वाॅलंटियर की मौत वैक्सीन से हुई या नहीं ? सवाल ज्यों का त्यों बना हुआ है..



पीपुल्स मेडिकल कॉलेज में भारत बायोटेक की कोवैक्सीन का ट्रायल टीका लगवाने के 9 दिन बाद घर में मृत मिले 45 वर्षीय दीपक मरावी की मौत का मामला शनिवार को गरमा गया। सबसे पहले कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने ट्रायल में शामिल ज्यादातर वॉलंटियर्स के गरीब बस्तियों से होने पर सवाल उठाए।

सियासी आरोप लगते ही स्वास्थ्य मंत्री डॉ. प्रभु राम चौधरी सामने आए। उन्होंने कहा- वैक्सीन के चलते मरावी की मौत नहीं हुई है, क्योंकि वैक्सीन का प्रतिकूल प्रभाव होता तो वह 24 से 48 घंटे में असर दिखता। चिकित्सा शिक्षा विभाग मामले की जांच कर रहा है। इसके बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मृतक का विसरा जांच के लिया गया है।

रिपोर्ट आने के बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। ऐसा कोई भ्रम न फैलाएं, जिससे वैक्सीन को लेकर गलत धारणा बने। कोवैक्सीन बनाने वाली कंपनी भारत बायोटेक ने भी कहा- वॉलंटियर की मौत का वैक्सीन के डोज से संबंध नहीं है। मौत का संभावित कारण कार्डियॉरेस्पिरेट्री फेलियर हो सकता है, जो कि हो सकता है जहर के चलते हुआ हो। पुलिस मामले की जांच कर रही है। दूसरी ओर, दीपक के बेटे आकाश मरावी ने पीपुल्स प्रबंधन पर कई आरोप लगाए।

उन्होंने मीडिया से चर्चा में कहा कि टीका लगाने के बाद पीपुल्स प्रबंधन की क्लीनिकल ट्रायल टीम ने पिता जी का कभी हेल्थ फॉलोअप नहीं किया। टीका लगाने के बाद पिताजी को टीम ने वो डायरी भी नहीं दी, जिसमें उन्हें अपनी सेहत का हर दिन का हिसाब-किताब लिखना था। दूसरी ओर, चिकित्सा शिक्षा आयुक्त निशांत वरवडे ने वॉलंटियर की मौत की जांच के लिए जीएमसी के छह डॉक्टरों की टीम पीपुल्स अस्पताल भेजी। टीम ने महज तीन घंटे जांच की और पीपुल्स प्रबंधन को क्लीनचिट दे दी।

इस कमेटी ने भी मृतक के परिजनों से बात किए बिना रिपोर्ट सबमिट कर दी। इस पर जब समिति के अध्यक्ष डॉ. अरुण कुमार श्रीवास्तव से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि पीपुल्स ने ट्रायल प्रोटोकॉल का पालन किया या नहीं, हमें सिर्फ यही जांचना था। फिलहाल दीपक के शव की विसरा रिपोर्ट और पोस्टमार्टम की फाइनल रिपोर्ट आना बाकी है।

मौत टीके से हुई या नहीं

जब तक दो कर्मचारी आए, तब तक मौत हो चुकी थी : वहीं, आकाश का कहना है कि 12 दिसंबर को टीका लगाने के बाद से अस्पताल से कोई भी जांच के लिए नहीं आया। मैंने 21 दिसंबर को पिता जी के निधन से पहले अस्पताल को उनकी सेहत बिगड़ने की सूचना दी थी। इसके बाद पीपुल्स के दो कर्मचारी घर आए थे। लेकिन, तब तक उनका निधन हो चुका था। इसके बाद पिताजी के शव को कस्टडी में लेकर पोस्टमार्टम के लिए हमीदिया अस्पताल भेज दिया गया।

टीम ने दीपक से भरवाए गए सहमति पत्र भी देखे : दीपक की मौत का मामला सामने आने के बाद चिकित्सा शिक्षा आयुक्त निशांत वरवडे ने जीएमसी के छह डॉक्टरों की टीम पीपुल्स अस्पताल भेजी। टीम ने क्लीनिकल ट्रायल दफ्तर में दोपहर 12 बजे से शाम 3 बजे तक ट्रायल प्रोटोकॉल से जुड़े दस्तावेजों की जांच की।

मौत के बाद भी वॉलंटियर्स की लिस्ट से नहीं हटाया नाम

दीपक के बेटे का आरोप है कि ट्रायल के प्रोटोकॉल के तहत रिसर्च प्रोजेक्ट के प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर को दीपक की सेहत में होने वाले बदलावों का फॉलोअप लेना था। लेकिन, ऐसा नहीं किया गया।

जबकि पीपुल्स प्रबंधन का कहना है कि ट्रायल प्रोटोकॉल के नियमों का पालन करते हुए दीपक की सेहत का लगातार फॉलोअप किया गया। इसका रिकॉर्ड उनके पास है। जीएमसी के जांच दल की रिपोर्ट में भी इसका जिक्र है।

अस्पताल ने दीपक की मौत के बाद भी टीके के दूसरे डोज वाले वॉलंटियर्स की लिस्ट से उनका नाम नहीं हटाया था। इसलिए 8 जनवरी को ट्रायल टीम ने टीके के दूसरे डोज के लिए उनके घर कॉल किया था।

आगे क्या- ट्रायल का डाटा डीकोड हो, तभी मौत से पर्दा उठेगा : दीपक को कोवैक्सीन का टीका लगाया गया था अथवा प्लेसिंबो (इंजेक्शन वाला पानी)। इसका खुलासा क्लीनिकल ट्रायल स्टडी के डाटा के डीकोड होने के बाद होगा। इस डाटा को आईसीएमआर और भारत बायोटेक के वैज्ञानिकों की टीम स्टडी पूरी होने के बाद डीकोड करेगी।

एक ही परिवार के कई लोगों को टीका लगाया : दिग्विजय

दिग्विजय टीला जमालपुरा स्थित दीपक के घर पहुंचे। उन्होंने कहा कि ट्रायल के शुरुआती 6 दिन में महज 45 ही वॉलंटियर आए थे, लेकिन फिर 1 महीने के अंदर ही 1700 से अधिक लोगों पर ट्रायल किया गया। इसमें 95% भोपाल के ही लोग हैं। एक ही परिवार के कई लोगों को टीका लगा दिया गया। लोगों का आरोप है कि उन्हें पता ही नहीं कि उन पर ट्रायल किया जा रहा है। इस मामले की जांच होनी चाहिए।

सच पर पर्दा क्यों: मौत के 18 दिन बाद भी न विसरा रिपोर्ट आई, न फाइनल पोस्टमार्टम रिपोर्ट
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