के ऊर्जा विकास निगम तथा भारत सरकार की संस्था सोलर एनर्जी कार्पोरेशन ऑफ इण्डिया की संयुक्त वेंचर कंपनी रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर(रम्स) लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है। इस पॉवर प्लांट में तीन इकाइयां हैं, सभी की क्षमता 250-250 मेगावाट की है। मध्यप्रदेश में जितने भी नए प्रोजेक्ट लग रहे हैं वह सभी रम्स की निगरानी में ही होते हैं।


केन्द्र सरकार मॉडल प्रोजेक्ट के रूप में कर चुकी है पेश
रीवा के अल्ट्रामेगा सोलर पॉवर प्लांट को भारत सरकार ने मॉडल प्रोजेक्ट के रूप में पेश किया है। गत वर्ष इंटरनेशनल सोलर समिट में 121 देशों के प्रतिनिधियों के सामने इस प्लांट की विशेषताएं बताई गईं। दरअसल एक ही परिसर में इतना बड़ा प्रोजेक्ट लगाया गया है। सरकार के प्रजेंटेशन के बाद 13 देशों का प्रतिनिधि मंडल यहां पर भ्रमण करने आया था।

सबसे सस्ती सोलर एनर्जी उत्पादन का रिकॉर्ड
सोलर एनर्जी के अब तक जितने भी प्लांट लगाए जाते रहे हैं, वहां पर बिजली उत्पादन अधिक महंगा रहा है। रीवा के इस प्रोजेक्ट को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुली आनलाइन निविदा आमंत्रित की गई थी जिसमें दूसरे देशों की करीब दो दर्जन बड़ी कंपनियों ने हिस्सेदारी की थी। आखिरी बोली 2.97 रुपए प्रति यूनिट तक गई। रीवा के प्रोजेक्ट का उदाहरण देकर कम दर पर बिजली उत्पादन के प्रयास हो रहे हैं। जानकारी मिली है कि प्रतिस्पर्धा के चलते कई प्रोजेक्ट में इससे भी सस्ती दर पर बिजली उत्पादन का अनुबंध हुआ है।

दूसरे राज्य में सप्लाई करने वाला पहला प्रोजेक्ट
देश में जितने भी सोलर एनर्जी से जुड़े पॉवर प्लांट हैं, उनसे बिजली उत्पादन के बाद उसी राज्य में खपत भी हो रही है। रीवा का सोलर पॉवर प्रोजेक्ट पहला है जिसकी बिजली दूसरे राज्य दिल्ली मेट्रो रेल कार्पोरेशन को भेजी जा रही है। रम्स और डीएमआरसी के अनुबंध के तहत दिल्ली मेट्रो को 24 प्रतिशत बिजली दी जानी है।

पर्यावरण के लिए ढाई लाख पेड़ों के बराबर 
दावा है कि इस प्रोजेक्ट से प्रतिवर्ष 15.7 लाख टन कार्बन डाईआक्साइड उत्सर्जन को रोका जा रहा है। यह लगभग 2.60 लाख पेड़ तैयार करने के बराबर है। इस पर किए गए अध्ययन के बाद अब एक ही स्थान पर बड़ी क्षमता का सोलर पॉवर प्लांट लगाने के लिए कई सरकारें आगे आई हैं।

प्रधानमंत्री ने एशिया का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट बताया तो बहस छिड़ गई
इसी साल दस जुलाई को रीवा का सोलर पॉवर प्लांट प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्चुअल रूप से लोकार्पित किया है। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में एशिया के सबसे बड़े सोलर प्रोजेक्ट के रूप में बताया तो बहस भी छिड़ गई थी। प्रधानमंत्री ने ही कहा था कि यह प्रोजेक्ट दुनिया को नई राह दिखाएगा। कई विपक्षी दलों ने दूसरे प्लांटों की उत्पादन क्षमता का हवाला देकर कहा कि इससे बड़े प्लांट और भी हैं। दावा अभी भी है कि सिंगल साइट का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट यह अभी भी है।

कभी गरजती थीं सेना की तोपें
रीवा-सीधी नेशनल हाइवे 75 पर स्थित बदवार पहाड़ी कभी सेना के हवाले रहती थी। यहां पेड़-पौधे नहीं होने के कारण सर्दियों के दिनों में सेना तोपाभ्यास करती थी। सेना का कैंप हटने के बाद यह इलाका अपराधियों की शरणस्थली बन जाता था।
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