MP : अब विद्यार्थी किसी भी कॉलेज में एडमिशन लेकर निरस्त कराता है तो वापस की जाए फीस : राज्यपाल आनंदीबेन पटेल

भोपाल । अगर कोई विद्यार्थी मेडिकल, इंजीनियरिंग या किसी भी कॉलेज में एडमिशन लेकर निरस्त कराता है तो उसकी फीस वापस की जाए। साथ ही सभी विश्वविद्यालय समय पर परीक्षा कराएं और छात्रहित में कार्य करें। इसके अलावा अगर कोई विद्यार्थी पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद की गतिविधियों में भी शामिल रहता है तो उसके दैनिक भत्ते में 200-200 स्र्पये की वृद्धि की जाए। यह निर्देश राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने राजभवन में आयोजित 98वीं विश्वविद्यालय समन्वय समिति की बैठक में दिए।

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अब अगर कोई विद्यार्थी कॉलेज की तरफ से स्थानीय स्तर पर खेलने जाता है तो उसे मिलने वाला दैनिक भत्ता 100 स्र्पये के बदले 300 स्र्पये मिलेगा। दूसरे जिले में खेलने जाने पर 200 स्र्पये के बदले अब 500 स्र्पये मिलेगा। साथ ही दूसरे राज्यों में खेलने के लिए जाने पर 400 के बदले 600 स्र्पये दैनिक भत्ता दिया जाएगा। राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालयीन परीक्षा प्रक्रिया पूर्ण होते ही विद्यार्थियों को मार्कशीट और प्रमाण-पत्र ऑनलाइन उपलब्ध कराएं, जिससे उन्हें उच्च अध्ययन या रोजगार संबंधी आवेदनों में किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़े। उन्होंने कहा कि विवि में दीक्षा समारोह गरिमामय और भव्यता के साथ होना चाहिए। समारोह की समस्त गतिविधियों के लिए निश्चित प्रक्रिया निर्धारित कर आयोजित करने के निर्देश दिए। ऐसी व्यवस्था की जाए कि किसी एक स्थान पर फीस जमा कर देना विद्यार्थी के पाठ्यक्रम और संस्थान के विकल्पों के चयन में बाधक नहीं हो। इसके लिए प्रवेश के समय शुल्क केंद्रीकृत बैंक खाते में जमा कराने संबंधी व्यवस्था का परीक्षण किया जाए। इस अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रमुख सचिव अनुपम राजन, राज्यपाल के प्रमुख सचिव डीपी आहूजा भी मौजूद थे। बैठक में प्रदेश के सभी शासकीय एवं निजी विश्वविद्यालयों के कुलपति एवं विभाग के अधिकारी शामिल हुए।

कुलपति टीम बनाकर कार्य करें

राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालयों को नई शिक्षा नीति के अनुरूप आत्म-निर्भर बनाने की पहल की जाए। उन्होंने प्रदेश के विश्वविद्यालयों को कृषि एवं इंजीनियरिंग कॉलेजों के साथ आपसी समझौते पर कार्य करने के लिए कहा। ऐसी गतिविधियों को वार्षिक कैलेंडर में स्पष्ट रूप से उल्लेखित करें। राज्यपाल ने कहा कि कुलपति टीम बनाकर कार्य करें। स्ववित्त पोषण योजना में नए पाठ्यक्रम रोजगारोन्मुखी होने चाहिए। पाठ्यक्रमों की स्वीकृति, संचालन, संकाय की नियुक्ति और वेतन आदि व्यवस्थाओं में एकरूपता बनाई जाए। उन्होंने नई नियुक्तियों की प्रक्रिया को पूर्ण पारदर्शिता के साथ और सभी साक्षात्कारों की रिकार्डिंग भी कराए जाने के निर्देश दिए।

विवि नई शिक्षा नीति को प्रभावी तरीके से लागू करें

इस अवसर पर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि विश्वविद्यालय नई शिक्षा नीति को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए तालमेल के साथ कार्य करें। उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग कर नवाचार के प्रयास करें, तभी वर्तमान समय की चुनौतियों का बेहतर ढंग से सामना कर सकेंगे। दूरस्थ शिक्षा केंद्रों की स्थापना प्रदेश के महाविद्यालयों में की गई है। ऐसे प्रयास विश्वविद्यालयों द्वारा भी किए जाना चाहिए। विश्वविद्यालय कृषि शिक्षा को विस्तारित करने की दिशा में सकारात्मक कदम उठाएं। उन्होंने विश्वविद्यालय की परीक्षा, फीस और विभिन्न व्यवस्थाओं में एकरूपता के लिए समन्वय बनाकर कार्य करने पर बल दिया।

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