MP : कोरोना संक्रमण की स्थिति को देखते आज राज्य सरकार नाइट कर्फ्यू और दुकानों के समय में बदलाव को लेकर ले सकती है निर्णय

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महाराष्ट्र के सीमावर्ती जिलों के साथ कुछ शहरों में रात्रि कर्फ्यू लगाने के साथ दुकानों के खुलने और बंद होने का समय भी घटाया जा सकता है। कोरोना संक्रमण की स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार इस पर आज निर्णय ले सकती है। क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप की ओर से मिले सुझावों में दुकानें रात 11 बजे बंद करने और सुबह 7 बजे खोलने की बात कही गई है। रात्रि कर्फ्यू इंदौर में लगेगा या नहीं इसे लेकर निर्णय लिया जा सकता है। इंदौर में पिछले 10 दिनों से लगातार संक्रमितों का आंकड़ा 100 के पार बना हुआ है। एक सप्ताह में ही एक्टिव मरीजों की संख्या तीन गुना हो गई है।

गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने बताया कि मप्र के 12 सीमावर्ती जिलों में अलर्ट जारी कर दिया गया है। यहां थर्मल स्क्रीनिंग, मेडिकल जांच के बिना आने-जाने पर मनाही है। नाइट कर्फ्यू को लेकर होने वाली क्राइसिस मैनेजमेंट की बैठक में विचार किया जाएगा। भोपाल और इंदौर के साथ ही सीमावर्ती जिलों को लेकर इसमें बात की जाएगी।

कोरोना के अब तक 59 हजार से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। इनमें सुदामा नगर ऐसा इलाका है जो कई महीनों से लगातार हॉट स्पॉट की सूची में टॉप पर है। बीते पांच दिनों के संक्रमित क्षेत्रों की सूची देखी जाए तो लगातार सुदामा नगर और सिलिकॉन सिटी के मामले सामने आ रहे हैं। इसके बाद काटजू कॉलोनी, स्कीम 114 व नंदा नगर ऐसे क्षेत्र हैं, जहां सबसे ज्यादा संक्रमित मरीज सामने आए हैं। खजराना व आजाद नगर में भी इक्का-दुक्का मरीज मिले हैं।

कोरोना संक्रमण जब शुरू हुआ था तब खजराना, चंदन नगर, रानीपुरा, टाट पट्टी बाखल आदि कुछ ऐसे क्षेत्र थे जिन्हें हॉट स्पाट माना जा रहा था। इसके बाद मालवा मिल हॉट स्पॉट क्षेत्र बनकर सामने आया, लेकिन बीते छह माह में सुदामा नगर व सुखलिया क्षेत्र में सबसे ज्यादा मरीज मिले हैं। कोविड-19 के नोडल अधिकारी डॉ. अमित मालाकार कहते हैं ऐसी जगह ज्यादा संक्रमित मरीज मिल रहे हैं जहां जनसंख्या घनत्व ज्यादा है, इसलिए सुदामा नगर, सुखलिया जैसे इलाकों में ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं। वहीं कॉन्ट्रेक्ट ट्रेसिंग इंचार्ज डॉ. अनिल डोंगरे कहते हैं कि सुदामा नगर में अभी अचानक मरीज नहीं बढ़े, बल्कि पहले से ही यहां मरीजों की संख्या बहुत अधिक थी।

30 प्रतिशत तक बेड की व्यवस्था करें

इंदौर जिला प्रशासन ने स्वास्थ्य अधिकारियों और निजी अस्पतालों के प्रतिनिधियों को निर्देश दिए कि वे 30 प्रतिशत तक बेड की व्यवस्था करें। अन्य सभी तैयारियां भी कर लें। यहां इंदौर के अलावा आसपास के जिलों से भी मरीज आ सकते हैं। इस बीमारी में सबसे ज्यादा ऑक्सीजन की जरूरत होगी, इसलिए इसकी पूरी तैयारी रखें। इसमें अधिकारियों ने कहा कि वे निजी अस्पताल जिन्होंने कोविड-19 के बेड की संख्या कम कर दी थी, वापस अपनी क्षमता बढ़ा लें। इंडेक्स मेडिकल कॉलेज को सशुल्क कोविड वार्ड तैयार रखने की अनुमति दी। एमजीएम मेडिकल कॉलेज डीन डॉ. संजय दीक्षित ने कहा यदि वायरस का बदला हुआ स्ट्रेन आता है तब भी बीमारी के प्रबंधन में कोई बदलाव नहीं होगा। इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है।

वैक्सीन ज्यादा से ज्यादा लोगों को लगे, इसलिए उन्हें जागरूक करें

बैठक में सीरो-सर्वे करवाने पर भी बात हुई। अप्रैल 2020 में संक्रमित हुए लोगों की दोबारा जांच करवाई जाएगी। 100 केस जांच में लिए जाएंगे। एमजीएम मेडिकल कॉलेज को यह जिम्मेदारी दी गई। 42 अस्पतालों के प्रतिनिधियों से पूछा कि उनके यहां कितने बेड हैं। वे भी 30 प्रतिशत बेड आरक्षित रखें ताकि बाद में परेशानी नहीं आए। कुल एक्टिव मरीजों के बारे में पूछने पर स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया होम आइसोलेशन में 473 एक्टिव केस हैं। निजी अस्पतालों कोरोना वैक्सीन को लेकर जागरूक करें, ताकि ज्यादा लोग टीका लगवा सकें।

दूसरा मैसेज मिलने में 8 दिन का अंतर आएगा

यह मुद्दा भी उठा कि दूसरा टीका लगवाने वाले लोगों को मैसेज समय पर नहीं आ रहे। इस पर कहा गया कि मैसेज एप के माध्यम से जनरेट हो रहे हैं। पहले डोज और 28 दिन के बाद दूसरे डोज का मैसेज जनरेट करता है। इसलिए आठ दिन का गेप आ सकता है। बैठक में सीएमएचओ डॉ. पूर्णिमा गडरिया, कोविड के नोडल अधिकारी डॉ. अमित मालाकार, कॉन्ट्रेक्ट ट्रेसिंग इंचार्ज डॉ. अनिल डोंगरे आदि मौजूद थे।

इंदौर में फिर मिले 133 नए संक्रमित

देर रात मात्र 1139 सैंपल टेस्ट में 133 नए संक्रमित सामने आए हैं। वहीं, 998 मरीजों की रिपोर्ट निगेटव मिली है। अब तक जिले में 8 लाख 26 हजार 974 मरीजों के सैंपलों की रिपोर्ट आ चुकी है। इसमें 59 हजार 234 लोग संक्रमित मिले हैं। 57 हजार 498 मरीज जहां ठीक होकर अपने घर लौट चुके हैं। वहीं, 933 की जान जा चुकी है। अभी भी 803 मरीज अस्पताल में भर्ती हैं। 11 फरवरी को एक्टिव मरीजों की संख्या 280 तक पहुंच गई थी।

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