REWA : पुलिस विभाग में फिर एक कारनामा उजागर : पुलिस के संरक्षण से फर्जी मुकदमा दर्ज कर युवक को फसाया : पढिये


रीवा पुलिस की छवि सुधारने का प्रयास भले ही पुलिस अधीक्षक राकेश कुमार सिंह द्वारा कितना भी किया जाय किन्तु थाना प्रभारी अपने कारनामों से विभाग की किरकिरी कराने में कोई कसर नहीं छोंड़ रहे हैं।

शहर के सिविल लाइन थाना प्रभारी ने ऐसे ही एक मामले में बिना किसी साक्ष्य के फरियादी अमित सिंह उर्फ बिक्की द्वारा रंजिशन विनय सिंह बघेल,सिद्धार्थ सिंह उर्फ सिद्धू एवं पवन शुक्ला के विरुद्ध शिकायत करने पर मारपीट का प्रकरण पंजीबद्ध कर लिया। शिकायतकर्ता द्वारा यह बताया गया कि आरोपी विनय सिंह बघेल,सिद्धार्थ सिंह एवं पवन शुक्ला द्वारा पान खाने के लिए पैसे की मांग की गई और ताला हाउस चलने तथा भइया के सपोर्ट में रहने की बात पर मारपीट की गई।इस शिकायत की बिना जांच किये सिविल लाइन थाना प्रभारी अनिमेष द्विवेदी ने 294,323,506,34 IPC का प्रकरण पंजीबद्ध कर दिया गया।

इस प्रकरण के विरोध में विनय सिंह बघेल द्वारा पुलिस अधीक्षक को पूरे साक्ष्य के साथ आवेदन दे कर जांच की मांग करते हुए बताया गया कि वह घटना दिनांक को शहर में मौजूद ही नहीं थे,वह उस दिन इंदौरमें थे,उनकी इंदौर की सीसीटीव्ही फुटेज,आने जाने की टिकट,कॉल रिकार्डिंग और अन्य कई साक्ष्य उनके पास मौजूद हैं बाबजूद इसके पुलिस ने रिश्वत लेकर प्रकरण पंजीबद्ध कर उन्हें फंसा रही है साथ हीगिरिफ्तार करने की कोशिश भी की जा रही है।

सिद्धार्थ सिंह उर्फ सिद्धू के विरुद्ध की गई एनएसए की कार्यवाही इस फर्जी प्रकरण में सिविल लाइन पुलिस की भूमिका पूर्णरूप से संदेह के घेरे में हैं,फर्जी मारपीट के प्रकरण में पुलिस ने सिद्धार्थ सिंह बघेल को गिरफ्तार किया है और एनएसए (नेशनल सेक्युरिटी एक्ट) यानी राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्यवाही कर जेल भेज दिया गया है,सूत्रों की मानें तो सिविल लाइन पुलिस ने दबाब एवं रिश्वत का खेल कर यह कार्यवाही की है। क्योंकि जब इस मामले में जिन्हें आरोपी बनाया गया है उनमें से एक द्वारा इस बात का शपथ पत्र देकर बताया जा रहा है कि वह घटना दिनांक को शहर में मौजूद ही नहीं थे तो मतलब साफ है कि प्रकरण पूरी तरह से फर्जी है। एक ओर जहां कानून द्वारा अपराधी को सुधरने का मौका दिया जाता है तो वहीं दूसरी ओर पुलिस द्वारा फर्जी प्रकरण कायम कर जबरदस्ती अपराधी की संज्ञा किसी को दी जाती है।

राजनीतिक और रिश्वत के खेल में पुलिस द्वारा की जा रही फर्जी कार्यवाही जिस सिद्धार्थ सिंह बघेल के विरुद्ध एनएसए की कार्यवाही की गई है, वह संविदाकार एवम हाइवा संचालक हैं एक माह पूर्व ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के नेतृत्व में रीवा विधायक एवं मीडिया के सामने पुलिस परिवहन और खनिज विभाग के भ्रष्टाचार को उजागर किया गया था, तबसे से इन्हें फर्जी प्रकरण में फंसाने की साजिश रची जा रही थी जिसकी शिकायत भी पुलिस अधीक्षक के पास पहुंची थी।

पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सोचनीय विषय यह है कि कथित आरोपी सिद्धार्थ सिंह, विनय सिंह एवं पवन शुक्ला के विरुद्ध शिकायत में यह कहा गया है कि पान खाने के लिए पैसे मांगे गए और न देने पर मारपीट की गई,जो व्यक्ति हाइवा का मोटर मालिक हो संविदाकार हो,महँगी गाड़ियां जिसके पास है वह व्यक्ति पान खाने के लिए किसी से रिश्वत मांगेगा और न देने पर मारपीट करेगा।विनय सिंह बघेल द्वारा शिकायत कर यह साक्ष्य भी दिया गया है कि वह घटना दिनांक को मौजूद नहीं थे। मतलब साफ है कि पुलिस ने बीते दिनों पुलिस,परिवहन और खनिज विभाग के गठजोड़ वाले भ्रष्टाचार को उजागर करने के बाद मौके की तलाश में थी और एक फर्जी शिकायत दर्ज कर कार्यवाही कर रही है।

रीवा पुलिस का शर्मनाक चेहरा आया सामने

चाकघाट थानाप्रभारी के बाद सिविल लाइन थाना प्रभारी रीवा के करतूतें सामने आई हैं,कानून भी अपराधियों को जहाँ सुधरने का मौका देता है तो वहीं सिविल लाइन थाना प्रभारी ने फर्जी प्रकरण पंजीबद्ध कर पूर्व के अपराधों को आधार बनाकर एनएसए जैसी कार्यवाही कर पुलिस परिवहन और खनिज विभाग के भ्रष्टाचार के लगे काले धब्बों को मिटाने का प्रयास कर रहे हैं। विनय सिंह बघेल द्वारा मामले की डीजीपी एवं मानवाधिकार आयोग से शिकायत करने की बात कही गई है अभी देखना होगा कि ईमानदार जिला कप्तान राकेश सिंह उक्त मामले को कितना गंभीरता से लेते हैं।

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