REWA : अनोख़ी मिसाल : अपने हुए दूर तो इन योद्धाओं ने दी मुखाग्नि, अब तक 145 शवों को दे चुके मुखाग्नि


रीवा. कोरोना प्रोटोकाल के तहत संक्रमितों के मरने के बाद अंतिम संस्कार कर आए तो मोहल्ले लोगों ने घुसने नहीं दिया। लेकिन सेवा के जब्जे के आगे विरोध भी घुटने टेक दिया। कोरोना में आज परिस्थितियां काफी स्पष्ट हो गई हैं। एहतियातन से पता लग गए हैं। इस लिए उनका योगदान किसी को कमतर महसूस हो सकता है लेकिन, उन लोगों ने तब किया जब कोरोना व उसका खौफ चरम पर था।

अपने ने अंतिम दर्शन से दूर रखा

खौफ के कारण निष्ठुरता इतनी हावी थी कि कई लोगों ने अपने सगे का अंतिम दर्शन करने से भी खुद को दूर रखा। शव लावारिस सा छोड़ दिया। उस समय कोरोना वॉरियर्स सामने आए। और विधि विधान से गौरों को भी अपनों की तरह अंतिम संस्कार नसीब कराया।
 
इन निगम कर्मचारियों ने दी मुखाग्नि 
ऐसी ही मिसाल नगर निगम रीवा में संविदाकमर्मी छतरपुर के दीपक वाल्मीकि और दमोह के नीजर करोसिया की है। नीरज बताते हैं कि पहले दिन 3 अप्रेल को संजय गांधी अस्पताल में मोर्चरी से एक शव को एंबुलें से बदरिया लेकर जाकचर वहां अंतिमसंस्कार किया। जब घर लौटे तो अचरज में पड़ गए। पूरा मोहल्ला उन्हें धर में न घुसने देने के लिए आ खड़ा हुआ। लोगों को आशंका थी कि उनके मोहल्ले में कोरोना फैल जाएगा। 

मोहल्ले में विरोध के बाद वाहन में बिताए रात 
ऐसा विरोध कि दीपक ने निगम के मवेशियों के वाहन पर रात बिताई। और नीरज सेनेटाइज छिडक़ाव वाली गाड़ी में सोया। दीपक छह माह और नीरज आठ माह से घर नहीं गए। अब तक 145 से अधिक शवों को मुखाग्नि दे चुके हैं।

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