सीधी बस घटना से दहला मध्यप्रदेश : पढ़िए उन जांबाजों की कहानी जिन्होंने दे डाली मौत को मात

 

सीधी। बस हादसे की दिल दहला देने वाली इस घटना में कुछ ऐसे भी थे जिन्होंने अपनी हिम्मत से मौत को भी मात दे दी। इन यात्रियों ने बताया कि आखिर हुआ क्या था और कैसे बस नहर में गिरी। जिंदगी की जंग जीतने वाले जांबाजों की कहानी उन्हीं की जुबानी।

हिम्मत से जिंदगी का किनारा पाया

अनिल तिवारी ने बताया कि जैसे ही बस नहर में डूबने लगी, उन्होंने बस की बंद खिड़की को जोर से हाथ मारा, जिससे खिड़की का कांच टूट गया। उन्हें तैरना आता था। अनिल ने अपनी जान की परवाह नहीं करते हुए बगल में बैठे सुरेश गुप्ता को बचाने को कोशिश की और उनका हाथ पकड़कर खिड़की से बाहर खींच लिया। सुरेश गुप्ता 62 वर्ष के हैं, तैरना भी कम जानते थे लेकिन दोनों ने एक-दूसरे का हाथ पकड़कर नहर का किनारा पकड़ लिया। करीब 300 मीटर दूर जाकर एक पत्थर मिला, जिसके सहारे दोनों अपनी जान बचा पाए।

सतर्कता और हिम्मत से बचाई खुद की जान

ज्ञानेश्वर चतुर्वेदी बस में सामने के कांच से आगे की ओर देख रहे थे। जैसे ही बस नहर में गिरने लगी तो उन्होंने खिड़की के कांच में पैर मारा और पानी में कूद गए। गनीमत यह रही कि वे बस के किसी हिस्से में नहीं फंसे। देखते ही देखते उनकी आंखों के सामने ही बस धीरे-धीरे डूब गई। वे नहर का किनारा पकड़कर तैरने लगे। तभी एक सीढ़ी मिली, जिसे पकड़कर ऊपर आ गए।

एक मिनट की देरी से बच गई जान

वैसे तो सतना नगर निगम में पदस्थ रहदुरिया निवासी मंगलेश्वर पांडे पिछले 15 साल से समय पर बसस्टैंड पहुंच जाते थे लेकिन मंगलवार को वह एक मिनट लेट हो गए और बस उनके आंखों के सामने से ही निकल गई। मंगलेश्वर का कहना है कि आज ईश्वर ने उनकी जान बचा ली। हत्था बसस्टैंड पर उनका बेटा बाइक से छोड़ने आता है। जब वह बसस्टैंड की ओर जा रहे थे, तभी उनके सामने से बस निकल गई। वह उसे रोकने का प्रयास करते रहे लेकिन बस नहीं रुकी। मंगलेश्वर का कहना है कि मैं केवल एक मिनट लेट हुआ और इस एक मिनट ने मेरी जान बचा ली।

जिले में मंगलवार सुबह यात्रियों से भरी बस सोन नदी पर बने बाणसागर बांध की मुख्य नहर में समा गई। हादसे में अब तक 45 लोगों के शव निकाले जा चुके हैं। इनमें 24 पुरुष, 20 महिलाएं और एक बच्चा शामिल है। लापता तीन यात्रियों की खोजबीन जारी है। हादसे में प्रभावित सभी यात्री सीधी व आसपास के निवासी हैं।

हादसा सुबह साढ़े सात बजे सीधी जिले के रामपुर नैकिन स्थित पटना पुल के पास हुआ। बस सीधी से सतना जा रही थी। सकरी सड़क पर ट्रक से पासिंग लेते समय बस का पिछला पहिया फिसला और बस नहर में गिर गई। चालक समेत सात लोगों को ग्रामीणों ने सुरक्षित बाहर निकाला।

डेढ़ घंटे बाद शुरू हो पाया बचाव अभियान

घटना सीधी जिला मुख्यालय से करीब 70 किमी दूर होने से हादसे के डेढ़ घंटे बाद सुबह नौ बजे राहत एवं बचाव कार्य शुरू हो पाया। नहर गहरी होने और पानी का बहाव तेज होने से बस पूरी तरह नहर में समा गई थी।

बस का परमिट रद

हादसे का शिकार हुई बस (एमपी 19 पी 1882) 32 सीटर थी। इसके बाद भी बस में क्षमता से अधिक 55 यात्रियों को बैठाया गया था। इसकी फिटनेस दो मई 2021 तक है। सीधी से सतना रूट के लिए बस को 12 मई 2025 तक का परमिट मिला था। हादसे के बाद सतना आरटीओ संजय श्रीवास्तव ने बस का परमिट और चालक का लाइसेंस रद कर दिया गया है।

सीधी-सतना मार्ग पर पहले भी हो चुके हैं दो बड़े हादसे

1988 में लिलजी बांध में बस गिरने से 88 लोगों की मौत हुई थी। 18 नवंबर 2006 को गोविंदगढ़ तालाब में बस घुसने से 68 लोगों की मौत हो गई थी।

बस दुर्घटना में जान गंवाने वाले यात्रियों की जानकारी

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