REWA : रोजगार दिलाने के बहाने रीवा के मजदूरों को माफिया ने जयपुर में बनाया बंधक : कलेक्टर इलैयाराजा टी के हस्तक्षेप से माफिया के चंगुल से मुक्त हुए मजदुर

रीवा. माफिया रोजगार दिलाने के बहाने रीवा के मजदूरों को जयपुर में बंधक बना लिए। कोरोना काल में लंबे समय से पीडि़त परिवार परेशान रहे। कलेक्टर इलैयाराजा टी के हस्तक्षेप पर जयपुर में माफिया के चंगुल से मजदूरों को मुक्त कराया जा सका। जयपुर से मुक्त होने के बाद शनिवार दोपहर मजदूर रीवा कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। कलेक्टर के प्रति आभार व्यक्त करते हुए पुनर्वास एवं सामाजिक सुविधा प्रदान करने की मांग उठाई है। कलेक्टर ने श्रमिकों को पांच-पांच हजार रुपए और ग्राम पंचायत में पुनर्वास के लिए आवास, जमीन आदि दिलाने का दिलासा दिया है।

जुलाई में अच्छे काम के लिए कहकर ले गए

जिले के जवा क्षेत्र के देवखर गांव निवासी इन्द्रमणि पिता जमुना प्रसाद व खारा गांव निवासी सुनील पिता ब्रजमोहन और चचेरा भाई अनीत कुमार पिता दाइलाल को पड़ोस गांव का ठेकेदार जयपुर में अच्छा रोजगार दिलाने के नाम पर जुलाई 2020 में बहलाफुसलाकर ले गया। दो दिन तक काम नहीं मिला। तीसरे दिन जयपुर के हिगोनिया तहसील रेनवाल में एक आटा, मैदा और दलिया की बोरियों की ट्रकों पर लोडिंग और अनलोडिंग का काम कराने लगे। अनीत और सुनील की उम्र कम होने के कारण काम नहीं कर पा रहे थे। जबरिया सुबह सात बजे से रात दस बजे तक ट्रक पर बोरियां लोडिंग करते थे। काम नहीं करने पर मारने के लिए धमकाते थे। चोरी छिपे दूसरे के मोबाइल पर परिवार वालों से बात की तो घर वालों को पता चला।

कलेक्टर ने जयपुर के कलेक्टर से की चर्चा

सामाजिक कार्यकर्ता हरिशचंद्र दीपांकर ने पीडि़त परिवार की महिला राजकली को लेकर कलेक्टर इलैयाराजा टी से मुलाकात की। कलेक्टर ने आवेदन को जयपुर कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक समेत आइजी व डीआई को भेजकर मजदूरों को मुक्त कराने के लिए आग्रह किया। कलेक्टर के हस्तक्षेप पर जयपुर के अधिकारियों के सहयोग से बंधक बनाए गए जगह पर पहुंचे। काफी जद्दो जहद के बाद मजदूर इन्द्रमणि, अनीत और सुनील को ठेकेदार और कंपनी संचालकों से मुक्त कराया गया। मजदूर जयपुर से मुक्त होने के बाद सीधे कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। कलेक्टर से मिलकर आभार व्यक्त किया और सहयोग मांगा है।

कलेक्टर ने दिए पांच-पांच हजार रुपए

जयपुर से रीवा पहुंचे पीडि़त श्रमिकों से कलेक्टर ने हालचाल पूछा तो श्रमिक फफक पड़े और बोले कि साहब आप नहीं होते तो इस दरवाजे नहीं आ पाते। वहीं तिल-तिल कर दमतोड़ देते। कलेक्टर ने श्रमिकों को काम दिलाने का भी परोसा दिलाया। कलेक्टर ने तत्काल श्रमिको को पांच-पांच जार रुपए आर्थिक सहयोग करने के साथ ही गांव में पुनर्वास की व्वस्था कराने का आश्वासन दिया है।

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